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बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते, कहीं डेंगू तो नहीं? जानें लक्षण

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 23 Sep, 2026 10:00 AM
बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते, कहीं डेंगू तो नहीं? जानें लक्षण

नारी डेस्क: बारिश और गर्मी के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ते ही डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में अगर बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते या रैश नजर आने लगें, तो इसे सिर्फ सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डेंगू में भी बुखार, शरीर में दर्द और त्वचा पर रैश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, सिर्फ इन लक्षणों के आधार पर यह कहना सही नहीं है कि व्यक्ति को डेंगू ही है, क्योंकि कई दूसरी वायरल और संक्रामक बीमारियों में भी इसी तरह के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए अगर बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते निकल रहे हैं या तेज दर्द, उल्टी जैसी परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। आइए जानते हैं डेंगू में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं और किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डेंगू में कौन से लक्षण दिखाई देते हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार, डेंगू होने पर तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और त्वचा पर रैश हो सकते हैं। संक्रमित मच्छर के काटने के करीब 4 से 10 दिन बाद लक्षण शुरू हो सकते हैं।ज्यादातर लोगों में डेंगू हल्का रहता है और वे एक से दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है।

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बुखार उतर गया तो भी न करें लापरवाही

डेंगू में एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए। बुखार कम होना हमेशा इस बात का संकेत नहीं होता कि मरीज पूरी तरह ठीक हो रहा है। WHO के मुताबिक गंभीर डेंगू के warning signs अक्सर बुखार कम होने के आसपास दिखाई दे सकते हैं।अगर बुखार कम होने के बाद तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, तेजी से सांस चलना, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी, उल्टी या मल में खून और त्वचा ठंडी या पीली पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

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बुखार और लाल चकत्ते दिखें तो क्या करें?

अगर बुखार के साथ लाल चकत्ते, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द या उल्टी जैसे लक्षण हैं, तो खुद से डेंगू की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जरूरत के हिसाब से जांच की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि डेंगू की पुष्टि सिर्फ लक्षण देखकर नहीं की जाती।डेंगू के लिए फिलहाल कोई खास एंटीवायरल इलाज नहीं है। आमतौर पर इलाज में आराम, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और लक्षणों को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाता है। बुखार या दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि डेंगू में इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना बेहतर है।

मच्छरों से बचाव है सबसे जरूरी

डेंगू से बचने का सबसे अच्छा तरीका संक्रमित मच्छर के काटने से बचना और मच्छरों की संख्या को नियंत्रित करना है। डेंगू फैलाने वाला Aedes मच्छर दिन के समय भी सक्रिय रहता है, इसलिए सिर्फ रात में मच्छरदानी लगाना पर्याप्त नहीं है।घर के आसपास पानी जमा न होने दें। पानी की टंकियों और दूसरे कंटेनरों को ढककर रखें और जिन जगहों पर बारिश का पानी जमा हो सकता है, उन्हें नियमित रूप से साफ करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाना भी मददगार हो सकता है।

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डेंगू होने पर भी मच्छरों से बचें

अगर किसी व्यक्ति को डेंगू हो गया है, तो बीमारी के दौरान उसे मच्छरों से बचाना भी जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद Aedes मच्छर वायरस को दूसरे लोगों तक पहुंचा सकता है। इसलिए मरीज को मच्छरदानी या दूसरे सुरक्षित उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए, खासकर बीमारी के शुरुआती दिनों में।

ध्यान रखें: बुखार के साथ लाल चकत्ते दिखना डेंगू का संकेत हो सकता है, लेकिन यह अकेला लक्षण डेंगू की पुष्टि नहीं करता। अगर बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द, उल्टी, कमजोरी या कोई warning sign दिखाई दे, तो देरी किए बिना डॉक्टर से संपर्क करें।
 

 
 
 

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