नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और नींद की कमी लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनते जा रहे हैं। काम का दबाव, पढ़ाई, देर रात तक मोबाइल चलाना और अनियमित लाइफस्टाइल के कारण कई लोग ठीक से सो नहीं पाते। शुरुआत में इसका असर थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ेपन के रूप में दिखाई देता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह परेशानी ज्यादा गंभीर हो सकती है। खासकर मिर्गी से पीड़ित लोगों में लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेना दौरे पड़ने की आशंका बढ़ा सकता है। क्या तनाव और नींद की कमी वाकई मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकती है और ऐसे में परिवार को मरीज का ध्यान कैसे रखना चाहिए?
क्या है मिर्गी और क्यों पड़ते हैं दौरे?
मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें दिमाग की सामान्य विद्युत गतिविधि में अचानक असामान्य बदलाव होने के कारण व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। दौरे के दौरान कुछ लोगों का शरीर अकड़ने लगता है, हाथ-पैर झटके लेने लगते हैं या वे कुछ समय के लिए बेहोश हो सकते हैं। हालांकि, हर मरीज में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। यहां एक बात समझना जरूरी है कि तनाव और नींद की कमी अपने आप में मिर्गी की बीमारी पैदा नहीं करते। लेकिन जिन लोगों को पहले से मिर्गी है, उनमें ये दोनों चीजें दौरे को ट्रिगर कर सकती हैं। इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है।

नींद की कमी से क्यों बढ़ सकती है दौरे की आशंका?
अच्छी नींद हमारे दिमाग को सही तरीके से काम करने में मदद करती है। जब कोई व्यक्ति लगातार कम सोता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो मस्तिष्क की सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। मिर्गी के मरीजों में नींद की कमी दौरे पड़ने की आशंका बढ़ा सकती है। इसलिए ऐसे मरीजों के लिए रोजाना पर्याप्त नींद लेना और सोने-जागने का समय तय रखना जरूरी है। देर रात तक जागने और बार-बार नींद का समय बदलने से बचना चाहिए।
तनाव भी बन सकता है दौरे की वजह
लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहने से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। तनाव के कारण कई लोगों की नींद खराब हो जाती है, भूख और दिनचर्या में बदलाव आने लगता है। कुछ मरीज तनाव की वजह से समय पर खाना नहीं खाते या अपनी दवाइयां लेना भूल जाते हैं। ये सभी बातें मिलकर मिर्गी के मरीजों में दौरे पड़ने का जोखिम बढ़ा सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में तनाव का असर एक जैसा नहीं होता। इसलिए मरीज को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि किन परिस्थितियों में उसे ज्यादा परेशानी होती है और डॉक्टर की सलाह से अपनी दिनचर्या में जरूरी बदलाव करने चाहिए।
मिर्गी के मरीजों का परिवार कैसे रखे ध्यान
मिर्गी के मरीज की देखभाल में परिवार की भूमिका काफी अहम होती है। सिर्फ दवाइयां देना ही काफी नहीं है, बल्कि उसकी रोजमर्रा की आदतों और मानसिक स्थिति का ध्यान रखना भी जरूरी है।
नींद पूरी करवाएं: मरीज को रोजाना एक तय समय पर सोने और जागने की आदत डालने में मदद करें। पर्याप्त नींद लेना जरूरी है।

तनाव कम करने में मदद करें: मरीज पर अनावश्यक दबाव न डालें। उसे आराम करने, पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताने और तनाव कम करने के लिए प्रोत्साहित करें।
दवाइयों का रखें ध्यान: डॉक्टर ने जिस समय और जितनी खुराक में दवा लेने को कहा है, उसका पालन करना जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक बदलें।
नियमित दिनचर्या बनाए रखें: समय पर भोजन करना, पर्याप्त आराम करना और डॉक्टर की बताई सावधानियों का पालन करना मरीज के लिए फायदेमंद हो सकता है।
दौरा पड़ने पर परिवार को क्या करना चाहिए?
अगर घर में किसी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ता है, तो घबराने के बजाय उसकी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। दौरे के दौरान ये सावधानियां अपनाएं मरीज को आसपास की किसी सुरक्षित और समतल जगह पर रहने दें। उसके आसपास मौजूद नुकीली, कठोर या खतरनाक चीजों को हटा दें। अगर संभव हो तो उसे धीरे से करवट दिलाएं, ताकि मुंह से निकलने वाली लार बाहर आ सके और सांस लेने में परेशानी न हो। मरीज को जबरदस्ती पकड़कर उसके झटके रोकने की कोशिश न करें।उसके मुंह में चम्मच, पानी, दवा या कोई दूसरी चीज बिल्कुल न डालें। दौरा शुरू होने का समय नोट करें और मरीज के होश में आने तक उसके पास रहें। अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक चलता है, एक के बाद एक दौरे पड़ते हैं और बीच में मरीज को होश नहीं आता, सांस लेने में परेशानी होती है या चोट लग जाती है, तो तुरंत मेडिकल मदद लें। पहली बार दौरा पड़ने पर भी बिना देर किए चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

पहली बार दौरा पड़ने पर न करें नजरअंदाज
अगर किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है, तो इसे केवल तनाव या थकान का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जरूरी नहीं कि हर दौरा मिर्गी के कारण ही हो। इसके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाना जरूरी है।
मिर्गी को सही इलाज और नियमित देखभाल से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। समय पर दवाइयां लेना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव को संभालना और परिवार का सहयोग मरीज की जिंदगी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।