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पैरों पर दिखती हैं नीली-हरी या बैंगनी धारियां? जानिए ठीक कैसे होगी यह दिक्कत

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 17 Oct, 2026 02:27 PM
पैरों पर दिखती हैं नीली-हरी या बैंगनी धारियां? जानिए ठीक कैसे होगी यह दिक्कत

 नारी डेस्क:   क्या आपने कभी अपने पैरों पर नीली, हरी या बैंगनी रंग की उभरी हुई नसें देखी हैं? कई बार ये नसें टेढ़ी-मेढ़ी दिखाई देती हैं और पैरों में भारीपन, दर्द या सूजन भी महसूस होने लगती है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins) की समस्या हो सकती है। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के मुताबिक, यह परेशानी मुख्य रूप से पैरों की नसों में देखने को मिलती है। लंबे समय तक खड़े रहने, बढ़ती उम्र, गर्भावस्था और परिवार में इस समस्या का इतिहास होने से इसका खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वैरिकोज वेन्स क्या हैं, इनके लक्षण कैसे पहचानें और इस समस्या का इलाज किस तरह किया जाता है।

क्या होती है वैरिकोज वेन्स की समस्या

हमारी नसें शरीर के अलग-अलग हिस्सों से खून को वापस दिल तक पहुंचाने का काम करती हैं। पैरों की नसों में छोटे-छोटे वाल्व होते हैं, जो खून को गलत दिशा में बहने से रोकने में मदद करते हैं। जब ये वाल्व कमजोर हो जाते हैं या ठीक से काम नहीं करते, तो खून नसों में जमा होने लगता है। इससे नसों पर दबाव बढ़ता है और वे फैलकर उभरी हुई दिखाई देने लगती हैं। इसी स्थिति को वैरिकोज वेन्स कहा जाता है। यह समस्या आमतौर पर पैरों और टखनों में दिखाई देती है। कुछ लोगों में केवल नसें उभरी हुई नजर आती हैं, जबकि दूसरों को दर्द, खुजली, भारीपन और सूजन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। हालांकि, त्वचा पर दिखाई देने वाली हर नीली या हरी नस वैरिकोज वेन्स नहीं होती। कुछ नसें त्वचा के नीचे सामान्य रूप से भी दिखाई दे सकती हैं।

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पैरों पर कहां दिखाई देती हैं ऐसी नसें

वैरिकोज वेन्स में नसें अक्सर पिंडलियों के पीछे, पैरों के निचले हिस्से और टखनों के आसपास नजर आती हैं। इनका रंग नीला, हरा या बैंगनी हो सकता है। कई बार नसें त्वचा के ऊपर उभरी हुई और मुड़ी-तुड़ी दिखाई देती हैं। अगर नसों के साथ लगातार दर्द, सूजन या त्वचा के रंग में बदलाव भी नजर आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर जांच करके बता सकते हैं कि यह वैरिकोज वेन्स है या किसी दूसरी समस्या के कारण ऐसा हो रहा है।

वैरिकोज वेन्स के क्या-क्या लक्षण होते हैं

हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों को केवल नसों के उभरे होने की परेशानी होती है, जबकि कुछ में दूसरे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

पैरों में दर्द: लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने के बाद पैरों में दर्द या बेचैनी महसूस हो सकती है।

भारीपन महसूस होना: ऐसा लग सकता है जैसे पैरों में थकान या खिंचाव बना हुआ है।

सूजन आना: खासकर टखनों और पैरों के निचले हिस्से में सूजन दिखाई दे सकती है।

खुजली होना: प्रभावित नसों के आसपास की त्वचा में खुजली या जलन महसूस हो सकती है।

त्वचा का रंग बदलना: लंबे समय तक समस्या रहने पर टखनों के आसपास की त्वचा भूरी या गहरी हो सकती है।

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त्वचा का रूखा होना: प्रभावित हिस्से में त्वचा रूखी, संवेदनशील या पपड़ीदार हो सकती है।

घाव बनना: गंभीर मामलों में टखनों के पास ऐसा घाव बन सकता है, जिसे भरने में काफी समय लग सकता है।

कई लोगों में ये लक्षण दिन के आखिर में या लंबे समय तक खड़े रहने के बाद ज्यादा महसूस होते हैं। पैरों को कुछ देर ऊंचा रखने से आराम मिल सकता है, लेकिन लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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किन लोगों में वैरिकोज वेन्स का खतरा ज्यादा होता है

कुछ लोगों में इस समस्या के विकसित होने की आशंका दूसरों के मुकाबले अधिक हो सकती है। इसके प्रमुख कारण हैं:

परिवार में पहले से समस्या होना: अगर माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों को वैरिकोज वेन्स है, तो आपको भी इसका खतरा बढ़ सकता है। परिवार में इसकी मौजूदगी का मतलब यह नहीं कि आपको भी यह समस्या जरूर होगी।

बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ नसों के वाल्व कमजोर पड़ सकते हैं। इससे खून के प्रवाह पर असर पड़ने और नसों के फैलने की आशंका बढ़ सकती है।

गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है और हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। बढ़ते गर्भाशय के कारण पैरों से खून की वापसी पर दबाव पड़ सकता है। इस वजह से वैरिकोज वेन्स दिखाई दे सकती हैं।

