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Periods में कैसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा? किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 16 May, 2026 11:16 AM
Periods में कैसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा? किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

नारी डेस्क: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से वट वृक्ष और देवी सावित्री की पूजा करती हैं। इस साल वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। लेकिन कई महिलाओं के मन में एक सवाल जरूर आता है कि अगर व्रत वाले दिन पीरियड्स आ जाएं तो क्या व्रत रखा जा सकता है? पूजा कैसे होगी? क्या वट वृक्ष की पूजा करना सही माना जाता है? ऐसे ही सवालों को लेकर अक्सर महिलाएं उलझन में रहती हैं। धार्मिक मान्यताओं और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, पीरियड्स के दौरान भी वट सावित्री व्रत किया जा सकता है, बस कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना होता है।

क्या पीरियड्स में रखा जा सकता है वट सावित्री व्रत?

धार्मिक जानकारों के अनुसार अगर किसी महिला को वट सावित्री व्रत के दिन पीरियड्स आ जाएं, तो उन्हें व्रत छोड़ने की जरूरत नहीं होती। महिलाएं पहले की तरह सुबह उठकर स्नान करें, मन में व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन उपवास रख सकती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया व्रत भगवान तक जरूर पहुंचता है। इसलिए पीरियड्स आने पर घबराने की जरूरत नहीं है। बस पूजा की विधि में कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

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पूजा के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

अगर पीरियड्स के दौरान वट सावित्री व्रत किया जा रहा है, तो कोशिश करें कि पूजा सामग्री और भगवान की मूर्ति को सीधे हाथ न लगाएं। इसके लिए परिवार की किसी दूसरी सुहागिन महिला की मदद ली जा सकती है। पूजा की थाली, फल, फूल और बाकी सामग्री किसी अन्य सदस्य से तैयार करवाई जा सकती है। कई महिलाएं अपनी जगह दूसरी सुहागिन महिला से वट वृक्ष की पूजा भी करवाती हैं। इस दौरान व्रत रखने वाली महिला दूर बैठकर मन ही मन पूजा और मंत्र जाप कर सकती है।

वट वृक्ष की पूजा कैसे करें?

मान्यता के अनुसार वट वृक्ष की पूजा इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। अगर महिला पीरियड्स में है, तो वह स्वयं वृक्ष को स्पर्श किए बिना भी पूजा कर सकती है। दूसरी सुहागिन महिला आपके नाम से वट वृक्ष पर जल अर्पित कर सकती है, कच्चा सूत बांध सकती है और परिक्रमा भी कर सकती है। वहीं व्रत रखने वाली महिला थोड़ी दूरी पर बैठकर भगवान का ध्यान कर सकती है और मानसिक रूप से पूजा में शामिल हो सकती है। धार्मिक मान्यताओं में मानसिक पूजा को भी उतना ही फलदायी माना गया है जितना विधि-विधान से की गई पूजा को।

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क्या पीरियड्स में व्रत कथा सुन सकते हैं?

जी हां, पीरियड्स के दौरान वट सावित्री व्रत कथा सुनना पूरी तरह सही माना जाता है। जब दूसरी महिलाएं कथा का पाठ करें, तब आप थोड़ी दूरी पर बैठकर श्रद्धा के साथ कथा सुन सकती हैं। इस दौरान मन में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और देवी सावित्री का ध्यान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मन से किया गया स्मरण और मंत्र जाप भी पूजा का ही हिस्सा होता है।

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मानसिक जाप का क्या है महत्व?

शास्त्रों में मानसिक जाप और ध्यान को बेहद प्रभावशाली बताया गया है। अगर किसी कारणवश महिला पूजा की सभी विधियां खुद नहीं कर पा रही है, तो वह मन ही मन भगवान के मंत्रों का जाप कर सकती है। कहा जाता है कि श्रद्धा और विश्वास से किया गया मानसिक जाप भी सकारात्मक फल देता है। इसलिए पीरियड्स के दौरान महिलाएं बिना किसी चिंता के भगवान का ध्यान कर सकती हैं।

कब खुद कर सकती हैं पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर पीरियड्स का चौथा या पांचवां दिन हो और तीन दिन पूरे हो चुके हों, तो महिलाएं स्नान और बाल धोने के बाद पूजा सामग्री को हाथ लगा सकती हैं। ऐसी स्थिति में महिलाएं स्वयं भी वट वृक्ष की पूजा कर सकती हैं। हालांकि अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम थोड़े अलग हो सकते हैं।

वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व

वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके देवी सावित्री और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। मान्यता है कि देवी सावित्री ने अपने तप और समर्पण से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाए थे। इसी वजह से यह व्रत पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम और सकारात्मकता बनाए रखने में मदद करता है।  

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