नारी डेस्क : तपेदिक यानी टीबी को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या पूरा इलाज होने के बाद भी यह बीमारी दोबारा हो सकती है? इसका जवाब है—हां। इलाज पूरा होने और ठीक होने के बाद भी कुछ लोगों में टीबी दोबारा हो सकती है। ऐसा पहले संक्रमण के दोबारा सक्रिय होने या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नए संक्रमण के कारण हो सकता है। अधूरा इलाज, दवा-प्रतिरोध, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और कुपोषण जैसे कारक भी बीमारी के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, टीबी के दोबारा सामने आने पर यह पता लगाना जरूरी है कि बीमारी पुराने संक्रमण के लौटने से हुई है या नए संक्रमण के कारण।
क्या है टीबी और यह दोबारा क्यों हो सकती है?
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है। सही जांच और निर्धारित दवाओं से इसका इलाज संभव है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में इलाज के बाद बीमारी दोबारा उभर सकती है।

टीबी की पुनरावृत्ति के पीछे मुख्य रूप से दो स्थितियां हो सकती हैं।
पुरानी टीबी का दोबारा सक्रिय होना: कभी-कभी शुरुआती संक्रमण के बाद शरीर में मौजूद बैक्टीरिया निष्क्रिय अवस्था में रह सकते हैं। जब प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें नियंत्रित नहीं कर पाती, तो वे दोबारा सक्रिय होकर बीमारी पैदा कर सकते हैं।
दोबारा नया संक्रमण होना: टीबी का इलाज सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है, तो उसे दोबारा संक्रमण हो सकता है। इसे री-इन्फेक्शन कहा जाता है।
सुप्त टीबी और प्रतिरक्षा प्रणाली का क्या है संबंध?
टीबी का बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होने के बावजूद हर व्यक्ति में सक्रिय बीमारी पैदा नहीं करता। कुछ लोगों में संक्रमण सुप्त अवस्था में रहता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को आमतौर पर टीबी के लक्षण नहीं होते और वह सुप्त संक्रमण के कारण दूसरों में बीमारी नहीं फैलाता। लेकिन जब प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती है, तो संक्रमण के सक्रिय टीबी में बदलने का खतरा बढ़ सकता है। एचआईवी संक्रमण, मधुमेह, कुपोषण और प्रतिरक्षा को दबाने वाली कुछ दवाएं इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं। स्टेरॉयड या अन्य प्रतिरक्षादमनकारी (Immunosuppressants) दवाएं लेने वाले लोगों को भी अपने डॉक्टर से जोखिम के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
क्या गलत खानपान से दोबारा हो सकती है टीबी?
पोषण की कमी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व नहीं लेता, तो उसके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कुपोषण टीबी के विकसित होने के जोखिम से जुड़ा हुआ है। क्रैश डाइटिंग, लंबे समय तक भोजन छोड़ना या बिना विशेषज्ञ की सलाह के अत्यधिक प्रतिबंधित आहार लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि केवल नाश्ता छोड़ने या उपवास करने से टीबी दोबारा हो जाती है। बीमारी के दोबारा होने के पीछे कई कारक हो सकते हैं। इसलिए संतुलित भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है।

अधूरा इलाज क्यों बढ़ा सकता है परेशानी?
टीबी के इलाज में नियमित रूप से दवाएं लेना बेहद महत्वपूर्ण है। दवा बीच में छोड़ने, बार-बार खुराक छूटने या डॉक्टर की सलाह के बिना उपचार में बदलाव करने से इलाज की सफलता प्रभावित हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी का खतरा भी बढ़ता है। टीबी की दवाओं से कुछ लोगों को मतली, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते या लिवर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ दवाओं से दृष्टि संबंधी दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। हालांकि, सभी मरीजों में ऐसे दुष्प्रभाव नहीं होते। यदि दवा लेने के बाद कोई परेशानी महसूस हो, तो खुद से दवा बंद करने के बजाय तुरंत इलाज कर रहे डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर जांच कर सकते हैं और उपचार में उचित बदलाव कर सकते हैं।
दवा-प्रतिरोधी टीबी क्या होती है?
जब टीबी का बैक्टीरिया एक या अधिक ऐसी दवाओं से प्रभावित नहीं होता, जिनसे सामान्य रूप से उसका इलाज किया जाता है, तो इसे दवा-प्रतिरोधी टीबी कहा जाता है। ऐसी स्थिति में बीमारी का उपचार अधिक जटिल हो सकता है और मरीज को विशेष जांच तथा दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। दवा-प्रतिरोध हमेशा केवल मरीज की गलती या दवा छोड़ने के कारण नहीं होता। संक्रमित व्यक्ति से पहले से दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया मिलने पर भी यह समस्या हो सकती है। इसलिए टीबी दोबारा होने पर यह मान लेना उचित नहीं है कि मरीज ने दवाएं सही तरीके से नहीं ली थीं। भारत के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत दवा-प्रतिरोधी टीबी के प्रबंधन के लिए विशेष दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार बलगम की जांच और दवा-संवेदनशीलता परीक्षण के जरिए उचित उपचार तय कर सकते हैं।
टीबी दोबारा होने पर किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज?
यदि टीबी का इलाज पूरा हो चुका है और दोबारा कुछ लक्षण दिखाई देने लगें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेष रूप से इन संकेतों पर ध्यान दें
लगातार खांसी: खांसी लंबे समय तक बनी रहे या पहले से बढ़ने लगे।
बलगम में खून: खांसते समय बलगम में खून दिखाई दे।
बुखार और रात में पसीना: बार-बार बुखार आना या रात में अत्यधिक पसीना आना।
वजन कम होना: बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन घटना या भूख कम लगना।
लगातार थकान: कमजोरी, थकावट और ऊर्जा की कमी महसूस होना।
ये लक्षण केवल टीबी में ही नहीं, बल्कि दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से टीबी का निष्कर्ष न निकालें। समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं।

दोबारा टीबी होने से बचने के लिए क्या करें?
टीबी की पुनरावृत्ति का जोखिम पूरी तरह खत्म करने की गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन कुछ सावधानियां मददगार हो सकती हैं।
डॉक्टर द्वारा निर्धारित टीबी का पूरा उपचार करें और नियमित रूप से दवाएं लें।
दवाओं के दुष्प्रभाव होने पर डॉक्टर को बताएं; खुद से उपचार बंद न करें।
पौष्टिक और संतुलित भोजन लें तथा शरीर में पोषण की कमी होने पर उसका इलाज करवाएं।
मधुमेह या एचआईवी जैसी स्थितियां होने पर उनकी उचित देखभाल करवाएं।
टीबी के संभावित लक्षण दोबारा दिखने पर जल्द जांच करवाएं।
यदि घर या आसपास किसी व्यक्ति को सक्रिय टीबी है, तो स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार संपर्क में आए लोगों की जांच करवाएं।
नोट: टीबी का इलाज पूरा होने के बाद भी बीमारी दोबारा हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज को यह समस्या होगी। समय पर पहचान, सही जांच, डॉक्टर की निगरानी और निर्धारित उपचार का पालन करना बेहद जरूरी है। यदि टीबी के लक्षण दोबारा दिखाई दें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से संपर्क करें।