नारी डेस्क: बच्चों को खाना खिलाना सुनने में जितना आसान लगता है, असल में कई माता-पिता के लिए उतना ही मुश्किल होता है। कभी बच्चा सब्जी खाने से मना कर देता है तो कभी उसे सिर्फ अपनी पसंद की चीज ही चाहिए होती है। ऐसे में पैरेंट्स के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि बच्चे को कितना रोकें और कितनी छूट दें। बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत का बच्चों के खाने को लेकर नजरिया थोड़ा अलग है। वह हर पसंदीदा चीज को पूरी तरह बैन करने के बजाय खाने में संतुलन और सहज माहौल रखने की बात करती हैं। मीरा के इस अप्रोच को अक्सर ‘No Rules’ Food Formula कहा जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे जब जो चाहें, जितना चाहें खाएं। इसका मकसद खाने को लेकर बहुत ज्यादा सख्ती करने के बजाय बच्चे को खाने की अलग-अलग चीजों से परिचित कराना और उसकी पसंद को समझना है।
खाने को लेकर बच्चों पर ज्यादा दबाव नहीं
मीरा राजपूत सोशल मीडिया पर अपनी लाइफस्टाइल और पेरेंटिंग से जुड़े अनुभव शेयर करती रहती हैं। बच्चों की डाइट को लेकर उनके नजरिए में सबसे खास बात यह है कि वह हर चीज को पूरी तरह रोकने के बजाय पूरे खान-पान पर ध्यान देने की बात करती हैं। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा कभी चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर या अपनी पसंद की कोई दूसरी चीज खाना चाहता है तो उसे हर बार गलत बताकर रोकना जरूरी नहीं है। इसके बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी है कि बच्चे के रोज के खाने में पौष्टिक चीजें पर्याप्त मात्रा में शामिल हो रही हैं या नहीं।

‘No Rules’ का मतलब मनमर्जी खाना नहीं
यह समझना जरूरी है कि ‘No Rules’ का मतलब बच्चों को बिना किसी सीमा के कुछ भी खिलाना नहीं है। यहां बात जरूरत से ज्यादा सख्त फूड रूल्स से बचने की है। कई बार माता-पिता बच्चों को हेल्दी खाना खिलाने के चक्कर में उनकी पसंद की हर चीज पर रोक लगा देते हैं। लेकिन इससे कुछ बच्चों में उसी खाने को लेकर उत्सुकता और बढ़ सकती है। इसलिए खाने को लेकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा सकती है, जिसमें बच्चा बिना डर या अपराधबोध के खाना सीख सके।
पसंद के साथ पोषण का भी रखें ध्यान
अगर बच्चा किसी दिन अपनी पसंद की कोई डिश मांगता है तो उसे पूरी तरह गलत बताने के बजाय बाकी भोजन में पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है।बच्चे की रोज की डाइट में दाल, सब्जियां, फल, अनाज, दूध-दही और उसकी उम्र के हिसाब से दूसरे जरूरी खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। ऐसे में कभी-कभार पसंद की चीज खाने को लेकर बहुत ज्यादा तनाव लेने की जरूरत नहीं होती।

खाने के समय डांटने से बचें
बच्चे क्या खाते हैं, इसके साथ यह भी मायने रखता है कि वह खाना किस माहौल में खा रहे हैं। अगर हर बार खाना खिलाते समय डांट, जबरदस्ती या दबाव रहता है तो बच्चा खाने को लेकर तनाव महसूस कर सकता है। इसके बजाय माता-पिता बच्चे के सामने अलग-अलग विकल्प रख सकते हैं और उसे उनमें से चुनने का थोड़ा मौका दे सकते हैं। अगर बच्चा कोई नई चीज पहली बार पसंद नहीं करता तो उसे तुरंत जबरदस्ती खिलाने के बजाय कुछ समय बाद दोबारा ट्राय किया जा सकता है।
हर बच्चे के लिए एक जैसा फूड फॉर्मूला नहीं
मीरा राजपूत का यह तरीका उनकी पर्सनल पेरेंटिंग अप्रोच है। जरूरी नहीं कि यही तरीका हर बच्चे पर उसी तरह काम करे। हर बच्चे की उम्र, शारीरिक गतिविधि, खाने की पसंद और पोषण की जरूरत अलग होती है। अगर बच्चा बहुत कम चीजें खाता है, उसकी ग्रोथ को लेकर चिंता है, किसी खाने से एलर्जी है या डॉक्टर ने कोई खास डाइट बताई है, तो ऐसे मामलों में सेलिब्रिटी के फूड रूटीन को कॉपी करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

बच्चों के लिए कैसे बनाएं खाने का आसान माहौल?
बच्चों की डाइट को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि घर में पौष्टिक खाने के विकल्प मौजूद रहें। माता-पिता खुद भी अलग-अलग हेल्दी चीजें खाकर बच्चों के सामने उदाहरण पेश कर सकते हैं। बच्चे को कभी-कभार उसकी पसंद की चीज खाने देना और साथ ही रोज के खाने में पौष्टिक विकल्प बनाए रखना एक संतुलित तरीका हो सकता है। इस तरह बच्चे धीरे-धीरे यह सीख सकते हैं कि खाना सिर्फ पसंद या नापसंद की बात नहीं, बल्कि स्वाद और पोषण दोनों का संतुलन है।
डिस्क्लेमर: यह लेख मीरा राजपूत के बताए गए पेरेंटिंग और फूड अप्रोच पर आधारित है। हर बच्चे की जरूरत अलग होती है। बच्चे की डाइट में बड़ा बदलाव करने या किसी विशेष पोषण संबंधी समस्या की स्थिति में डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।