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चेहरे की सुंदरता बिगाड़ देती है ये बीमारी, इसे  रैशेज समझने की बिल्कुल ना करें गलती

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 13 May, 2026 02:49 PM
चेहरे की सुंदरता बिगाड़ देती है ये बीमारी, इसे  रैशेज समझने की बिल्कुल ना करें गलती

नारी डेस्क: हर गर्मी अपनी स्किन प्रॉब्लम लेकर आती है धूप में निकलने के बाद स्किन का लाल होना, पसीने से छोटे-छोटे खुजली वाले दाने, या प्रदूषण और नमी से जलन ये सब आम हैं। ज़्यादातर लोग क्रीम लगाते हैं ज्यादा पानी पीते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन कभी-कभी स्किन कुछ ज्यादा सीरियस बात कहने की कोशिश कर रही होती है। कुछ मामलों मे  चेहरे पर लंबे समय तक लाल रैशेज़ सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (SLE) नाम के ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का संकेत हो सकते हैं, अगर इसका समय पर पता न चले तो यह शरीर के कई अंगों में दिख सकता है।

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ल्यूपस है रैशेज का सबसे बड़ा कारण

डॉक्टर कहते हैं कि- "स्किन पर रैशेज बहुत आम हैं, खासकर गर्मियों में और ये हीट रैशेज़, एलर्जी, या धूप के रिएक्शन जैसी कई कंडीशन की वजह से हो सकते हैं।"  ल्यूपस कोई दुर्लभ बीमारी नहीं है, लेकिन इसे अक्सर गलत समझा जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थराइटिस एंड मस्कुलोस्केलेटल एंड स्किन डिजीज (NIAMS) के अनुसार, ल्यूपस तब होता है जब इम्यून सिस्टम गलती से शरीर के अपने ही टिशूज़ पर हमला कर देता है, जिससे सूजन और नुकसान होता है। ल्यूपस के सबसे पहचाने जाने वाले लक्षणों में से एक "बटरफ्लाई रैश" कहलाता है। यह दोनों गालों और नाक के ऊपरी हिस्से पर फैल जाता है, और अक्सर धूप में निकलने के बाद ज़्यादा साफ़ दिखाई देने लगता है।


सूरज की रोशनी बढ़ा देती है तकलीफ

ल्यूपस के सबसे पहचाने जाने वाले स्किन लक्षणों में से एक है 'बटरफ्लाई रैश'। यह रैश आमतौर पर दोनों गालों और नाक के ऊपरी हिस्से पर पाया जाता है। यह रैश आमतौर पर लाल, दर्दनाक और सूरज की रोशनी के प्रति बहुत संवेदनशील होता है ('सनबर्न' जैसा)। कुछ लोगों  के सूरज की रोशनी के संपर्क में आने पर यह रैश हल्का, ज़्यादा लाल और ज़्यादा परेशान करने वाला हो जाता है। यहीं से कन्फ्यूजन शुरू होता है। गर्मियों में होने वाला रैश भी गर्मी और सूरज की रोशनी में बिगड़ जाता है। रोसेसिया भी कुछ ऐसा ही दिख सकता है। यहां तक कि तनाव भी चेहरे पर लालिमा पैदा कर सकता है। इसीलिए ल्यूपस अक्सर अपने शुरुआती दौर में पकड़ में नहीं आता। फर्क है इसके बने रहने में। अगर कोई रैश बार-बार होता है, एक खास पैटर्न में फैलता है, या बिना किसी वजह के थकान और शरीर में दर्द के साथ दिखाई देता है, तो उस पर ध्यान देना ज़रूरी है।

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ल्यूपस के मरीजों में दिखते हैं ये लक्षण 

US Centers for Disease Control and Prevention (CDC) का कहना है कि चेहरे पर तितली के आकार का रैश, बुखार, जोड़ों में दर्द, थकान और बालों का झड़ना, ल्यूपस के मरीज़ों में देखे जाने वाले आम लक्षणों में से हैं। ल्यूपस की सबसे मुश्किल बात यह है कि इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं, गायब हो जाते हैं और फिर लौट आते हैं। कई मरीज़ सालों तक अलग-अलग समस्याओं का इलाज करते रहते हैं, लेकिन उन्हें आपस में जोड़ नहीं पाते। वे बताती हैं कि मरीज़ों को जोड़ों में दर्द और उंगलियों, कलाई, कंधों या घुटनों में सूजन हो सकती है। अन्य लक्षणों में मुंह के छाले, बिना कारण बुखार, थकान, वजन कम होना, लिम्फ नोड्स का बढ़ना और ठंड के प्रति संवेदनशीलता शामिल हैं।


 ल्यूपस से होने वाला नुकसान

एनआईएच द्वारा समर्थित आंकड़ों के अनुसार, यदि ल्यूपस का इलाज न किया जाए तो यह गुर्दे, फेफड़े, हृदय, रक्त वाहिकाओं और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। ल्यूपस एक ऐसी बीमारी है जो आमतौर पर कम उम्र की महिलाओं को होती है, लेकिन यह पुरुषों में भी हो सकती है शुरुआती दौर में, इसके लक्षण किसी इन्फेक्शन या दूसरी सूजन वाली बीमारी जैसे लग सकते हैं, इसलिए ल्यूपस का पता नहीं चल पाता।" बहुत से लोग चेहरे पर होने वाले रैशेज़ का इलाज खुद ही, बिना डॉक्टर की सलाह के मिलने वाली स्टेरॉयड क्रीम से कर लेते हैं। इलाज शुरू करने से पहले किसी डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) या रूमेटोलॉजिस्ट (जोड़ों के रोगों के विशेषज्ञ) से सही जांच करवाना बहुत ज़रूरी है।" डॉक्टरों का कहना है कि ल्यूपस का पता सिर्फ़ एक लक्षण के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए खून की जांच, मरीज़ की मेडिकल हिस्ट्री, त्वचा की स्थिति और शरीर के किन अंगों पर असर हुआ है इन सभी बातों पर एक साथ गौर किया जाता है।

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