
नारी डेस्क : हमेशा हंसती-मुस्कुराती नजर आने वालीं अर्चना पूरन सिंह इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही हैं। ‘लाफ्टर क्वीन’ के नाम से मशहूर अर्चना के चेहरे की मुस्कान के पीछे छुपा दर्द अब सामने आया है। उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने खुलासा किया कि अर्चना एक बेहद दुर्लभ और लाइलाज बीमारी CRPS (Complex Regional Pain Syndrome) से पीड़ित हैं।
कैसे शुरू हुई यह गंभीर बीमारी?
साल 2025 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान अर्चना पूरन सिंह हादसे का शिकार हो गईं। रात में शूटिंग के समय गिरने से उनकी कलाई टूट गई, जिसके बाद सर्जरी करानी पड़ी। शुरुआत में इसे मामूली चोट माना गया, लेकिन सर्जरी के बाद भी उनका दर्द कम नहीं हुआ। लगातार जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें CRPS हो गया है। CRPS एक ऐसी बीमारी है जो किसी चोट के बाद हो सकती है, जिसमें दर्द सामान्य से कई गुना ज्यादा होता है। इस बीमारी में हाथ या पैर में तेज जलन, सूजन, रंग बदलना और हिलाने में परेशानी जैसी दिक्कतें होती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है और प्रभावित अंग पहले जैसा कभी नहीं हो पाता।

दर्द के बावजूद नहीं मानी हार
इस गंभीर बीमारी के बावजूद अर्चना पूरन सिंह ने हार नहीं मानी। लगातार दर्द सहते हुए उन्होंने दवाइयों और फिजियोथेरेपी के सहारे खुद को संभाला और इस दौरान 3 फिल्मों और एक वेब सीरीज की शूटिंग भी पूरी की। उनका यह जज्बा हर किसी के लिए प्रेरणा है।
बेटे आयुष्मान ने भावुक होकर बयां किया दर्द
अर्चना पूरन सिंह अपने परिवार के साथ नियमित रूप से व्लॉग बनाती हैं। इन्हीं व्लॉग्स में उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने मां की बीमारी को लेकर दिल छू लेने वाली बात कही। उन्होंने भावुक होकर कहा, मुझे अपनी मॉम पर बहुत गर्व है। यह साल उनके लिए बेहद मुश्किल रहा। हाथ टूटना और फिर CRPS जैसी बीमारी होना… उनका हाथ अब कभी पहले जैसा नहीं होगा। यह कहते समय आयुष्मान की आंखों में आंसू साफ नजर आए और उनकी आवाज कांप गई।

बेटे को देख रो पड़ीं अर्चना
बेटे की आंखों में आंसू देखकर अर्चना खुद को रोक नहीं पाईं और भावुक होकर रो पड़ीं। इस वीडियो में पूरा परिवार इमोशनल नजर आया। फिलहाल अर्चना अपने परिवार के साथ लंदन में छुट्टियां मना रही हैं, जहां परिवार का प्यार और साथ उनके दर्द को थोड़ा हल्का करता दिखा। अर्चना पूरन सिंह की यह कहानी न सिर्फ उनके संघर्ष को दिखाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि दर्द कितना भी गहरा क्यों न हो, हौसला उससे बड़ा होना चाहिए।