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Malmas 2026 में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से करें परहेज?

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 19 May, 2026 09:00 AM
Malmas 2026 में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से करें परहेज?

नारी डेस्क:  Malmas यानी अधिक मास की शुरुआत 17 मई 2026 से हो चुकी है और यह 15 जून 2026 तक रहेगा। हिंदू धर्म में इस महीने को बेहद पवित्र माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान Vishnu ने इस महीने को अपना नाम दिया था। यह महीना पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आत्मशुद्धि के लिए खास माना जाता है। वहीं दूसरी ओर इस दौरान कई शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय खानपान और दिनचर्या में भी संयम रखना जरूरी माना जाता है।

आखिर क्या होता है मलमास?

हिंदू पंचांग के अनुसार, मलमास या अधिक मास हर 32 से 33 महीने में एक बार आता है। दरअसल, चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। दोनों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर लगभग तीन साल में एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है, जिसे संतुलित करने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है। इसी वजह से इस साल 12 की जगह 13 महीने माने जाएंगे और दो ज्येष्ठ मास पड़ रहे हैं। इसलिए इसे अधिक ज्येष्ठ मास भी कहा जा रहा है।

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क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दौरान विधि-विधान से भगवान विष्णु, तुलसी माता और श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परेशानियां दूर होती हैं। इस महीने में सांसारिक कार्यों की बजाय आध्यात्मिक साधना, ध्यान, जप और भक्ति पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। कई लोग इस दौरान विष्णु सहस्रनाम, भगवद गीता और राम नाम का पाठ भी करते हैं।

मलमास में क्या नहीं खाना चाहिए?

मलमास के दौरान सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय तामसिक और भारी भोजन से दूरी बनाए रखना बेहतर माना जाता है। इस दौरान खासतौर पर बैंगन, पालक और भिंडी जैसी सब्जियों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा ज्यादा मसालेदार भोजन, लहसुन-प्याज वाला तामसिक खाना, शराब और मांसाहार से भी दूर रहने की मान्यता है। कहा जाता है कि इस महीने सादा और शुद्ध भोजन करने से मन और शरीर दोनों शांत रहते हैं और आध्यात्मिक साधना में एकाग्रता बढ़ती है।

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मलमास में क्या खाना शुभ माना जाता है?

इस पवित्र महीने में हल्का, सात्विक और पचने में आसान भोजन करना अच्छा माना जाता है। आप अपने आहार में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं

मौसमी फल

दूध और दही

लौकी

मूंग दाल

चना

जौ और गेहूं

तिल और मूंगफली

सेंधा नमक

जीरा और धनिया

इन चीजों का सेवन शरीर को हल्का रखने के साथ मानसिक शांति भी देता है।

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मलमास में कौन-कौन से काम नहीं किए जाते?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मलमास में कई शुभ और मांगलिक कार्यों को टालना चाहिए। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता।

इन कार्यों से परहेज किया जाता है

शादी-विवाह

सगाई

गृह प्रवेश

मुंडन और जनेऊ संस्कार

नई दुकान या व्यापार शुरू करना

बड़ी खरीदारी करना

मान्यता है कि इन कार्यों के लिए मलमास समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त का इंतजार करना चाहिए।

इस दौरान क्या करना माना जाता है शुभ?

मलमास को भक्ति, साधना और पुण्य कमाने का बेहद पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए पूजा-पाठ और अच्छे कर्मों का विशेष फल मिलता है। इसलिए इस महीने भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा, भगवद गीता का पाठ, विष्णु सहस्रनाम और राम नाम का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही दान-पुण्य करना, गरीबों को भोजन कराना, गौ सेवा करना और संयम व ब्रह्मचर्य का पालन भी बेहद फलदायी माना गया है। यही वजह है कि मलमास को आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि के लिए खास समय माना जाता है।

मलमास को केवल धार्मिक नियमों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह आत्मचिंतन और मन को शांत करने का भी समय होता है। इसलिए इस दौरान लोग भक्ति, ध्यान और सकारात्मक सोच के जरिए खुद को भीतर से मजबूत बनाने की कोशिश करते हैं।
  
 

 

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