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दिल के मरीज को कब पड़ती है स्टेंट की जरूरत? जानें डॉक्टर क्या कहते हैं

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Oct, 2026 12:21 PM
दिल के मरीज को कब पड़ती है स्टेंट की जरूरत? जानें डॉक्टर क्या कहते हैं

नारी डेस्क:  दिल की बीमारी का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में एंजियोग्राफी और स्टेंट का ख्याल आने लगता है। खासकर जब एंजियोग्राफी रिपोर्ट में दिल की धमनियों में ब्लॉकेज का पता चलता है, तो मरीज और परिवार के लोग घबरा जाते हैं। उन्हें लगता है कि ब्लॉकेज दिखने का मतलब है कि अब स्टेंट लगवाना ही पड़ेगा। लेकिन ऐसा हर मामले में जरूरी नहीं होता। दिल की धमनियों में रुकावट होने और उस रुकावट को दूर करने के लिए स्टेंट लगाने की जरूरत होने में काफी अंतर है। इलाज का फैसला मरीज के लक्षणों, ब्लॉकेज की जगह, उसकी गंभीरता और दिल तक खून पहुंचने की स्थिति को देखकर किया जाता है।

दिल की धमनियों में ब्लॉकेज क्यों होता है

दिल को सही तरीके से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन और खून की जरूरत होती है। यह खून दिल की धमनियों के जरिए हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचता है। जब इन धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल, वसा और दूसरे पदार्थ जमा होने लगते हैं, तो प्लाक बनने लगता है। समय के साथ इससे धमनियां संकरी हो सकती हैं और दिल तक खून का प्रवाह कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों को सीने में दर्द या दबाव महसूस होता है, सांस फूलने लगती है या शारीरिक मेहनत करने पर जल्दी थकान होने लगती है। अगर किसी धमनी में अचानक गंभीर रुकावट आ जाए, तो हार्ट अटैक भी हो सकता है। हालांकि, कुछ मरीजों में ब्लॉकेज होने के बावजूद शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

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क्या हर ब्लॉकेज में स्टेंट लगवाना जरूरी है

इस सवाल का जवाब है- नहीं। एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि हर मरीज को स्टेंट लगवाना ही पड़ेगा। स्टेंट एक छोटी जालीदार ट्यूब होती है, जिसे दिल की संकरी धमनी के अंदर लगाया जाता है, ताकि खून का प्रवाह बेहतर हो सके। स्टेंट लगाने का फैसला सिर्फ इस बात पर नहीं होता कि धमनी कितने प्रतिशत तक बंद है। डॉक्टर यह भी देखते हैं कि मरीज को कितनी परेशानी हो रही है, ब्लॉकेज किस जगह पर है, उससे खून के प्रवाह पर कितना असर पड़ रहा है और मरीज की दूसरी बीमारियां क्या हैं। कुछ मरीजों में दवाओं, खानपान में सुधार, नियमित शारीरिक गतिविधि और अन्य जीवनशैली बदलावों से बीमारी को अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, कुछ स्थितियों में स्टेंट या बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

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हार्ट अटैक के दौरान कब जान बचा सकता है स्टेंट

हार्ट अटैक के दौरान अगर दिल की किसी प्रमुख धमनी में अचानक गंभीर रुकावट आ जाती है, तो जल्द से जल्द खून का प्रवाह बहाल करना बेहद जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में एंजियोप्लास्टी के जरिए धमनी को खोला जाता है और जरूरत पड़ने पर स्टेंट लगाया जाता है। समय पर इलाज मिलने से दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है और मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है। कुछ तरह के हार्ट अटैक में अस्पताल पहुंचने के बाद प्राथमिक एंजियोप्लास्टी को जल्द से जल्द करना जरूरी होता है। जहां संभव हो, कुछ विशेष हार्ट अटैक में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने से लेकर धमनी खोलने तक का लक्ष्य लगभग 90 मिनट रखा जाता है। हालांकि, सही समय मरीज की स्थिति और अस्पताल की सुविधाओं के आधार पर तय होता है। अगर किसी व्यक्ति को सीने में तेज या लगातार दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, अचानक कमजोरी या दर्द के साथ मतली जैसे लक्षण हों, तो इसे गैस या सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

