नारी डेस्क: देशभर में कमर्शियल गैस किचन की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने किचन चिमनी और उससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सुरक्षा मानकों में अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत पहली बार किचन चिमनी की न्यूनतम एयरफ्लो क्षमता, धुआं और गंध निकालने की दक्षता समेत कई तकनीकी मानकों को अनिवार्य कर दिया गया है। इन नए मानकों का उद्देश्य आग लगने, शॉर्ट सर्किट और बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना है।
जून 2026 से लागू हुए नए मानक
सरकार की ओर से जारी किए गए नए सुरक्षा मानक जून 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। फिलहाल ये नियम कमर्शियल गैस किचन पर लागू किए गए हैं, जिनमें होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, बड़े क्लाउड किचन, अस्पतालों के किचन, कैंटीन, ढाबे और अन्य व्यावसायिक रसोईघर शामिल हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में इन्हीं मानकों के आधार पर घरेलू गैस किचन के लिए भी नए सुरक्षा नियम लागू किए जा सकते हैं।

पहली बार तय हुई चिमनी की न्यूनतम एयरफ्लो क्षमता
अब तक किचन चिमनी की हवा खींचने की न्यूनतम क्षमता को लेकर कोई स्पष्ट मानक तय नहीं था। नए नियमों के तहत पहली बार यह सीमा निर्धारित की गई है। इसके अलावा धुआं और खाना पकाने के दौरान बनने वाली गंध को बाहर निकालने की क्षमता का भी परीक्षण किया जाएगा। सभी उत्पादों को तय किए गए टेस्ट में सफल होना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें बाजार में उतारा जा सकेगा।
फिल्टर, मोटर और वायरिंग के लिए भी सख्त नियम
सरकार ने केवल एयरफ्लो ही नहीं, बल्कि चिमनी के फिल्टर, ग्रीस कंट्रोल सिस्टम, मोटर और वायरिंग से जुड़े मानकों को भी पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है। नए नियमों के अनुसार तापरोधी (हीट-रेसिस्टेंट) सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होगा, जबकि ओवरहीटिंग रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही मोटर और फैन की गुणवत्ता जांचने के लिए नए टेस्टिंग पैरामीटर लागू किए गए हैं। वायरिंग और बिजली लीकेज से बचाव के लिए भी सुरक्षा मानकों को मजबूत किया गया है ताकि शॉर्ट सर्किट की घटनाओं में कमी लाई जा सके।
डिजाइन में भी होंगे जरूरी बदलाव
नई गाइडलाइन के तहत चिमनी के डिजाइन में भी बदलाव किए जाएंगे। खासतौर पर ग्रीस जमा होने की संभावना को कम करने और आग लगने के जोखिम को घटाने के लिए उत्पादों की डिजाइनिंग में सुधार किया जाएगा। साथ ही चिमनी के शोर (Noise Level) को भी तय सीमा के भीतर रखना होगा, जिससे उपयोग के दौरान असुविधा कम हो।
करीब 50 लाख कमर्शियल किचन होंगे प्रभावित
नए सुरक्षा मानकों का असर देशभर के लगभग 50 लाख कमर्शियल किचन पर पड़ेगा। इनमें संगठित और असंगठित दोनों तरह के खाद्य प्रतिष्ठान शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 25 लाख पंजीकृत रेस्टोरेंट, 12 लाख से अधिक संगठित फूड चेन आउटलेट, 1 लाख से ज्यादा क्लाउड किचन, 10 हजार से अधिक फूड कोर्ट और मॉल फूड कोर्ट, लगभग 3 लाख होटल किचन तथा विभिन्न संस्थानों में करीब 5 लाख कैंटीन संचालित हैं।

नए नियमों से क्या होंगे फायदे
सरकार का मानना है कि नए मानकों के लागू होने से कमर्शियल किचन में आग और बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं में कमी आएगी। बेहतर एयरफ्लो और धुआं निकालने की क्षमता से किचन का वातावरण अधिक स्वच्छ रहेगा, जिससे कर्मचारियों की सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा उपकरणों की कार्यक्षमता और उनकी उम्र बढ़ने की उम्मीद है, जबकि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
घरेलू किचन के लिए भी आ सकते हैं नए नियम
फिलहाल ये मानक केवल व्यावसायिक गैस किचन पर लागू किए गए हैं, लेकिन सरकार भविष्य में घरेलू गैस किचन के लिए भी इसी तरह के सुरक्षा मानक लागू करने पर विचार कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो घरों में इस्तेमाल होने वाली किचन चिमनियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए भी अधिक सख्त सुरक्षा नियम लागू किए जा सकते हैं।