नारी डेस्क: शनि देव का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर, अनुशासन और कर्मों का हिसाब एक साथ उभरने लगता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को केवल दंड देने वाला ग्रह नहीं माना गया, बल्कि उन्हें न्याय का देवता कहा गया है। मान्यता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यही वजह है कि शनि जयंती का दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शनि देव की पूजा कर जीवन की परेशानियों, ग्रह दोष और रुकावटों से राहत पाने की कामना करते हैं। साल 2026 की शनि जयंती कई मायनों में विशेष मानी जा रही है, क्योंकि इस बार यह पर्व शनिवार के दिन पड़ रहा है, जो स्वयं शनि देव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस शुभ संयोग में की गई पूजा और दान का प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
कब मनाई जाएगी शनि जयंती 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 17 मई की रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शनि देव की विधि-विधान से पूजा करने और दान-पुण्य करने से शनि दोष शांत होता है तथा जीवन में चल रही बाधाओं से राहत मिलती है।

क्यों डरते हैं लोग शनि देव से?
अक्सर लोग शनि का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं। माना जाता है कि शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या जीवन में कठिन परिस्थितियां लेकर आती है। हालांकि ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि शनि किसी के साथ अन्याय नहीं करते। वे केवल इंसान को उसके कर्मों का फल देते हैं। अगर कोई व्यक्ति मेहनती, ईमानदार और अनुशासित है, तो शनि उसे सफलता भी दिलाते हैं। वहीं गलत कार्य करने वालों को संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए शनि देव को कर्म और न्याय का देवता कहा जाता है।
शनि पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है सरसों का तेल?
शनि पूजा में सरसों तेल का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सरसों का तेल शनि की उग्र ऊर्जा को शांत करने का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि भक्त शनि मंदिरों में तेल अर्पित करते हैं या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाते हैं। ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग शनिवार के दिन लोहे के कटोरे में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखते हैं और फिर उसका दान करते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर का प्रभाव कम होता है। ज्योतिष शास्त्र में यह भी कहा गया है कि सरसों तेल का दान करने से जीवन में आ रही आर्थिक और मानसिक परेशानियों में राहत मिल सकती है।
काले तिल क्यों माने जाते हैं शनि देव को प्रिय?
शनि पूजा में काले तिल का प्रयोग बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि काले तिल पुराने कर्मों से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद करते हैं। इसी कारण शनि जयंती पर लोग काले तिल का दान करते हैं, तिल मिले जल से स्नान करते हैं और पूजा में तिल अर्पित करते हैं। कई घरों में इस दिन तिल के लड्डू या तिल से बनी मिठाइयां गरीबों और जरूरतमंदों में बांटी जाती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि कमजोर हो या राहु-केतु का अशुभ प्रभाव हो, तो काले तिल का दान लाभकारी माना जाता है।

दीपक जलाने का क्या है आध्यात्मिक महत्व?
शनि जयंती पर दीपक जलाने की परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी मानी जाती है। विशेष रूप से पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है। मान्यता है कि दीपक की लौ व्यक्ति के जीवन में फैले डर, भ्रम और मानसिक तनाव को दूर करने का प्रतीक होती है। कई श्रद्धालु इस दिन शनि मंदिर में जाकर दीपदान करते हैं और शनि स्तोत्र का पाठ करते हैं। ज्योतिष में शनि को धीमी गति से चलने वाला ग्रह कहा गया है। इसलिए माना जाता है कि उनकी कृपा भी धीरे-धीरे मिलती है, लेकिन उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।
शनि जयंती पर क्या करें?
शनि जयंती के दिन कुछ विशेष उपाय करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंद लोगों को काला कपड़ा, उड़द दाल, काले तिल और सरसों तेल का दान करना लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा शनि देव की कृपा पाने के लिए हनुमान चालीसा, शनि स्तोत्र और सुंदरकांड का पाठ भी किया जाता है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं।
शनि जयंती पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
शनि जयंती के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने, गरीबों को परेशान करने और बिना वजह क्रोध करने से बचना चाहिए। इसके अलावा शराब, मांसाहार और तामसिक चीजों से दूरी बनाने की भी सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इस दिन गलत व्यवहार करने से शनि देव नाराज हो सकते हैं।
इन 3 आसान उपायों से मिल सकती है राहत
1. सरसों तेल का दीपक जलाएं: शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे मानसिक तनाव कम होने और शनि दोष शांत होने की मान्यता है।
2. काले तिल का दान करें: जरूरतमंद लोगों को काले तिल, उड़द दाल या तिल से बनी चीजों का दान करने से सकारात्मक फल मिलने की बात कही जाती है।
3. हनुमान चालीसा का पाठ करें: मान्यता है कि हनुमान जी की उपासना करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। इसलिए शनि जयंती पर हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
