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दिल और फेफड़ों के साथ जोड़ों की भी दुश्मन है Smoking , यह  चलना-फिरना कर देती है मुश्किल

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 19 May, 2026 11:14 AM
दिल और फेफड़ों के साथ जोड़ों की भी दुश्मन है Smoking , यह  चलना-फिरना कर देती है मुश्किल

नारी डेस्क: सालों से,धूम्रपान को फेफड़ों की बीमारियों, दिल के दौरे और कैंसर से जोड़ा जाता रहा है। लेकिन अब एक और बीमारी चुपके से इस चर्चा में शामिल हो रही है एक ऐसी बीमारी जो हमारी चलने-फिरने की क्षमता, आज़ादी और यहां तक कि रोजंमर्रा की जिंदगी के सबसे आसान कामों पर भी असर डालती है इसका नाम है रूमेटॉइड अर्थराइटिस। इससे जोड़ों में गंभीर सूजन, तेज दर्द और अकड़न होती है। 

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धूम्रपान है RA का  सबसे बड़ा जिम्मेदार 

बहुत से लोग अब भी मानते हैं कि रूमेटॉइड अर्थराइटिस, या RA सिर्फ़ "बुढ़ापे में होने वाली जोड़ों की समस्या" है, ऐसा बिल्कुल नहीं है। RA एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला कर देता है। इसका नतीजा जोड़ों में दर्दनाक सूजन, अकड़न, थकान और लंबे समय तक जोड़ों को होने वाला नुकसान हो सकता है और बढ़ते मेडिकल सबूतों के मुताबिक, इस बीमारी को शुरू करने में धूम्रपान की भूमिका, जितना लोग सोचते हैं  उससे कहीं ज़्यादा बड़ी हो सकती है।


RA के मुख्य लक्षण


जोड़ों में दर्द, सूजन और गर्माहट, सुबह उठने पर जोड़ों में 45 मिनट से अधिक समय तक अकड़न रहना, आमतौर पर हाथों, कलाइयों और पैरों के छोटे जोड़ प्रभावित होते हैं। थकान, हल्का बुखार और भूख  और चलने- फिरने में कठनाई भी इस  खतरे की निशानी है। एक रिसर्च में दावा किया गया कि धूम्रपान सेरोपॉजिटिव RA के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर है, जिसकी पहचान RA से जुड़े एंटीबॉडीज़, जैसे कि एंटी-सिट्रुलीनेटेड प्रोटीन एंटीबॉडीज़ (ACPA) के बढ़े हुए स्तर से होती है। ऐसा माना जाता है कि सिगरेट पीने से फेफड़ों की म्यूकोसा और एयरवेज़ में होने वाली सूजन इम्यून टॉलरेंस में कमी को ट्रिगर कर सकती है, जिसके परिणामस्वरूप एंटीबॉडीज़ बनने लगते हैं और अंतत रूमेटॉइड अर्थराइटिस हो जाता है 
 

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धूम्रपान छोड़ने के बाद भी कम नहीं होता खतरा

2018 के एक केस-कंट्रोल अध्ययन में जिसमें 3655 RA मरीज़ और 5883 मैच किए गए कंट्रोल शामिल थे, में पाया गया कि  धूम्रपान करने वालों में रूमेटॉइड अर्थराइटिस का जोखिम ज्यादा था। इतना ही नहीं धूम्रपान छोड़ने के कई साल बाद तक भी इसका खतरा कम नहीं हुआ। इसके अलावा, अन्य अध्ययनों के परिणामों से यह भी संकेत मिला है कि धूम्रपान, RA के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 'डिज़ीज़-मॉडिफाइंग एंटीरूमेटिक ड्रग्स' (DMARDs) के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यह बात RA के मरीज़ों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी धूम्रपान छोड़ने के महत्व को और अधिक रेखांकित करती है, जिन्हें यह बीमारी होने का जोखिम है।1

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