नारी डेस्क: कुछ लोग मुश्किल हालात देखकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो इन्हीं परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लेते हैं। केरल की श्रीधन्या सुरेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वायनाड के कुरिचिया आदिवासी समुदाय से आने वाली श्रीधन्या ने बेहद सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई की और आगे चलकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनीं। आज श्रीधन्या की पहचान सिर्फ एक IAS अधिकारी के तौर पर नहीं है। सितंबर 2026 में उन्होंने कासरगोड के जिला कलेक्टर का पद संभाला। इसके साथ ही वह केरल में अनुसूचित जनजाति समुदाय से जिला कलेक्टर बनने वाली पहली महिला बनीं।
बचपन में स्कूल जाने के लिए तय करती थीं 4 किलोमीटर का सफर
श्रीधन्या का बचपन वायनाड के एक आदिवासी इलाके में बीता। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे, जबकि उनकी मां ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई को हमेशा महत्व दिया। श्रीधन्या को स्कूल जाने के लिए रोज करीब 4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सरकारी स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की।
पढ़ाई के बाद शुरू किया नौकरी का सफर
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद श्रीधन्या ने कोझिकोड के सेंट जोसेफ कॉलेज, देवगिरी से जूलॉजी में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने कालीकट यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वायनाड में अनुसूचित जाति-जनजाति विकास विभाग के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया। इसी दौरान उन्हें प्रशासन और सरकारी व्यवस्था को करीब से समझने का मौका मिला।
अधिकारी के काम से मिली सिविल सेवा की प्रेरणा
श्रीधन्या ने एक इंटरव्यू में बताया था कि सरकारी अधिकारियों के काम और उनके प्रति लोगों के सम्मान ने उन्हें काफी प्रभावित किया। खास तौर पर वायनाड में सब-कलेक्टर रहे श्रीराम सांबासिवा राव के काम को देखकर उनके मन में भी सिविल सेवा में जाने की इच्छा मजबूत हुई। इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। उनका पहला प्रयास 2017 में सफल नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा तैयारी में जुट गईं।
UPSC इंटरव्यू के लिए दिल्ली जाने तक के नहीं थे पैसे
लिखित परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद श्रीधन्या का इंटरव्यू के लिए चयन हुआ। लेकिन यहां उनके सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह उन्हें दिल्ली भेजने का खर्च उठा सके। जब उनके दोस्तों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने मदद के लिए पैसे जुटाए। श्रीधन्या ने खुद बताया था कि दिल्ली जाने के लिए करीब 40 हजार रुपये की जरूरत थी, जिसमें कुछ रकम दोस्तों से उधार ली गई थी और कुछ शुभचिंतकों ने मदद की थी। इसी मदद के सहारे वह इंटरव्यू देने दिल्ली पहुंचीं।
2018 में हासिल की 410वीं रैंक
मेहनत और लगातार प्रयास के बाद श्रीधन्या ने 2018 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 410 हासिल की और इसके साथ ही केरल के आदिवासी समुदाय से UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाली पहली व्यक्ति बनीं। वह 2019 बैच की IAS अधिकारी हैं।
उनकी सफलता के बाद उनका प्रशासनिक करियर शुरू हुआ। उन्होंने कोझिकोड में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर काम किया। इसके बाद पेरिंथलमन्ना की सब-कलेक्टर और एसडीएम समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह रजिस्ट्रेशन विभाग में इंस्पेक्टर जनरल और फूड सेफ्टी कमिश्नर जैसे पदों पर भी काम कर चुकी हैं।
अब कासरगोड की जिला कलेक्टर हैं श्रीधन्या
श्रीधन्या के सफर में सितंबर 2026 में एक और बड़ा पड़ाव आया। उन्होंने 16 सितंबर को कासरगोड की जिला कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला। इस पद पर पहुंचकर उन्होंने केरल में एक और इतिहास रचा। वह राज्य के अनुसूचित जनजाति समुदाय से जिला कलेक्टर बनने वाली पहली महिला हैं। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कासरगोड के विकास के लिए लोगों, सरकारी विभागों और मीडिया से सहयोग की अपील की। उन्होंने जिले में पर्यटन, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में विकास की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
संघर्ष से जिम्मेदारी तक का सफर
श्रीधन्या की कहानी सिर्फ UPSC पास करने तक सीमित नहीं है। 4 किलोमीटर पैदल स्कूल जाने से लेकर आर्थिक परेशानियों के बीच पढ़ाई जारी रखने और इंटरव्यू के लिए दोस्तों से आर्थिक मदद लेने तक, उनके सफर में कई मुश्किल पड़ाव आए। आज वही श्रीधन्या एक बड़े जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनका सफर दिखाता है कि संसाधनों की कमी किसी व्यक्ति के रास्ते में मुश्किल जरूर खड़ी कर सकती है, लेकिन लगातार मेहनत और सही अवसर मिलने पर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया जा सकता है।