नारी डेस्क : क्या आपको भी रात में सोते-सोते अचानक ऐसा महसूस होता है जैसे आप ऊंचाई से गिर रहे हों? या फिर शरीर अचानक झटके से हिल जाता है और आपकी नींद खुल जाती है? अगर ऐसा कभी-कभार होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। इसे हाइपनिक जर्क (Hypnic Jerk) कहा जाता है। यह एक तरह की अनैच्छिक मांसपेशियों की हलचल है, जो नींद आने के शुरुआती चरण में हो सकती है। कई लोगों को इस दौरान गिरने, झटका लगने या अचानक कुछ होने जैसा एहसास भी हो सकता है। कभी-कभी शरीर के साथ ऐसा अनुभव इतना अचानक होता है कि व्यक्ति पूरी तरह जाग जाता है। आमतौर पर हाइपनिक जर्क सामान्य होते हैं और इनके लिए किसी खास इलाज की जरूरत नहीं पड़ती।
सोते समय क्यों लगते हैं झटके?
हाइपनिक जर्क उस समय हो सकता है जब शरीर जागने की अवस्था से नींद की तरफ जा रहा होता है। इस दौरान मांसपेशियां धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगती हैं और दिमाग में होने वाले बदलावों के साथ अचानक एक अनैच्छिक मांसपेशी झटका महसूस हो सकता है। यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि हाइपनिक जर्क क्यों होता है, लेकिन नींद की कमी, तनाव, थकान और ज्यादा कैफीन जैसे कुछ कारक इसकी संभावना बढ़ा सकते हैं। कई बार झटके के साथ गिरने जैसा सपना या एहसास भी हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दिमाग में कोई गंभीर समस्या है।
Hypnic Jerk के क्या कारण हो सकते हैं?
हाइपनिक जर्क का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। कुछ परिस्थितियां इसकी संभावना बढ़ा सकती हैं,
जैसे: पर्याप्त नींद न लेना
ज्यादा थकान या अनियमित नींद का समय
मानसिक तनाव या चिंता
रात में ज्यादा कैफीन लेना
सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा उत्तेजना या स्क्रीन टाइम
कुछ दवाओं या पदार्थों का प्रभाव
बहुत ज्यादा शारीरिक थकावट
हर व्यक्ति में इसके ट्रिगर अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल झटके आने के आधार पर आयरन या किसी दूसरे पोषक तत्व की कमी मान लेना सही नहीं है।
क्या Hypnic Jerk खतरनाक होता है?
ज्यादातर मामलों में हाइपनिक जर्क गंभीर समस्या नहीं होता और कभी-कभार होने वाले झटकों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर झटके बहुत ज्यादा बार आने लगे हैं, नींद लगातार खराब हो रही है या इसके साथ दूसरे असामान्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर अगर शरीर में लगातार अनैच्छिक हरकतें, बेहोशी, चोट या दिन में अत्यधिक नींद जैसी समस्या हो, तो इसकी जांच जरूरी हो सकती है।

Hypnic Jerk से बचने के लिए क्या करें?
अगर आपको बार-बार सोते समय झटके महसूस होते हैं, तो अपनी नींद की आदतों में कुछ बदलाव करके देखा जा सकता है।
पूरी नींद लें: हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है, लेकिन ज्यादातर वयस्कों को नियमित रूप से 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। रोज एक ही समय के आसपास सोने और जागने की कोशिश करें। नींद पूरी न होने पर शरीर और दिमाग पर थकान बढ़ सकती है, जिससे हाइपनिक जर्क की संभावना बढ़ सकती है।
शाम के बाद कैफीन कम करें: कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक और कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन होता है। अगर आपको रात में सोने में परेशानी होती है या बार-बार झटके लगते हैं, तो शाम और रात के समय कैफीन का सेवन कम करना फायदेमंद हो सकता है।
तनाव कम करने की कोशिश करें: दिनभर का तनाव भी नींद को प्रभावित कर सकता है। सोने से पहले कुछ देर शांत माहौल में रहें। हल्की स्ट्रेचिंग, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या किताब पढ़ने जैसी आरामदायक गतिविधियां नींद के लिए मददगार हो सकती हैं।
सोने से ठीक पहले भारी एक्सरसाइज न करें: नियमित एक्सरसाइज नींद और स्वास्थ्य के लिए अच्छी है, लेकिन अगर आपको महसूस होता है कि सोने के बिल्कुल पहले किया गया कठिन वर्कआउट आपकी नींद खराब करता है, तो इसे सोने से कुछ घंटे पहले पूरा करने की कोशिश करें। हर व्यक्ति पर एक्सरसाइज का असर अलग हो सकता है, इसलिए अपने शरीर की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखना जरूरी है।
सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से ठीक पहले लगातार मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने की आदत नींद आने में परेशानी पैदा कर सकती है। कोशिश करें कि सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन से दूरी रखें और कमरे में शांत माहौल बनाएं।
क्या आयरन या कैल्शियम की कमी से ही लगते हैं झटके?
हाइपनिक जर्क को केवल आयरन, कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी से जोड़ना सही नहीं है। इन पोषक तत्वों की कमी शरीर में दूसरी समस्याएं पैदा कर सकती है, लेकिन हर व्यक्ति में सोते समय झटके आने का कारण यही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए बिना जांच के आयरन या दूसरे सप्लीमेंट्स लेना शुरू न करें। अगर आपको किसी पोषक तत्व की कमी का संदेह है, तो डॉक्टर की सलाह से जांच कराना बेहतर है।

किस पोजीशन में सोना चाहिए
सोने की कोई एक पोजीशन हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी नहीं होती। पीठ के बल, करवट लेकर या दूसरी आरामदायक स्थिति में सोना व्यक्ति की सुविधा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अगर किसी खास पोजीशन में सोने से आपको दर्द, सांस लेने में परेशानी या एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्या होती है, तो अपनी स्थिति के अनुसार सोने की मुद्रा बदलना बेहतर हो सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
कभी-कभार नींद में झटका लगना आम बात हो सकती है। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बढ़ रही है या आपकी नींद और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर से बात करें। खासकर अगर झटकों के साथ बेहोशी, चोट, लगातार मांसपेशियों की अनैच्छिक हरकत, कमजोरी या दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें।