नारी डेस्कः लिवर शरीर का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है। इसे शरीर की 'केमिकल फैक्ट्री' भी कहा जाता है। खून में मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थों और टॉक्सिन को प्रोसेस करता है। लिवर पित्त (Bile) बनाता है जो खासकर फैट को पचाने में मदद करता है। भोजन से मिले ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करता है और जरूरत पड़ने पर ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करता है। शरीर में खून जमने के लिए जरूरी कई प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है।
कई दवाओं और शरीर में बनने वाले रसायनों को प्रोसेस करने में मदद करता है। लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनने वाले बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयरन और कुछ विटामिन जैसे A, D, E, K और B12 को स्टोर करने में मदद करता है इसीलिए जब लिवर की कार्यक्षमता बहुत कम होने लगती है तो पाचन, खून का जमना, ऊर्जा, शरीर में पानी का संतुलन और दिमाग की कार्यप्रणाली तक प्रभावित हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति का लिवर बहुत कमजोर हो गया है तो इसे केवल कमजोरी मानकर घरेलू उपाय करना ठीक नहीं है। लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के भी रह सकती है और लक्षण तब दिख सकते हैं जब नुकसान काफी बढ़ चुका हो।
लिवर कमजोर होने पर शरीर कौन-से संकेत दे सकता है?
लगातार थकान और कमजोरी
भूख कम लगना
बिना कोशिश वजन कम होना
जी मिचलाना या उल्टी
त्वचा में खुजली
दाईं ऊपरी तरफ पेट में हल्का दर्द या भारीपन
मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन

बीमारी बढ़ने पर आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
पेट में पानी भरना और पेट फूलना।
पैरों, टखनों में सूजन।
आसानी से नीला पड़ना या खून निकलना।
पेशाब का रंग गहरा होना।
सोचने में परेशानी, भ्रम, व्यवहार में बदलाव या बहुत ज्यादा नींद
गंभीर स्थिति में अंदरूनी रक्तस्राव भी हो सकता है।
इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
लिवर खराब होने के कई कारण हो सकते हैं। प्रमुख कारणों में फैटी लिवर, लंबे समय तक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस B या C, और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां शामिल हैं। कुछ दवाइयां या हर्बल/आयुर्वेदिक सप्लीमेंट भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। फैटी लिवर का संबंध अधिक वजन, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज से भी हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
अगर अभी लिवर की बीमारी नहीं है, तो जोखिम कम करने के लिए शराब से बचें।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखें।
डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं को नियंत्रित रखें।
बिना डॉक्टर की सलाह के painkillers, supplements या herbal/आयुर्वेदिक दवाएं न लें।
हेपेटाइटिस की जांच और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए टीकाकरण पर ध्यान दें।
संतुलित भोजन लें और बहुत अधिक मीठे पेय/अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन से बचें।
अगर लिवर की बीमारी पहले से है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराएं।
एक जरूरी बात: अगर किसी व्यक्ति को पहले से सिरोसिस या लिवर फेलियर बताया गया है, तो केवल खान-पान बदलना पर्याप्त नहीं होता। बीमारी की गंभीरता के अनुसार दवाएं, जटिलताओं का इलाज और कुछ मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।