नारी डेस्क: हमारे पैर अक्सर हमारे शरीर का एक ऐसा हिस्सा होते हैं, जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं। वे ज़्यादातर हमारे जूतों के अंदर आराम से रहते हैं और शायद ही कभी कोई शिकायत करते हैं। लेकिन वे धीरे- धीरे आपको कुछ इशारे देते रहते हैं। जैसे रंग में हल्का सा बदलाव, चलने के बाद हल्का-हल्का दर्द, रात में अजीब सी सुन्नता ये सब महज़ इत्तेफ़ाक नहीं होते ये चेतावनी संकेत होते हैं जिस पर अभी ध्यान ना दिया गया तो आगे चलकर बड़ी परेशानी हो सकती है।

डायबिटीज और थायरॉइड की पहले ही चेतावनी दे देते हैं पैर
पैर शरीर में खून के बहाव के सबसे आखिर में होते हैं। वे स्वस्थ नसों, मजबूत रक्त संचार और स्थिर हॉर्मोन पर निर्भर करते हैं। इसी वजह से उन्हें जल्दी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। डॉक्टर कहते हैं- “कई मामलों में, दिल, किडनी और हॉर्मोनल सिस्टम को प्रभावित करने वाली बीमारियां जैसे कि डायबिटीज और थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं सबसे पहले पैरों में होने वाले बदलावों से ही पता चल जाती हैं।” यही वजह है कि डॉक्टर अक्सर रूटीन जांच के दौरान पैरों की भी जांच करते हैं। वे ऐसा सिर्फ़ आदत की वजह से नहीं करते, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि पैरों में बीमारी के शुरुआती संकेत दिख जाते हैं।
अच्छा ब्लड सर्कुलेशन पैरों के लिए फायदेमंद
NIH में छपी एक रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि डायबिटीज और दिल की बीमारी जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां अक्सर तब तक नजरअंदाज होती रहती हैं, जब तक कि उनसे जुड़ी जटिलताएं जिनमें पैरों से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं सामने नहीं आ जातीं। अच्छा ब्लड सर्कुलेशन पैरों को गर्म, गुलाबी और एक्टिव रखता है। धमनियों से जुड़ी समस्याओं में, शुरुआती संकेत बहुत हल्के होते हैं। दर्द सिर्फ़ चलने के बाद शुरू होता है। जब शरीर आराम करता है, तो यह दर्द चला जाता है। यह थकान नहीं है यह एक चेतावनी है। यह स्थिति अक्सर पेरिफेरल आर्टरी डिजीज से जुड़ी होती है। इस चरण को नजरअंदाज करने से अंदरूनी नुकसान बढ़ता रहता है। रक्त संचार संबंधी सभी समस्याएं एक जैसी नहीं होतीं। लंबे समय तक खड़े रहने पर पैरों में सूजन आ सकती है। टखनों में भारीपन महसूस हो सकता है। हल्के ऐंठन आ-जा सकते हैं।

नसों में खराबी के पहचानो संकेत
'इंडियन जर्नल ऑफ़ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज़्म' बताता है कि डायबिटीज़ से जुड़ी परेशानियां, खासकर न्यूरोपैथी, भारत में पैरों के अल्सर और इन्फेक्शन का एक बड़ा कारण हैं। पैरों का रंग बिना किसी वजह के नहीं बदलता, लाल धब्बे, गहरे निशान, या त्वचा का काला पड़ना, खराब ब्लड सर्कुलेशन या नसों में खराबी का संकेत हो सकता है। सूखी, फटी त्वचा देखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। छोटे घाव भी मायने रखते हैं। एक छोटा सा कट, जो ठीक न हो रहा हो, गंभीर रूप ले सकता है। कुछ सबसे खतरनाक बदलाव दिखाई नहीं देते। ज़्यादा गंभीर मामलों में, छोटी-मोटी चोटें, ऐसे घाव जो ठीक न हों, या ट्रॉपिकल अल्सर हो सकते हैं।
ऐसे समझें पैरों के इशारे को
इसके चारकोट फुट या हड्डियों में इन्फेक्शन जैसी बीमारियां चुपके से पनप सकती हैं। हो सकता है कि दर्द बिल्कुल भी महसूस न हो। जब तक सूजन या बनावट में कोई खराबी दिखाई देती है, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है। इसीलिए, बाद में इलाज करवाने के बजाय शुरुआत में ही ध्यान देना ज़्यादा ज़रूरी है। इसके पहचान के लिए दिन में एक बार पैरों को देखें। रंग, आकार और त्वचा की जांच करें। सूजन पर ध्यान दें, चलते समय ध्यान दें। एक पैर दूसरे से ठंडा होना रक्त प्रवाह में कमी का संकेत हो सकता है। रात में होने वाली संवेदनाओं पर ध्यान दें। झुनझुनी, जलन या सुन्नपन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात, कुछ दिनों से अधिक समय तक रहने वाले घाव को कभी भी अनदेखा न करें।