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फेफड़ों में बनने लगते हैं खून के थक्के... क्या है यह बीमारी जिससे गई प्रतीक यादव की मौत

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 May, 2026 01:24 PM
फेफड़ों में बनने लगते हैं खून के थक्के... क्या है यह बीमारी जिससे गई प्रतीक यादव की मौत

 नारी डेस्क: समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के परिवार से जुड़ी दुखद खबर में Prateek Yadav के निधन ने सभी को झकझोर दिया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी मौत का कारण कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स बताया गया है, जिसमें अचानक सांस और दिल की धड़कन दोनों रुक जाते हैं। ऐसे में लोगो के मन यह सवाल आता हैं की यह बीमारी आखिर हैं क्या जिससे प्रतीक यादव जान चली गई । चालिए बताते हैं इसके क्या लक्ष्ण हैं और इस से कैसे बचा जाए। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि फेफड़ों तक ब्लड और ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाने की वजह से यह स्थिति बनी। फेफड़ों में खून का थक्का जम गया था, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया और आखिरकार ब्लड फ्लो पूरी तरह से बंद हो गया। इस वजह से शरीर को ऑक्सीजन मिलनी बंद हो गई और सांसें थम गईं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति बेहद अचानक और जानलेवा होती है।

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कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स क्या होता है?

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स एक गंभीर स्थिति है जिसमें दिल की धड़कन और सांस लेने की प्रक्रिया अचानक बंद हो जाती है। इस स्थिति में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर दिमाग, तक ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है। अगर मरीज को तुरंत मेडिकल सहायता न मिले, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

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पल्मोनरी एम्बोलिज्म से भी जुड़ा मामला

रिपोर्ट्स में पल्मोनरी एम्बोलिज्म का भी जिक्र किया गया है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें खून का थक्का नसों से टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां ब्लॉक बना देता है। इससे फेफड़ों का कामकाज प्रभावित होता है और शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। यह स्थिति भी बेहद गंभीर और कई बार अचानक मौत का कारण बन सकती है।

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क्यों होती है ऐसी खतरनाक स्थिति?

डॉक्टरों के अनुसार, ब्लड क्लॉट बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना, कुछ मेडिकल कंडीशंस, या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याएं। जब यह क्लॉट फेफड़ों तक पहुंचता है, तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।

समय पर इलाज है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद मिलना बेहद जरूरी होता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। सही समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है, लेकिन देरी होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि शरीर में अचानक होने वाले बदलावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

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