नारी डेस्क: भारत में बहुत से ऐसे पेड़ हैं जिन्हें बेहद पवित्र माना जाता है क्योंकि वे पौराणिक कथाओं, धर्म और लोककथाओं से जुड़े हुए हैं। इनमें से कुछ पेड़ किसी खास देवी-देवता के प्रतीक होते हैं। 'कदंब' भी ऐसा ही एक पेड़ है जो भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ है। इसके फूलों को मंदिरों में चढ़ाया जाता है और आदिवासी त्योहारों में इनका इस्तेमाल होता है। यदि आपने बीमारियों से बचना है तो अपने घर में इसे जरुर लगाएं।

इन जगहों में पाया जाता है ये पेड़
इसी पेड़ के नाम पर 'कदंब राजवंश' का नाम पड़ा, जिसकी राजधानी बनावासी थी, यह कर्नाटक का पहला शासक राजवंश था। इस राजवंश के लोग इस पेड़ को पवित्र मानते थे। एक और दिलचस्प बात यह है कि 'कदंब' का फूल, भारत की एक पुरानी रियासत अथमल्लिक राज्य—का प्रतीक (emblem) था। यह रियासत अब ओडिशा का हिस्सा है। यह पेड़ न केवल एक सुंदर सजावटी पेड़ है, जिसके फूल सुनहरी गेंदों जैसे और खुशबूदार होते हैं, बल्कि इसमें औषधीय गुण भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसकी महत्ता को दर्शाने के लिए डाक विभाग ने एक डाक टिकट भी जारी किया है। यह पेड़ मूल रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया का निवासी है, और भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार तथा श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर पाया जाता है।
भागवत पुराण में भी है इस पेड़ का जिक्र
कदम का ज़िक्र भारतीय पौराणिक कथाओं में मिलता है और इसका उल्लेख भागवत पुराण में भी है। उत्तरी भारत में, इसे भगवान कृष्ण से जोड़ा जाता है, जबकि दक्षिण में देवी पार्वती से। ऐसा माना जाता है कि श्री कृष्ण ने वृंदावन में कदम के पेड़ों की छांव में अपनी कई दिव्य लीलाएं (चमत्कार) की थीं। वे वृंदावन में इन पेड़ों के आस-पास अपने दोस्तों के साथ खेलते थे, और पेड़ के अनोखे गोल फूलों को अपने हाथों में थामे रहते थे। इसलिए इस पेड़ को 'हरिप्रिया' (भगवान का प्रिय) भी कहा जाता है। उन्हें अक्सर इस पेड़ की छाव में बांसुरी बजाते हुए दिखाया जाता है। माना जाता है कि राधा और कृष्ण ने 'कदंबवन' में ही अपनी प्रेम-लीलाएं की थीं। भगवान कृष्ण की सबसे नटखट शरारतों में से एक, जिसमें उन्होंने गोपियों के कपड़े चुराकर इसी पेड़ की एक डाल पर छिपा दिए थे।

कदंब पेड़ के औषधीय गुण
कदंब का पेड़ आयुर्वेदिक चिकित्सा में बहुत महत्वपूर्ण है, जो सूजन-रोधी, एंटी-बैक्टीरियल, और एंटी-डायबिटिक गुणों से भरपूर है। इसकी छाल, पत्तियां, और फल त्वचा रोगों, घावों, मुंह के छालों, दस्त, मधुमेह, और जोड़ों के दर्द में अत्यंत लाभकारी हैं। कदंब की पत्तियों के रस से त्वचा की खुजली और विकृति में राहत मिलती है। इसकी छाल का लेप घाव, सूजन और मुंहासों को ठीक करने में मदद करता है। : मुंह के छालों के लिए कदंब की पत्तियों को चबाना या उनके रस से गरारे करना बहुत फायदेमंद है। इसके फल और छाल का काढ़ा दस्त, पेचिश और पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है। कदंब के पत्तों और छाल में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हैं।इसके पत्तों और छाल को उबालकर उस पानी से सिकाई करने से जोड़ों के दर्द, गठिया और मांसपेशियों की अकड़न में राहत मिलती है।