नारी डेस्क : हिंदू पंचांग के अनुसार कुछ ही दिनों में खरमास (मलमास) शुरू होने वाला है। इस साल खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है और इस अवधि में शुभ कार्यों को टालने की परंपरा है।
15 मार्च से शुरू होगा खरमास
हिंदू पंचांग के अनुसार 14 मार्च की अर्द्धरात्रि में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ खरमास की शुरुआत मानी जाएगी। सूर्य देव 13 अप्रैल तक मीन राशि में ही रहेंगे। इस अवधि के समाप्त होते ही 13 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ खरमास खत्म हो जाएगा। यानी इस साल खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा।

साल में दो बार लगता है खरमास
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार खरमास वर्ष में दो बार आता है। पहला तब लगता है जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जो आमतौर पर मार्च से अप्रैल के बीच होता है। दूसरा खरमास तब लगता है जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जो दिसंबर से जनवरी के बीच पड़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दोनों अवधियों को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता, इसलिए इस समय विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है।
क्यों बंद हो जाते हैं शुभ कार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य जब बृहस्पति की राशियों (धनु और मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उनकी स्थिति कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को मलमास कहा जाता है और इस दौरान किए गए शुभ कार्यों को अपेक्षित फल नहीं मिलता। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को इस समय टालने की परंपरा है।

खरमास में ये काम नहीं किए जाते
खरमास के दौरान कई मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। इस समय शादी-विवाह और सगाई, गृह प्रवेश, मकान निर्माण या संपत्ति की खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना, मुंडन और कर्णवेध संस्कार, यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार और वधू प्रवेश जैसी गतिविधियाँ नहीं की जातीं। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में किए गए ऐसे कार्यों में बाधाएँ आ सकती हैं और अपेक्षित शुभ फल नहीं मिलता।
खरमास में क्या करना होता है शुभ
हालांकि इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन खरमास का समय धार्मिक साधना और दान-पुण्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस महीने में सूर्य देव को जल अर्पित करना, पूजा-पाठ और मंत्र जप करना, गरीबों को दान देना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और ध्यान-साधना करना लाभकारी माना जाता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो, उनके लिए इस अवधि में सूर्य उपासना करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।