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राहु दोष से हैं परेशान, दुर्गा अष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा, जानें प्रिय भोग और विधि

  • Edited By Monika,
  • Updated: 17 Oct, 2026 05:26 PM
राहु दोष से हैं परेशान, दुर्गा अष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा, जानें प्रिय भोग और विधि

नारी डेस्क : शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन दुर्गा अष्टमी और कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन भक्त माता को सफेद फूल, नारियल, हलवा, पूरी और काले चने का भोग अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मां महागौरी अपने भक्तों के कष्ट दूर करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। आइए जानते हैं मां महागौरी का स्वरूप, उनकी पौराणिक कथा, प्रिय भोग, पूजा विधि और मंत्र।

मां महागौरी का स्वरूप

मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर बताया गया है। उनके वस्त्र और आभूषण भी सफेद रंग के हैं। उनका वाहन बैल है, इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। मां महागौरी की चार भुजाएं हैं। उनके दाहिने ओर के एक हाथ में अभय मुद्रा और दूसरे में त्रिशूल है। बाईं ओर के एक हाथ में डमरू और दूसरा हाथ वर मुद्रा में है। मां का यह स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है।

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मां महागौरी की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तप करने के कारण उनका शरीर धूल और मिट्टी से ढक गया था और उनका रंग सांवला पड़ गया था। कथा के अनुसार, भगवान शिव ने गंगाजल से उनके शरीर को स्वच्छ किया, जिसके बाद उनका स्वरूप अत्यंत गौर और तेजस्वी हो गया। तभी से वे मां महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। भक्त मां के इस स्वरूप की पूजा करके सुख, शांति और सौभाग्य की कामना करते हैं।

मां महागौरी का प्रिय भोग, फूल और रंग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को सफेद रंग प्रिय है। इसलिए उनकी पूजा में सफेद फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त माता को नारियल, नारियल से बनी मिठाइयां और हलवा-पूरी का भोग भी लगाते हैं। दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन के दौरान हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनाने की परंपरा है। भक्त श्रद्धापूर्वक माता को भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद बांटते हैं।

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मां महागौरी की पूजा विधि

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें।
मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके दीपक जलाएं।
माता को सफेद फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
नारियल, हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाएं।
मां महागौरी के मंत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
अपनी परंपरा के अनुसार कन्या पूजन करें और कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा या उपहार दें।

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राहु दोष से जुड़ी धार्मिक मान्यता

ज्योतिषीय मान्यताओं में मां दुर्गा की पूजा को राहु से जुड़ी परेशानियों के समय भी शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में मां महागौरी की आराधना को मन की शांति और बाधाओं से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। 

मां महागौरी के प्रिय मंत्र

सरल मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

मां दुर्गा की स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप कर सकते हैं। 108 बार जाप करना कई पूजा परंपराओं में प्रचलित है।

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दुर्गा अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन को श्रद्धा, सेवा और शक्ति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता से परिवार की सुख-समृद्धि और सभी के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

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