16 MARMONDAY2026 1:03:14 PM
Nari

कम उम्र में घुटनों में दर्द  के 4 कारण, कट कट की आवाज आते ही पहुंच जाइए डॉक्टर के पास

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 16 Mar, 2026 11:24 AM
कम उम्र में घुटनों में दर्द  के 4 कारण, कट कट की आवाज आते ही पहुंच जाइए डॉक्टर के पास

नारी डेस्क:  पहले घुटनों का आर्थराइटिस बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार गलत लाइफस्टाइल, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या चलने-फिरने तक में परेशानी पैदा कर सकती है। आइए जानते हैं कम उम्र में घुटनों में आर्थराइटिस होने के प्रमुख कारण और इससे बचाव के तरीके।


कम उम्र में घुटनों में आर्थराइटिस के 4 बड़े कारण

बढ़ता मोटापा: अत्यधिक वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। जब शरीर का वजन ज्यादा होता है तो घुटनों के जोड़ों पर भार कई गुना बढ़ जाता है। इससे कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है और आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठकर काम करना या बिल्कुल व्यायाम न करना भी घुटनों की समस्या का कारण बन सकता है। जब शरीर एक्टिव नहीं रहता तो मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे घुटनों को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता।

पुरानी चोट या खेल के दौरान चोट लगना: घुटने में पहले लगी चोट, लिगामेंट डैमेज या मेनिस्कस की समस्या भी आगे चलकर आर्थराइटिस का कारण बन सकती है। कई बार चोट ठीक हो जाने के बाद भी जोड़ों में धीरे-धीरे घिसाव शुरू हो जाता है।

गलत बैठने और उठने की आदतें: बार-बार जमीन पर बैठना, बहुत देर तक घुटनों को मोड़कर बैठना या गलत तरीके से सीढ़ियां चढ़ना-उतरना भी घुटनों पर दबाव बढ़ा सकता है। लंबे समय तक ऐसी आदतें जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।


घुटनों में आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत

- घुटनों में दर्द या जकड़न
-सीढ़ियां चढ़ते समय दर्द महसूस होना
-चलने या उठने-बैठने में परेशानी
-घुटनों में सूजन या आवाज आना

इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आर्थराइटिस से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

वजन को कंट्रोल में रखें: स्वस्थ वजन बनाए रखने से घुटनों पर दबाव कम पड़ता है।

नियमित व्यायाम करें: हल्की एक्सरसाइज, वॉकिंग, योग और स्ट्रेचिंग घुटनों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

मांसपेशियों को मजबूत बनाएं: थाई और लेग मसल्स मजबूत होने से घुटनों को बेहतर सपोर्ट मिलता है।

सही बैठने की आदत अपनाएं: बहुत देर तक जमीन पर बैठने या घुटनों को ज्यादा मोड़कर बैठने से बचें।

चोट लगने पर तुरंत इलाज कराएं: घुटनों में किसी भी प्रकार की चोट या दर्द को नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।


इन बातों का रखें ध्यान 

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कम उम्र में ही घुटनों में दर्द या जकड़न महसूस होने लगे तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। सही जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है और आर्थराइटिस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Related News