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शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर, जानें इसका खास महत्व

  • Edited By Monika,
  • Updated: 24 Oct, 2026 06:06 PM
शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर, जानें इसका खास महत्व

नारी डेस्क : शरद पूर्णिमा की रात का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस रात आसमान में चमकते चंद्रमा की पूजा की जाती है और दूध-चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं। यही वजह है कि इस रात चांदनी में रखी खीर को सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस रात खीर रखने की परंपरा के पीछे की मान्यताएं और इसका धार्मिक महत्व।

शरद पूर्णिमा की रात खीर चांदनी में क्यों रखते हैं?

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसी आस्था के चलते दूध, चावल और चीनी से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, ताकि उस पर चांदनी पड़े। अगले दिन सुबह इस खीर को भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

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मां लक्ष्मी से जुड़ी है कोजागरी पूर्णिमा की मान्यता

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनका स्मरण कर रहा है। मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति रात में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करता है, उस पर देवी की कृपा बनी रहती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ‘कोजागरी’ शब्द को संस्कृत के ‘को जागर्ति’ से जोड़कर देखा जाता है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है?’ इसी कारण इस रात जागरण और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा क्यों है खास?

शरद पूर्णिमा को वर्ष की सबसे खास पूर्णिमा में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसलिए भक्त चंद्र देव की पूजा करते हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर इस रात भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला का स्मरण भी किया जाता है।

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आयुर्वेद में खीर और शरद ऋतु को लेकर क्या मान्यता है?

शरद ऋतु में मौसम बदलने लगता है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक महसूस हो सकती है। आयुर्वेद में इस मौसम के दौरान पित्त दोष के संतुलन पर ध्यान देने की बात कही जाती है। दूध और चावल से बनी खीर को पारंपरिक रूप से पौष्टिक आहार माना जाता है, इसलिए इसे शरद पूर्णिमा से जोड़कर देखा जाता है।

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शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह लगभग 11:56 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह लगभग 9:41 बजे तक रहेगी। पूजा और चंद्रोदय के समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा। शरद पूर्णिमा की रात खीर चांदनी में रखने की परंपरा धार्मिक आस्था, मां लक्ष्मी की पूजा और चंद्रमा के प्रति श्रद्धा से जुड़ी हुई है। इस अवसर पर लोग सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं।

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