नारी डेस्क: कई बार ऐसा होता है कि कुछ ही दिनों में वजन अचानक बढ़ा हुआ नजर आने लगता है। पेट फूला हुआ महसूस होता है, चेहरा सूजा-सूजा दिखता है या हाथ-पैरों में भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे में अक्सर लोग मान लेते हैं कि उनका फैट बढ़ गया है। लेकिन हर बार वजन बढ़ने की वजह शरीर में चर्बी जमा होना नहीं होती। कई बार शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने के कारण भी वजन बढ़ सकता है। इसे वॉटर वेट (Water Weight) कहा जाता है। शरीर में पानी जमा होने के पीछे ज्यादा नमक खाना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, हार्मोन में बदलाव या कुछ दवाओं का असर हो सकता है। हालांकि, लगातार सूजन बने रहना कभी-कभी किडनी, दिल या लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि वॉटर वेट क्या है और इसे कम करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्या होता है वॉटर वेट
हमारे शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए पानी की जरूरत होती है। शरीर में पानी का एक निश्चित संतुलन बना रहता है, जो तापमान नियंत्रित करने, पोषक तत्वों को पहुंचाने और दूसरे जरूरी कामों में मदद करता है। लेकिन जब शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने लगता है, तो वजन कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। शरीर में पानी जमा होने की स्थिति को मेडिकल भाषा में फ्लूइड रिटेंशन या एडिमा कहा जाता है। इसमें शरीर के ऊतकों में अतिरिक्त तरल इकट्ठा हो सकता है। इसका असर पैरों, टखनों, हाथों, चेहरे या पेट पर दिखाई दे सकता है। वॉटर वेट और शरीर की चर्बी में अंतर है। पानी के कारण बढ़ा वजन घट-बढ़ सकता है, जबकि फैट कम करने के लिए आमतौर पर लंबे समय तक खानपान और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना पड़ता है। इसलिए वजन बढ़ने पर तुरंत यह मान लेना सही नहीं कि शरीर में चर्बी बढ़ गई है।

शरीर में पानी जमा होने के क्या कारण हैं
ज्यादा नमक खाना
अगर आप खाने में जरूरत से ज्यादा नमक लेते हैं या अक्सर चिप्स, नमकीन, अचार और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खाते हैं, तो शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। सोडियम शरीर में पानी के संतुलन को प्रभावित करता है। इसके कारण कुछ लोगों को सूजन या वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।
लंबे समय तक बैठे या खड़े रहना
ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना या लंबे समय तक खड़े रहना पैरों और टखनों में सूजन की वजह बन सकता है। ऐसे में नियमित रूप से उठकर चलना और पैरों को कुछ देर आराम देना मददगार हो सकता है।
हार्मोन में बदलाव
कुछ महिलाओं को पीरियड्स से पहले शरीर में भारीपन, पेट फूलने या वजन में अस्थायी बदलाव का अनुभव हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी शरीर में पानी जमा होने के कारण सूजन हो सकती है। हालांकि, गर्भावस्था में अचानक या बहुत ज्यादा सूजन होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कुछ दवाओं का असर
कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं, हार्मोन से जुड़ी दवाएं, स्टेरॉयड और कुछ अन्य दवाएं शरीर में पानी जमा होने का कारण बन सकती हैं। यदि किसी दवा को शुरू करने के बाद सूजन दिखाई देने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लें। अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।
स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं
कभी-कभी शरीर में लगातार पानी जमा होना किडनी, दिल, लिवर या थायरॉयड से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में केवल खानपान बदलने से समस्या ठीक होना जरूरी नहीं है। इसके लिए सही कारण का पता लगाना जरूरी है
वॉटर वेट कम करने के 5 तरीके
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
वजन बढ़ने के डर से पानी पीना कम न करें। शरीर को पर्याप्त पानी मिलना जरूरी है। दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पिएं और मौसम, शारीरिक गतिविधि तथा अपनी जरूरत के अनुसार मात्रा तय करें। हालांकि, यदि डॉक्टर ने दिल या किडनी की बीमारी के कारण पानी सीमित करने की सलाह दी है, तो उसी निर्देश का पालन करें।

खाने में नमक की मात्रा कम करें
अगर आप शरीर में पानी जमा होने की समस्या से परेशान हैं, तो सबसे पहले अपने खानपान में नमक की मात्रा पर ध्यान दें। खाने में ऊपर से नमक डालने की आदत कम करें और चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट और ज्यादा नमक वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
नमक कम करने से शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
पोटैशियम से भरपूर चीजें खाएं
पोटैशियम शरीर में सोडियम और तरल पदार्थों के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। केला, संतरा, आलू, पालक और दूसरी सब्जियां पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों या कुछ दवाएं लेने वालों के लिए अधिक पोटैशियम नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में पोटैशियम सप्लीमेंट या नमक के विकल्प का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
रोजाना चलें-फिरें और एक्सरसाइज करें
नियमित शारीरिक गतिविधि रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करती है। यदि आपका काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है, तो बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट टहलें। हल्की वॉक, पैरों को हिलाना और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना उपयोगी हो सकता है। यदि पैरों में सूजन रहती है, तो आराम करते समय उन्हें तकिए पर थोड़ा ऊंचा रखने से राहत मिल सकती है। लेकिन सूजन का कारण स्पष्ट न हो या वह लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
पर्याप्त नींद लें और खानपान संतुलित रखें
नींद की नियमित दिनचर्या बनाए रखें और अपने भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज तथा दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। ज्यादा नमक वाले और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित रखना भी मददगार है। ध्यान रखें कि कोई एक खास खाद्य पदार्थ, मसाज या घरेलू नुस्खा शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने की गारंटी नहीं देता। वॉटर वेट का कारण जानना और उसी के अनुसार कदम उठाना ज्यादा जरूरी है।
क्या अभ्यंग मसाज से वॉटर वेट कम होता है
अभ्यंग आयुर्वेद में तेल से की जाने वाली मालिश की एक पद्धति है। इससे कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है, लेकिन शरीर में जमा अतिरिक्त पानी निकालने या वॉटर वेट कम करने के लिए इसके प्रभाव के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। यदि शरीर में सूजन है, तो केवल मसाज पर निर्भर रहने के बजाय उसके कारण की जांच कराना बेहतर है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
यदि वजन अचानक बढ़ रहा है या शरीर में बार-बार सूजन दिखाई देती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। खासकर इन स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर लगातार सूजन बनी रहना। सूजन का अचानक बढ़ना या बिना किसी स्पष्ट कारण के दिखाई देना। पेट में असामान्य सूजन या भारीपन महसूस होना। सूजन के साथ सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द होना।
अगर सूजन के साथ सांस लेने में कठिनाई या सीने में दर्द हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। ये गंभीर स्वास्थ्य समस्या के संकेत हो सकते हैं। अंत में, वॉटर वेट को कम करने के लिए पानी पीना बंद करना, बिना सलाह के पानी निकालने वाली दवाएं लेना या अचानक बहुत सख्त डाइट शुरू करना सही तरीका नहीं है। पर्याप्त पानी, संतुलित खानपान और नियमित गतिविधि सामान्य स्वास्थ्य के लिए मददगार हैं, लेकिन लगातार या अचानक होने वाली सूजन का सही कारण जानना सबसे जरूरी है।