नारी डेस्क: नैनीताल के पास भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम आज देश-विदेश में प्रसिद्ध है। नीम करोली बाबा के इस आश्रम में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा के अनुयायियों में कई जानी-मानी हस्तियों के नाम भी लिए जाते हैं, जिसके चलते कैंची धाम की लोकप्रियता और बढ़ी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाबा नीम करोली से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं है? उत्तराखंड के भूमियाधार में स्थित हनुमान मंदिर और उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित उनका आश्रम भी उनके जीवन और साधना से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल माने जाते हैं। अगर आप शांत माहौल में कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो इन जगहों को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
कैंची धाम से क्यों अलग है भूमियाधार का मंदिर?
भूमियाधार का हनुमान मंदिर कैंची धाम की तुलना में काफी शांत जगह मानी जाती है। यह कैंची क्षेत्र से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है और पहाड़ी वातावरण के बीच स्थित है। मान्यता है कि नीम करोली बाबा का इस स्थान से भी आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। मंदिर में हनुमान जी के दर्शन और पूजा करने के बाद श्रद्धालु कुछ समय शांत बैठकर ध्यान और प्रार्थना कर सकते हैं। अगर आप बाबा से जुड़े स्थानों को सिर्फ घूमने के नजरिए से नहीं, बल्कि कुछ समय शांति से बिताने के लिए देख रहे हैं, तो भूमियाधार आपके यात्रा कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

यहां क्या करें
मंदिर पहुंचकर सबसे पहले हनुमान जी के दर्शन करें। इसके बाद मंदिर परिसर में कुछ समय शांत बैठ सकते हैं। बाबा से जुड़े किसी विशेष कक्ष या स्थान में प्रवेश की अनुमति स्थानीय व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन के नियमों पर निर्भर करती है, इसलिए वहां के पंडित या प्रबंधन से पहले जानकारी लेना बेहतर रहेगा। पहाड़ों के बीच शांत वातावरण इस जगह की खासियत है। कैंची धाम जैसी भीड़ न होने पर यहां आपको कुछ समय बिना जल्दबाजी के बिताने का मौका मिल सकता है।
वृंदावन में भी है नीम करोली बाबा का आश्रम
नीम करोली बाबा से जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण स्थान वृंदावन में है। यहीं उनका आश्रम और समाधि स्थल है। बाबा के अनुयायियों के लिए यह जगह विशेष महत्व रखती है।वृंदावन पहुंचने वाले श्रद्धालु बाबा के आश्रम में जाकर दर्शन और प्रार्थना कर सकते हैं। यहां का वातावरण कैंची धाम से अलग है। अगर आप धार्मिक यात्रा के साथ कुछ शांत समय बिताना चाहते हैं, तो वृंदावन के इस आश्रम को भी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। यहां जाने से पहले आश्रम के वर्तमान दर्शन समय और प्रवेश संबंधी नियमों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि व्यवस्थाएं समय के साथ बदल सकती हैं।
दिल्ली से बना सकते हैं एक दिन का ट्रिप
अगर आप दिल्ली या आसपास के इलाके से यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो वृंदावन जाना अपेक्षाकृत आसान है। एक दिन में नीम करोली बाबा के आश्रम और समाधि स्थल के दर्शन किए जा सकते हैं। हालांकि, अगर आप वृंदावन के दूसरे प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शन भी करना चाहते हैं, तो दो दिन का समय रखना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। इससे यात्रा भागदौड़ वाली नहीं होगी और आप आराम से अलग-अलग जगहों पर समय बिता सकेंगे।
कैंची धाम जाएं तो इन जगहों को भी रखें याद
कैंची धाम अपनी लोकप्रियता के कारण कई बार काफी व्यस्त रहता है। अगर आपका उद्देश्य नीम करोली बाबा से जुड़े अलग-अलग स्थानों को देखना और कुछ समय शांत वातावरण में बिताना है, तो भूमियाधार और वृंदावन को भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इन जगहों पर भीड़ कम होगी या किसी विशेष स्थान पर प्रवेश मिलेगा, यह दिन और स्थानीय व्यवस्था पर निर्भर कर सकता है। इसलिए यात्रा से पहले दर्शन और प्रवेश की जानकारी जरूर ले लें।

एक ट्रिप में कैसे करें प्लान
अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो वृंदावन का आश्रम एक दिन की यात्रा में शामिल किया जा सकता है। वहीं, कैंची धाम के साथ भूमियाधार को उत्तराखंड की यात्रा में जोड़ा जा सकता है। इस तरह नीम करोली बाबा से जुड़े अलग-अलग स्थानों को देखने के साथ आपको हर जगह के अलग माहौल और आध्यात्मिक परंपरा को करीब से समझने का मौका मिलेगा। सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसी जगहों पर यात्रा के दौरान स्थानीय नियमों और आश्रम की व्यवस्था का सम्मान करें और ध्यान के लिए मिलने वाले स्थानों को पर्यटन स्थल की तरह नहीं, बल्कि श्रद्धा के स्थान के रूप में देखें।