नारी डेस्क: सर्दियों का मौसम आते ही ठंडी हवाओं और कम नमी का असर हमारी सेहत के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ने लगता है। इस दौरान कई लोगों को आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और सूखेपन की शिकायत होने लगती है। खासकर बुजुर्गों और पहले से आंखों की समस्या से परेशान लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। वहीं, आजकल बच्चों का अधिक समय मोबाइल, टीवी और दूसरी डिजिटल स्क्रीन के सामने बिताना भी उनकी आंखों की सेहत के लिए चिंता का विषय बन रहा है। ऐसे में जरूरी है कि मौसम बदलने के साथ आंखों की देखभाल पर भी ध्यान दिया जाए। सर्दियों में वातावरण की नमी कम होने और ठंडी हवा के संपर्क में आने से आंखों में सूखेपन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए इस मौसम में आंखों को धूल-मिट्टी और तेज हवा से बचाना जरूरी है। साथ ही, आंखों में किसी भी तरह की परेशानी होने पर खुद से दवा इस्तेमाल करने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है आंखों में सूखेपन और जलन की समस्या?
ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है। ऐसे में आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की परत जल्दी सूख सकती है, जिससे आंखों में रूखापन, जलन और कुछ चुभने जैसा महसूस हो सकता है। ठंडी हवा सीधे आंखों पर लगने से भी परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा, सर्दियों में हीटर या ब्लोअर का इस्तेमाल करने से कमरे की हवा और शुष्क हो सकती है। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने वाले लोगों को आंखों में सूखापन महसूस हो सकता है। जिन लोगों को पहले से ड्राई आई की समस्या है, उन्हें इस मौसम में अधिक परेशानी हो सकती है। अगर आंखों में बार-बार जलन हो, लगातार लालिमा बनी रहे या देखने में परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

बच्चों की आंखों पर मोबाइल और गैजेट्स का बढ़ता इस्तेमाल
आजकल छोटे बच्चों का काफी समय मोबाइल, टैबलेट, टीवी और कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने बीतता है। ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो देखने और गेम खेलने के कारण उनका स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर बच्चे कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों में सूखापन और थकान महसूस हो सकती है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित रखें और उन्हें बीच-बीच में आराम करने की आदत डालें। बच्चों को रोजाना बाहर खेलने, पर्याप्त रोशनी में पढ़ने और मोबाइल को आंखों से उचित दूरी पर रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। अगर बच्चा बार-बार आंखें मसलता है, टीवी देखते समय पास जाकर बैठता है, सिरदर्द की शिकायत करता है या किसी चीज को देखने में परेशानी महसूस करता है, तो उसकी आंखों की जांच करवानी चाहिए।
सर्दियों में किन लोगों को आंखों का खास ध्यान रखना चाहिए?
डॉक्टर के अनुसार, सर्दियों में बुजुर्गों और छोटे बच्चों की आंखों की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, कुछ लोगों के लिए नियमित जांच भी जरूरी है।
बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ आंखों में सूखेपन और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नजर में बदलाव होने पर जांच करवाएं।
डायबिटीज के मरीज: मधुमेह का असर आंखों के पर्दे यानी रेटिना पर पड़ सकता है। ऐसे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिए।
ग्लूकोमा के मरीज: काला मोतिया या ग्लूकोमा आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है।
छोटे बच्चे: बच्चों में भेंगापन या देखने से जुड़ी किसी परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती जांच से सही समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

सर्दियों में आंखों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
बाहर निकलते समय चश्मा पहनें
ठंडी हवा और धूल-मिट्टी से आंखों को बचाने के लिए बाहर निकलते समय चश्मे का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आंखों पर सीधे हवा और उड़ते धूल-कणों का असर कम करने में मदद मिलती है।
पौष्टिक आहार लें
अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, मौसमी फल, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार आंखों की सामान्य सेहत बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, केवल किसी खास खाद्य पदार्थ को खाने से आंखों की हर समस्या दूर नहीं होती।
मोबाइल और कंप्यूटर से बीच-बीच में ब्रेक लें
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान और सूखापन महसूस हो सकता है। इसलिए लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लें। कुछ देर दूर रखी किसी चीज को देखें और सामान्य रूप से पलकें झपकाते रहें।
आंखों को बार-बार न रगड़ें
अगर आंखों में खुजली या जलन हो रही है, तो उन्हें बार-बार हाथों से न रगड़ें। ऐसा करने से परेशानी बढ़ सकती है। आंखों में लगातार तकलीफ रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।
बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप न डालें
आंखों में जलन या सूखापन होने पर कई लोग खुद ही मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदकर इस्तेमाल करने लगते हैं। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि हर तरह की परेशानी के लिए एक ही दवा सही नहीं होती। खासकर स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए।
हीटर की हवा सीधे आंखों पर न आने दें
कमरे में हीटर या ब्लोअर का इस्तेमाल करते समय उसकी हवा सीधे चेहरे और आंखों पर न पड़ने दें। बहुत शुष्क वातावरण में लंबे समय तक रहने से आंखों का सूखापन बढ़ सकता है।

सर्दियों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन और आंखों की जांच
सर्दियों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ सकती है। हालांकि, मोतियाबिंद की सर्जरी करवाने का सही समय केवल मौसम पर निर्भर नहीं करता। मरीज की आंखों की स्थिति, स्वास्थ्य और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ऑपरेशन का समय तय किया जाता है। अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी के साथ ग्लूकोमा का इलाज, डायबिटीज के मरीजों की रेटिना जांच और बच्चों में भेंगापन जैसी समस्याओं का उपचार भी आंखों की देखभाल का अहम हिस्सा है। समय पर जांच से कई समस्याओं की पहचान की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू किया जा सकता है।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर आंखों में लगातार जलन, सूखापन, लालिमा या धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानी हो रही है, तो नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। आंखों में तेज दर्द, अचानक नजर कम होना या अचानक दिखाई देना बंद होने जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
ध्यान रखें: सर्दियों में आंखों की परेशानी को केवल मौसम का असर समझकर नजरअंदाज न करें। सही देखभाल, संतुलित आहार, स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण और समय पर जांच से आंखों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।