नारी डेस्क: अक्सर जब विटामिन D की बात होती है तो लोग इसे केवल हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, यह पोषक तत्व शरीर में कई दूसरी महत्वपूर्ण भूमिकाएं भी निभाता है। खासकर मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि विटामिन D की कमी होने पर व्यक्ति को कमजोरी, थकान और चलने-फिरने में दिक्कत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। एंडोक्रिनोलॉजी एवं डायबिटीज विशेषज्ञ के अनुसार, शरीर में विटामिन D की कमी सिर्फ हड्डियों को कमजोर नहीं करती, बल्कि मांसपेशियों को भी प्रभावित करती है, जिससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ जाती है समस्या
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से कमजोर होने लगती हैं। संतुलन बनाए रखने की क्षमता भी धीरे-धीरे कम होती जाती है। यदि इसी दौरान शरीर में विटामिन D की कमी हो जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे लोगों को चलते समय अस्थिरता महसूस हो सकती है, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी हो सकती है और गिरने का जोखिम भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि उम्रदराज लोगों में विटामिन D के स्तर की नियमित जांच को महत्वपूर्ण माना जाता है।

शरीर देता है कुछ खास संकेत
विटामिन D की कमी होने पर शरीर कई संकेत देने लगता है, लेकिन लोग अक्सर इन्हें सामान्य थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस कमी के कारण मांसपेशियों में दर्द, अकड़न, कमजोरी, हड्डियों में दर्द और बार-बार थकान महसूस हो सकती है। कई बार व्यक्ति को लंबे समय तक खड़े रहने या चलने में भी दिक्कत होने लगती है। यदि ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लेकर ब्लड टेस्ट करवाना बेहतर रहता है।
क्या बार-बार गिरना सिर्फ उम्र का असर है
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार गिरने की समस्या को केवल उम्र बढ़ने का परिणाम मानना सही नहीं है। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। कमजोर नजर, नसों से जुड़ी समस्याएं, संतुलन संबंधी विकार, मांसपेशियों की कमजोरी या विटामिन D की कमी भी इसकी वजह बन सकती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को बार-बार गिरने की समस्या हो रही है तो उसकी मेडिकल जांच कराना जरूरी है।

विटामिन D की कमी से कैसे बचें
शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन D बनाए रखने के लिए रोजाना कुछ समय सुबह की धूप में बैठना फायदेमंद माना जाता है। धूप शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनाने में मदद करती है। इसके अलावा अंडे की जर्दी, फैटी फिश और विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल किया जा सकता है। संतुलित भोजन और सक्रिय जीवनशैली भी इस कमी से बचाने में मदद करती है।
बिना सलाह सप्लीमेंट लेना पड़ सकता है भारी
आजकल कई लोग बिना जांच करवाए और बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन D सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार का सप्लीमेंट शुरू करने से पहले ब्लड टेस्ट करवाना और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही मात्रा में लिया गया विटामिन D ही शरीर को लाभ पहुंचाता है।

समय रहते पहचानना है जरूरी
विटामिन D की कमी एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है। यदि आपको लगातार कमजोरी महसूस होती है, मांसपेशियों में दर्द रहता है या संतुलन बिगड़ने जैसी परेशानी होती है तो इसे हल्के में न लें। समय पर जांच और सही देखभाल से न सिर्फ हड्डियों बल्कि पूरे शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।