
नारी डेस्क: सावन शुरू हो गया है, इस महीने सावन में शिव पूजा के अलावा माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व है, देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए सावन में हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है। यह व्रत वैवाहिक सुख, लंबे समय तक चलने वाले खुशहाल दांपत्य जीवन और पति व बच्चों की भलाई के लिए रखा जाता है। 2026 में इस व्रत की चार तारीखें 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त हैं। चलिए जानते हैं इस व्रत के महत्व के बारे में

मंगला गौरी व्रत का महत्व
स्कंद पुराण में देवी गौरी की उपासना को सौभाग्य, आयु और समृद्धि देने वाली बताया गया है। व्रतराज में मंगला गौरी व्रत की कथा और पूजन विधि का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से पति पर आने वाले अकाल मृत्यु के संकट टलने और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है। इस व्रत को रखने से मन को संतोष और आत्मबल मिलता है। ध्यान रखें कि व्रत के दिन झूठ न बोलें, क्रोध और कटु वचन से बचें। इस दिन किसी विवाहित महिला का आशीर्वाद लेना विशेष शुभ माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत रखने का नियम
व्रत रखने वाली महिला या कन्या मंगलवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शांत मन से माता गौरी के व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता गौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। माता पार्वती को जल से स्नान कराएं, फिर वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। उन्हें 16 श्रृंगार की चीजें अर्पित करें, दीपक जलाकर मंगलागौरी व्रत कथा सुनें या पढ़ें। माता को फूल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें ओर फिर "ॐ गौरी शंकराय नमः" या "ॐ पार्वत्यै नमः" मंत्र का जाप करें। अंत में आरती करें और सभी परिजनों के लिए सुख-शांति की कामना करें।

कुंवारी कन्याएं करें ये चमत्कारी उपाय
माता गौरी को लाल पुष्प, लाल चूड़ी, सिंदूर और कुमकुम चढ़ाएं। "ॐ उमायै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। यह उपाय विवाह में आ रही देरी को दूर करता है। माता को सोलह श्रृंगार (मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, काजल आदि) अर्पित करें। ये चीजें माता को बहुत प्रिय हैं और इस दिन सौभाग्यवती बनने का आशीर्वाद देती हैं। माता गौरी की मूर्ति के चारों ओर 5 या 7 बार मौली लपेटें। प्रार्थना करें कि विवाह संबंधी सभी बाधाएं दूर हों। वलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें और माता गौरी से वर प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। साथ ही “ॐ गौरी पतये नमः” का 108 बार जाप करें। मंगलवार की रात को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय विवाह के योग को शीघ्र बनाता है।