 लंबे समय तक खड़े या बैठे रहना: जिन लोगों को काम के कारण लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना पड़ता है, उनमें पैरों की नसों से जुड़ी परेशानी का खतरा बढ़ सकता है।

शरीर का वजन ज्यादा होना: अतिरिक्त वजन पैरों की नसों पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे लक्षण बढ़ने की आशंका रहती है।

 महिलाओं में हार्मोनल बदलाव: गर्भावस्था और कुछ अन्य हार्मोनल बदलाव नसों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, वैरिकोज वेन्स पुरुषों में भी हो सकती हैं।

क्या वैरिकोज वेन्स की समस्या हमेशा बनी रहती है

वैरिकोज वेन्स अक्सर लंबे समय तक रहने वाली समस्या है। इसके लक्षण कभी कम तो कभी ज्यादा हो सकते हैं। अगर गर्भावस्था के दौरान नसें उभरने लगती हैं, तो डिलीवरी के बाद उनमें कुछ सुधार हो सकता है। हालांकि, हर महिला में ऐसा नहीं होता और नसें पूरी तरह सामान्य हों, यह भी जरूरी नहीं है। भविष्य में गर्भावस्था होने पर यह समस्या दोबारा उभर सकती है। अगर वैरिकोज वेन्स के कारण दर्द, सूजन या त्वचा में बदलाव हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। समय पर इलाज कराने से लक्षणों को नियंत्रित करने और जटिलताओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

वैरिकोज वेन्स का इलाज कैसे किया जाता है

वैरिकोज वेन्स का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है और मरीज को कौन-कौन से लक्षण हो रहे हैं। हर व्यक्ति को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।

पैरों को ऊंचा रखना: दिन में कुछ समय पैरों को दिल के स्तर से ऊपर रखने से सूजन और भारीपन में राहत मिल सकती है। खासकर लंबे समय तक खड़े रहने के बाद ऐसा करना फायदेमंद हो सकता है।

 नियमित रूप से चलना: हल्की शारीरिक गतिविधि और पैदल चलने से पैरों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। इससे नसों के जरिए खून को वापस दिल तक पहुंचाने में मदद मिलती है। लंबे समय तक लगातार बैठे या खड़े रहने से बचें।

कंप्रेशन स्टॉकिंग्स: ये विशेष प्रकार के मोजे होते हैं, जो पैरों पर नियंत्रित दबाव डालते हैं। डॉक्टर की सलाह पर इनका इस्तेमाल करने से कुछ लोगों में दर्द और सूजन कम हो सकती है। इन्हें पहनने से पहले डॉक्टर से पूछना बेहतर है, खासकर अगर पैरों की धमनियों में खून के प्रवाह की समस्या हो।

स्क्लेरोथेरेपी: इस प्रक्रिया में प्रभावित नस के अंदर एक विशेष दवा डाली जाती है, जिससे नस धीरे-धीरे बंद हो जाती है। इसका इस्तेमाल खास तरह की वैरिकोज वेन्स और छोटी प्रभावित नसों के इलाज में किया जाता है।

लेजर या रेडियोफ्रीक्वेंसी उपचार: कुछ मामलों में गर्मी की मदद से प्रभावित नस को बंद किया जाता है। इसे एंडोवेनस थर्मल एब्लेशन कहा जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर त्वचा पर बड़े चीरे की जरूरत के बिना की जा सकती है।

सर्जरी या अन्य प्रक्रियाएं: अगर नसों की समस्या गंभीर हो, बार-बार जटिलताएं हों या दूसरे उपचार से पर्याप्त लाभ न मिले, तो डॉक्टर सर्जरी अथवा अन्य प्रक्रियाओं की सलाह दे सकते हैं। उपचार का चुनाव नसों की स्थिति और जांच के नतीजों के आधार पर किया जाता है।

वैरिकोज वेन्स से बचाव के लिए क्या करें

हर मामले में वैरिकोज वेन्स को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें पैरों की सेहत बनाए रखने और लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। लंबे समय तक एक ही जगह खड़े या बैठे न रहें। बीच-बीच में थोड़ा चलें और पैरों को हिलाते रहें। नियमित रूप से पैदल चलने या डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्यायाम करने की आदत डालें। शरीर का वजन स्वस्थ सीमा में बनाए रखने की कोशिश करें। आराम करते समय पैरों को कुछ देर ऊंचा रखें। पैरों में लगातार सूजन, दर्द या त्वचा के रंग में बदलाव होने पर जांच कराएं। अगर परिवार में वैरिकोज वेन्स की समस्या रही है, तो लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अगर पैरों की नसों के आसपास अचानक तेज दर्द, लालिमा, गर्माहट या सूजन होने लगे, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें। ये खून का थक्का बनने जैसी समस्या के संकेत हो सकते हैं। यदि अचानक सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो या खून वाली खांसी आए, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

ध्यान दें: पैरों पर नीली या हरी नसें दिखाई देना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन नसों के उभरने के साथ दर्द, सूजन या त्वचा में बदलाव हो, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। सही जांच के बाद ही इलाज का उचित तरीका तय किया जा सकता है।
 

 

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