सीने में दर्द होने पर क्या तुरंत स्टेंट लगाना पड़ता है

सीने में दर्द होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि मरीज को तुरंत स्टेंट की जरूरत है। सीने में दर्द के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन अगर दर्द दिल से जुड़ा है, तो उसकी गंभीरता का आकलन करना जरूरी है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों के साथ ईसीजी, खून की जांच और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों की मदद से स्थिति समझते हैं। अगर जांच में हार्ट अटैक या दिल को गंभीर नुकसान पहुंचने के संकेत मिलते हैं, तो तुरंत इलाज की जरूरत हो सकती है।
इसके अलावा, लगातार बढ़ता सीने का दर्द, ब्लड प्रेशर का अस्थिर होना, दिल की धड़कन में गंभीर गड़बड़ी या दिल की पंप करने की क्षमता कमजोर होने जैसे संकेतों को भी गंभीरता से लिया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में इलाज में देरी खतरनाक हो सकती है।

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किन मरीजों में बाईपास सर्जरी बेहतर विकल्प हो सकती है

कुछ मरीजों में ब्लॉकेज की स्थिति ऐसी होती है कि केवल स्टेंट लगाने के बजाय बाईपास सर्जरी ज्यादा उपयुक्त विकल्प हो सकती है। उदाहरण के लिए, दिल की बाईं मुख्य धमनी यानी लेफ्ट मेन आर्टरी में गंभीर ब्लॉकेज, कई प्रमुख धमनियों में रुकावट या दिल की पंपिंग क्षमता कम होने पर डॉक्टर सभी विकल्पों पर विचार करते हैं। बाईपास सर्जरी में खून के प्रवाह के लिए एक नया रास्ता बनाया जाता है, ताकि वह ब्लॉकेज वाले हिस्से को पार करके दिल की मांसपेशियों तक पहुंच सके। हालांकि, हर मरीज के लिए सर्जरी जरूरी नहीं होती। स्टेंट, बाईपास और दवाओं में से कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा, यह ब्लॉकेज के प्रकार, मरीज की सेहत और दूसरे जोखिमों पर निर्भर करता है।

क्या एंजियोग्राफी रिपोर्ट देखकर ही फैसला लेना सही है

एंजियोग्राफी से डॉक्टरों को दिल की धमनियों में मौजूद ब्लॉकेज की जगह और उसकी गंभीरता समझने में मदद मिलती है। लेकिन इलाज का फैसला केवल इसी रिपोर्ट के आधार पर नहीं होना चाहिए। कई बार यह जानने के लिए अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ती है कि ब्लॉकेज वास्तव में खून के प्रवाह को कितना प्रभावित कर रहा है। इसके लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार एफएफआर या आईएफआर जैसी जांचों की मदद ले सकते हैं। मरीज के लक्षण, पहले से मौजूद बीमारियां, दिल की कार्यक्षमता और इलाज से मिलने वाले संभावित लाभ व जोखिम भी महत्वपूर्ण होते हैं। जटिल मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट और कार्डियक सर्जन मिलकर मरीज के लिए बेहतर विकल्प तय कर सकते हैं। मरीज और उसके परिवार को भी इलाज के विकल्पों, उनके फायदे और संभावित जोखिमों के बारे में डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए।

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दिल के मरीजों के लिए जरूरी सलाह

दिल की धमनियों में ब्लॉकेज होने पर घबराने के बजाय सही जानकारी और समय पर इलाज पर ध्यान देना चाहिए। हर मरीज को स्टेंट की जरूरत नहीं होती, लेकिन जहां स्टेंट जरूरी हो, वहां डर या गलतफहमी के कारण इलाज टालना नुकसानदायक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दिल की दवाएं बंद न करें। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। संतुलित भोजन लें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करें। धूम्रपान से बचें और नियमित जांच करवाते रहें। सीने में लगातार दर्द या हार्ट अटैक के संकेत दिखने पर तुरंत आपातकालीन मदद लें।

सबसे जरूरी बात: स्टेंट लगवाने या न लगवाने का फैसला केवल एंजियोग्राफी रिपोर्ट देखकर खुद नहीं करना चाहिए। अपने कार्डियोलॉजिस्ट से ब्लॉकेज की स्थिति, इलाज के विकल्पों और उनके फायदे-नुकसान पर चर्चा करें। सही समय पर सही इलाज ही दिल को सुरक्षित रखने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।  

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