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किसान-मजदूर की बेटी ने बढ़ाया देश का मान, Asian चैंपियनशिप में काजल वाजा ने जीता Silver Medal

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 01 Jun, 2026 11:14 AM
किसान-मजदूर की बेटी ने बढ़ाया देश का मान, Asian चैंपियनशिप में काजल वाजा ने जीता Silver Medal

नारी डेस्क: हौसले बुलंद हों तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, सफलता का रास्ता जरूर बन जाता है। गुजरात के जूनागढ़ जिले के छोटे से गांव चोरवाड की रहने वाली काजल वाजा ने इसी बात को सच साबित कर दिखाया है। साधारण किसान परिवार से आने वाली इस युवा धाविका ने एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

4X100 मीटर रिले में भारत को दिलाया सिल्वर

हांगकांग में आयोजित 22वीं एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में काजल वाजा भारतीय महिला 4X100 मीटर रिले टीम का हिस्सा थीं। उनके साथ तमिलनाडु की भावना, हरियाणा की आरती और उत्तर प्रदेश की निपम ने भी टीम का प्रतिनिधित्व किया। चारों खिलाड़ियों ने मिलकर 45.04 सेकंड का शानदार समय निकाला और भारत को रजत पदक दिलाया। खास बात यह रही कि इस प्रदर्शन के साथ भारतीय टीम ने अंडर-20 वर्ग में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 45.08 सेकंड का था।

आर्थिक चुनौतियों के बावजूद नहीं छोड़ा सपना

काजल की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता हीराभाई वाजा खेती और मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक परेशानियों के बावजूद काजल ने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। परिवार की कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खेल को अपनी प्राथमिकता बनाया और लगातार मेहनत करती रहीं। आज उनकी यही मेहनत अंतरराष्ट्रीय मंच पर रंग लाई है।

खेल के लिए पढ़ाई से भी लिया ब्रेक

अपने खेल करियर को नई ऊंचाई देने के लिए काजल ने बड़ा फैसला भी लिया था। बेहतर ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए उन्होंने 12वीं की पढ़ाई के दौरान एक साल का ड्रॉप लिया। उनके परिवार और करीबी लोगों का कहना है कि बचपन से ही काजल को दौड़ और खेलकूद में विशेष रुचि थी। स्कूल के दिनों से ही वह विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर शानदार प्रदर्शन करती आ रही थीं।

कोच ने बताया भारत की सबसे होनहार स्प्रिंटर

काजल के कोच शिवम उपाध्याय उनकी सफलता का श्रेय उनकी अनुशासनप्रियता और मेहनत को देते हैं। उनका कहना है कि काजल देश की सबसे प्रतिभाशाली युवा स्प्रिंटर्स में से एक हैं। कोच के अनुसार, काजल हर ट्रेनिंग सेशन को पूरी गंभीरता के साथ लेती हैं और लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं। यही गुण उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाते हैं।

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पहले भी जीत चुकी हैं कई बड़े मेडल

एशियन चैंपियनशिप का यह सिल्वर मेडल काजल के करियर की पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी वह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में देश और राज्य का नाम रोशन कर चुकी हैं। साल 2025 में रांची में आयोजित साउथ एशियन सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 4X100 मीटर रिले में सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा अंडर-20 वर्ग में 60 मीटर स्पर्धा का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है।

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भुवनेश्वर में भी बनाया था राष्ट्रीय रिकॉर्ड

मार्च 2026 में भुवनेश्वर में आयोजित प्रथम इंडोर ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में काजल ने 60 मीटर दौड़ को केवल 7.50 सेकंड में पूरा कर गोल्ड मेडल जीता था। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी कायम किया और देश की सबसे तेज युवा धाविकाओं में अपनी पहचान मजबूत की।काजल की खेल यात्रा स्कूल स्तर से शुरू हुई थी। उन्होंने गुजरात की स्पोर्ट्स अथॉरिटी द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखारना शुरू किया। इसके बाद वर्ष 2019 में वह कोडीनार स्थित जिला स्तरीय स्पोर्ट्स स्कूल से जुड़ीं। यहां उनकी प्रतिभा को सही दिशा मिली। लगातार बेहतर प्रदर्शन के कारण वर्ष 2023 में उनका चयन नडियाद स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में हुआ, जहां उन्हें आधुनिक सुविधाओं और पेशेवर प्रशिक्षण का लाभ मिल रहा है।

गुजरात सरकार ने भी की सराहना

काजल की इस उपलब्धि पर गुजरात सरकार ने भी खुशी जताई है। राज्य के खेल मंत्री और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि काजल ने गुजरात और पूरे भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और काजल की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

लाखों युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

चोरवाड के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का झंडा बुलंद करने वाली काजल वाजा आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

 

  

 

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