नारी डेस्क : रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण एक बार फिर माता-पिता बन गए हैं। उनकी पहली बेटी दुआ के जन्म के करीब दो साल बाद उनके घर दूसरे बच्चे की किलकारी गूंजी है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक प्यारी-सी पोस्ट शेयर कर यह खुशखबरी फैंस के साथ साझा की। इसके बाद से ही लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर दो बच्चों के बीच कितना अंतर होना बेहतर माना जाता है? दरअसल, दूसरी प्रेग्नेंसी प्लान करते समय सिर्फ पहले बच्चे की उम्र ही नहीं, बल्कि मां की सेहत, पिछली डिलीवरी, शरीर की रिकवरी और मानसिक तैयारी जैसी कई चीजें मायने रखती हैं। ऐसे में हर महिला के लिए बच्चों के बीच एक जैसा गैप सही नहीं हो सकता। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की नजर से बच्चों के बीच अंतर को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
रणवीर-दीपिका के घर फिर गूंजी किलकारी
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दूसरी बार माता-पिता बन चुके हैं। इस बार भी उनके घर बेटी ने जन्म लिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक कोलैबोरेशन पोस्ट के जरिए यह खुशखबरी शेयर की। पोस्ट में उनकी नन्हीं बेटी के पैरों की छाप वाली तस्वीर नजर आई, जिस पर जन्म की तारीख भी लिखी थी। इससे ठीक एक दिन पहले रणवीर और दीपिका मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे थे, जहां दोनों ने बप्पा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया था। मंदिर से सामने आई उनकी तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे।अब दूसरी बेटी के जन्म के साथ ही लोगों की दिलचस्पी इस बात में भी बढ़ गई है कि दो बच्चों के बीच कितना अंतर मां और बच्चे दोनों के लिए बेहतर माना जाता है।
दो बच्चों के बीच कितना गैप होना चाहिए?
गायनेकोलॉजिस्ट और रिप्रोडक्टिव मेडिसिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगली प्रेग्नेंसी से पहले मां के शरीर को रिकवरी का पर्याप्त समय देना जरूरी है। आमतौर पर कई गाइडलाइंस में दो गर्भधारण के बीच करीब 18 से 24 महीने या उससे अधिक का अंतर रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसे हर महिला के लिए एक तय नियम नहीं माना जा सकता। कुछ मामलों में डॉक्टर महिला की उम्र, पिछली प्रेग्नेंसी, डिलीवरी के तरीके और स्वास्थ्य को देखते हुए अलग सलाह दे सकते हैं।
बहुत कम गैप होने पर क्या परेशानी हो सकती है?
अगर पहली डिलीवरी के तुरंत बाद दोबारा प्रेग्नेंसी हो जाए, तो मां के शरीर को पूरी तरह संभलने का समय कम मिल सकता है। प्रेग्नेंसी और स्तनपान के दौरान शरीर में आयरन, फोलेट और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में अगली प्रेग्नेंसी जल्दी होने पर पोषण की कमी का खतरा बढ़ सकता है, खासकर अगर पिछली कमी पूरी तरह दूर न हुई हो। कुछ मामलों में बहुत कम अंतराल को समय से पहले डिलीवरी और कम वजन वाले बच्चे के जोखिम से भी जोड़ा गया है। हालांकि, यह जोखिम हर महिला में एक जैसा नहीं होता और कई दूसरे कारण भी इसमें भूमिका निभाते हैं। लगातार दो प्रेग्नेंसी के कारण शारीरिक थकान भी ज्यादा महसूस हो सकती है। पीठ और पैरों में दर्द, कमजोरी या रोजमर्रा के कामों में थकान जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
क्या बहुत ज्यादा गैप भी परेशानी वाला है
बच्चों के बीच लंबा अंतराल होना अपने आप में कोई बीमारी या समस्या नहीं है। 5 साल या उससे ज्यादा का गैप होने पर मां को पहले बच्चे की देखभाल और खुद को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है। हालांकि, लंबे अंतराल के बाद दोबारा प्रेग्नेंसी में महिला की उम्र, फर्टिलिटी और स्वास्थ्य जैसी चीजें ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए लंबे गैप को सिर्फ फायदे या नुकसान के नजरिए से देखना सही नहीं होगा।
C-Section हुआ है तो रखें खास ध्यान
अगर पहली डिलीवरी सिजेरियन यानी C-section से हुई है, तो अगली प्रेग्नेंसी की प्लानिंग से पहले डॉक्टर से सलाह लेना खास तौर पर जरूरी है। गर्भाशय को ठीक होने में समय लगता है और अगली प्रेग्नेंसी का सही समय महिला की मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करता है। कई मामलों में डॉक्टर पर्याप्त अंतर रखने की सलाह देते हैं, लेकिन यह समय हर महिला के लिए अलग हो सकता है। इसलिए सिर्फ किसी और की प्रेग्नेंसी देखकर अपना गैप तय नहीं करना चाहिए।
35 की उम्र के बाद दूसरी प्रेग्नेंसी प्लान कर रहे हैं तो...
उम्र बढ़ने के साथ फर्टिलिटी में बदलाव आ सकते हैं। ऐसे में 35 साल या उससे अधिक उम्र में दूसरा बच्चा प्लान करने वाली महिलाओं को अपनी सेहत और फर्टिलिटी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से पहले ही सलाह लेनी चाहिए। इस दौरान जरूरी जांच, पिछली प्रेग्नेंसी का मेडिकल रिकॉर्ड और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति देखकर डॉक्टर सही समय को लेकर बेहतर सलाह दे सकते हैं।
सिर्फ गैप नहीं, मां की मानसिक तैयारी भी जरूरी
दूसरे बच्चे की प्लानिंग सिर्फ शरीर से जुड़ा फैसला नहीं है। पहले बच्चे की देखभाल के साथ दूसरी प्रेग्नेंसी संभालना मानसिक और भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए यह देखना भी जरूरी है कि मां खुद को दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए तैयार महसूस कर रही हैं या नहीं। घर में पार्टनर और परिवार का सपोर्ट भी इस दौरान काफी मायने रखता है।
हर महिला के लिए 'आइडियल गैप' अलग हो सकता है
रणवीर और दीपिका की तरह अगर आप भी दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं, तो सिर्फ बच्चों की उम्र के अंतर को देखकर फैसला न लें। पिछली डिलीवरी का तरीका, मां की उम्र, शरीर की रिकवरी, पोषण, किसी बीमारी की स्थिति और मानसिक तैयारी इन सभी चीजों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए दूसरे बच्चे की प्लानिंग से पहले अपने Gynecologist से बात करें। डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा सेहत के आधार पर आपके लिए सही समय और जरूरी सावधानियों के बारे में सलाह दे सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है।