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सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मैनेजर के केस का शाहरुख खान के बेटे से भी है कनेक्शन,  वकील का दावा

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 14 Oct, 2026 05:08 PM
सुशांत सिंह राजपूत और उनकी मैनेजर के केस का शाहरुख खान के बेटे से भी है कनेक्शन,  वकील का दावा

नारी डेस्क: दिशा सालियान की मौत की चल रही जांच में एक बड़ा मोड़ आया है। मृतका के परिवार की ओर से पेश हो रहे वकील नीलेश ओझा ने जांच की दिशा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। CBI द्वारा जांच अपने हाथ में लेने के एक महीने बाद, ओझा ने दावा किया कि जांच में एक गहरी साज़िश का पता चला है जो दिशा सालियान केस को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत और हाई-प्रोफाइल आर्यन खान ड्रग्स केस से जोड़ती है।

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वकील ने सौंपे सीबीआई कौ सौंपे  डिजिटल सबूत

वकील ओझा ने आज पुष्टि की कि उन्होंने औपचारिक रूप से नए, "महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत" सौंपे हैं जिनमें एक पेन ड्राइव, वीडियो सबूत, 1 जून से 8 जून 2020 तक के डिजिटल रिकॉर्ड और कई अहम गवाहों (जैसे शिवानी शर्मा, जिनकी उस दौरान सोशल मीडिया एक्टिविटी की अब जांच हो रही है) से जुड़ी जानकारी शामिल है। मुंबई में ANI से बात करते हुए, वकील ओझा ने कहा कि जांच एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है जहां कई हाई-प्रोफाइल मामले आपस में जुड़ते हैं। उन्होंने कहा- "हमने CBI को ऐसे सबूत दिए हैं जो साबित करते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान के केस कैसे जुड़े हैं। कॉल लॉग और टावर लोकेशन समेत डिजिटल सबूत दिखाते हैं कि जांच एजेंसियां ​​आदित्य ठाकरे और रिया चक्रवर्ती जैसे अहम लोगों के करीब पहुंच रही थीं, तभी कथित तौर पर एक जवाबी साज़िश रची गई।"


लोगों को गुमराह करने का आरोप

कथित साज़िश के दायरे के बारे में बताते हुए, ओझा ने आगे दावा किया कि शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस से जुड़ा विवाद जानबूझकर ध्यान भटकाने के लिए खड़ा किया गया था। उन्होंने कहा- "हमने जो सबूत सौंपे हैं, उनमें बयान और... पूजा ददलानी और दूसरे संबंधित लोगों से मिले रिकॉर्ड, वानखेड़े पर लगे रिश्वत के आरोपों को गलत साबित करते हैं। ओझा ने आरोप लगाया,-"यह कुछ बड़े अधिकारियों की सोची-समझी साज़िश थी, जिसका मकसद रसूखदार लोगों को बचाना और दिशा सालियन व सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच को पटरी से उतारना था।" कानूनी सलाहकार ने कहा कि उनकी टीम ने सीनियर अधिकारियों से जुड़े 'बेनामी लेन-देन' और पेशेवर कदाचार के बारे में पक्के सबूत जुटाए हैं। ओझा के मुताबिक, इस साज़िश में सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल और सरकारी फंड का गबन शामिल था - ये ऐसे अपराध हैं जिनके लिए 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' और 'भारतीय दंड संहिता' (IPC) की अलग-अलग धाराओं के तहत सज़ा हो सकती है।

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अफसरों और पुलिस पर भी उठाए सवाल

चल रही जांच की रफ़्तार को लेकर लोगों की चिंताओं पर बात करते हुए, वकील ओझा ने कहा कि अभी की खामोशी को कोई कार्रवाई न होने जैसा न समझा जाए; उन्होंने मौजूदा दौर को "तूफान से पहले की शांति" बताया। उन्होंने कहा- "यह बहुत संवेदनशील मामला है जिसमें पुलिस कमिश्नर रैंक के अधिकारी और बड़े राजनेता जैसे ताकतवर लोग शामिल हैं। हाई कोर्ट ने CBI को हर पहलू की बारीकी से जांच करने का आदेश दिया है। हम एक बहुत मज़बूत आधार तैयार कर रहे हैं। हमने जान-बूझकर कुछ 'ट्रंप कार्ड' (अहम सबूत) अभी रोक कर रखे हैं, जिन्हें सही समय आने पर कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।" हालांकि CBI ने आज सौंपे गए नए डिजिटल सबूतों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन परिवार के वकील के इन सनसनीखेज खुलासों ने एजेंसी की जांच का दायरा और महत्व काफी बढ़ा दिया है। 

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