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Navratri के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें प्रिय भोग, पूजा विधि और मंत्र

  • Edited By Monika,
  • Updated: 11 Oct, 2026 06:08 PM
Navratri के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें प्रिय भोग, पूजा विधि और मंत्र

नारी डेस्क : शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, त्याग, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना करने से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और संयम के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए। नवरात्रि के इस पावन दिन पर भक्त मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान देवी के मंत्रों का जाप और आरती करने की भी परंपरा है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, प्रिय भोग, पूजा विधि और उनके शक्तिशाली मंत्र।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कैसा है?

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में मां ब्रह्मचारिणी का दूसरा स्थान है। उनके नाम का अर्थ तप, साधना और ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलने वाली देवी से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप शांत, सरल और तेजस्वी माना जाता है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं। उनके दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। जप की माला भक्ति और साधना का प्रतीक है, जबकि कमंडल त्याग, सादगी और संयम का संदेश देता है। मां का यह स्वरूप भक्तों को धैर्य रखने, मन को शांत रखने और कठिन परिस्थितियों में भी अपने संकल्प पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

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मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, शक्कर और फल अर्पित करने की परंपरा है। कई स्थानों पर देवी को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग भी लगाया जाता है। कुछ भक्त पंचामृत अर्पित करके भी मां की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति होती है। भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है।

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें।
पूजा की सरल विधि इस प्रकार है
पूजा की तैयारी करें: पूजा स्थल की सफाई करें और मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
दीपक जलाएं: मां के सामने दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें।
फूल और अक्षत अर्पित करें: देवी को फूल, अक्षत, कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक चढ़ाएं।
प्रिय भोग लगाएं: मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, शक्कर, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई अर्पित करें।
मंत्रों का जाप करें: मां के ध्यान मंत्र और सरल मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
कथा और आरती करें: मां ब्रह्मचारिणी की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में उनकी आरती करें।
प्रार्थना करें: पूजा के अंत में परिवार की सुख-शांति और जीवन में धैर्य व सद्बुद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।
पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और मन की एकाग्रता मानी जाती है। अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार भी पूजा की जा सकती है।

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मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान इस ध्यान मंत्र का जाप किया जाता है
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
इस मंत्र के माध्यम से मां ब्रह्मचारिणी से कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।

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मां ब्रह्मचारिणी का सरल मंत्र
मां की आराधना के लिए इस सरल मंत्र का जाप भी किया जा सकता है
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हमें तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का महत्व समझाती है।

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