नारी डेस्क: अक्सर लोग पानी को केवल प्यास बुझाने का साधन समझते हैं, जबकि वास्तव में यह शरीर के लगभग हर महत्वपूर्ण कार्य के लिए जरूरी है। खासकर दिमाग यानी ब्रेन की कार्यक्षमता काफी हद तक शरीर में मौजूद पानी की मात्रा पर निर्भर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पानी की मामूली कमी भी सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। विभिन्न शोधों से पता चलता है कि यदि शरीर में पानी की मात्रा सामान्य स्तर से केवल 1 से 2 प्रतिशत तक कम हो जाए, तो इसका असर सीधे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। मेडिकल भाषा में इसे माइल्ड डिहाइड्रेशन कहा जाता है, लेकिन इसका प्रभाव अपेक्षा से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।
डिहाइड्रेशन और ब्रेन फंक्शन के बीच क्या है संबंध
दिमाग को सुचारु रूप से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन, पोषक तत्वों और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। शरीर में मौजूद पानी इन सभी आवश्यक तत्वों को मस्तिष्क तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यूरोलॉजी से जुड़ी कई रिसर्च रिपोर्टों के अनुसार, जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो पोषक तत्वों और ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होने लगता है। इसका सीधा असर ब्रेन सेल्स की कार्यक्षमता पर पड़ता है, जिससे व्यक्ति की मानसिक क्षमता कमजोर होने लगती है।

ब्रेन के इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल्स पर पड़ता है असर
मानव मस्तिष्क अरबों तंत्रिका कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स से मिलकर बना है। ये कोशिकाएं लगातार एक-दूसरे को इलेक्ट्रिकल और केमिकल सिग्नल भेजती रहती हैं, जिनकी मदद से हम सोचते हैं, याद रखते हैं, निर्णय लेते हैं और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। पानी इन सिग्नल्स के सुचारु संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है, तो इन संदेशों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने, जानकारी याद रखने और तेजी से प्रतिक्रिया देने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
दिमाग की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया भी हो सकती है प्रभावित
बहुत कम लोग जानते हैं कि पानी मस्तिष्क को साफ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारे दिमाग में एक विशेष तंत्र मौजूद होता है, जिसे ग्लिम्फैटिक सिस्टम (Glymphatic System) कहा जाता है। यह सिस्टम दिमाग में जमा होने वाले अपशिष्ट पदार्थों और हानिकारक प्रोटीन को बाहर निकालने का काम करता है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता, तो यह प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाती। इससे दिमाग में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जो लंबे समय में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लिम्फैटिक सिस्टम की कार्यक्षमता में कमी आने पर नींद से जुड़ी समस्याएं, याददाश्त में गिरावट और उम्र बढ़ने के साथ कुछ न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
डिहाइड्रेशन से हो सकती हैं ये मानसिक समस्याएं
शोध बताते हैं कि शरीर में पानी की कमी केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। डिहाइड्रेशन के कारण निम्न समस्याएं देखने को मिल सकती हैं

सोचने और समझने की क्षमता में कमी
डिहाइड्रेशन होने पर व्यक्ति की एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और स्मरण शक्ति प्रभावित हो सकती है। जटिल कार्यों को समझने और उन पर प्रतिक्रिया देने में अधिक समय लग सकता है।
मूड में बदलाव
पर्याप्त पानी न पीने पर चिड़चिड़ापन, तनाव, बेचैनी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई अध्ययनों में डिहाइड्रेशन और मूड स्विंग्स के बीच संबंध देखा गया है।
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प्रतिक्रिया देने की गति धीमी होना
जब मस्तिष्क को पर्याप्त हाइड्रेशन नहीं मिलता, तो उसकी प्रोसेसिंग स्पीड कम हो सकती है। इससे किसी स्थिति पर प्रतिक्रिया देने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है।
रक्त संचार पर प्रभाव
लंबे समय तक बनी रहने वाली डिहाइड्रेशन की स्थिति शरीर में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। इसका असर मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की मात्रा पर भी पड़ सकता है।
उम्र के अनुसार कितना पानी पीना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पानी की आवश्यकता हर व्यक्ति की उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि और मौसम के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। फिर भी कुछ सामान्य मानक निर्धारित किए गए हैं।
उम्र के हिसाब से कितना पानी पीना चाहिए
1 से 3 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन लगभग 1 लीटर पानी पीना चाहिए।
4 से 8 वर्ष की उम्र में रोजाना करीब 1.18 लीटर पानी आवश्यक माना जाता है।
9 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए लगभग 1.65 लीटर पानी की जरूरत होती है।
14 से 18 वर्ष के किशोरों को प्रतिदिन करीब 2.6 लीटर पानी पीना चाहिए।
19 वर्ष से अधिक पुरुषों के लिए लगभग 3.07 लीटर पानी की सलाह दी जाती है।
19 वर्ष से अधिक महिलाओं को रोजाना करीब 2.12 लीटर पानी पीना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं के लिए प्रतिदिन लगभग 2.36 लीटर पानी आवश्यक माना जाता है।
स्तनपान कराने वाली महिलाओं को करीब 3.07 लीटर पानी का सेवन करना चाहिए।

ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। यदि एक साथ अधिक पानी पीना मुश्किल लगता है, तो अपने साथ हमेशा एक पानी की बोतल रखें और नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। आप दिनभर कितना पानी पी रहे हैं, इस पर नजर रखना भी उपयोगी हो सकता है। गर्मी, व्यायाम या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान पानी की जरूरत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ सकती है।