नारी डेस्क: आजकल सोशल मीडिया पर पतली कमर और आकर्षक बॉडी शेप पाने के लिए कई तरह के ट्रेंड देखने को मिलते हैं। कोई खास डाइट अपनाने की सलाह देता है, तो कोई डिटॉक्स ड्रिंक और एक्सरसाइज के जरिए कमर पतली करने के तरीके बताता है। वहीं, कुछ लोग मनचाहा फिगर पाने के लिए सर्जरी का सहारा भी लेते हैं। ऐसी ही एक तकनीक है रिब रिमॉडलिंग (Rib Remodelling), जिसमें पसलियों के आकार में बदलाव करके कमर को अधिक पतला और उभरा हुआ दिखाने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा, रिब रिमूवल सर्जरी भी चर्चा में रहती है, जिसमें पसलियों के कुछ हिस्सों को हटाया जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों प्रक्रियाओं में क्या अंतर है और इनके क्या जोखिम हो सकते हैं? आइए, विस्तार से समझते हैं।
क्या है रिब रिमॉडलिंग
रिब रिमॉडलिंग एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पसलियों के आकार में बदलाव करके कमर की बनावट को अधिक आकर्षक बनाना होता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर पसलियों को पूरी तरह हटाया नहीं जाता, बल्कि उनकी बनावट में बदलाव करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इसे करने का तरीका सर्जन की तकनीक और मरीज की शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोग डिलीवरी के बाद या वजन में बड़े बदलाव के कारण कमर की बनावट से संतुष्ट नहीं होते। ऐसे में वे रिब रिमॉडलिंग जैसी प्रक्रियाओं के बारे में सोच सकते हैं। कई बार इसे लिपोसक्शन या टमी टक जैसी कॉस्मेटिक सर्जरी के साथ भी जोड़ा जाता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य अलग-अलग होता है और हर व्यक्ति के लिए इनका संयोजन उचित नहीं होता। रिब रिमॉडलिंग के बाद रिकवरी में कितना समय लगेगा, यह इस्तेमाल की गई तकनीक, सर्जरी की सीमा और व्यक्ति की सेहत पर निर्भर करता है। इसलिए इसे किसी सामान्य ब्यूटी ट्रीटमेंट की तरह नहीं देखना चाहिए।

किन लोगों के लिए रिब रिमॉडलिंग पर विचार किया जा सकता है
हर व्यक्ति इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त नहीं होता। सर्जरी से पहले डॉक्टर मरीज की शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य और अपेक्षाओं का आकलन करते हैं। आमतौर पर निम्न बातों पर ध्यान दिया जाता है
स्वास्थ्य की स्थिति: व्यक्ति की सेहत अच्छी हो और ऐसी कोई बीमारी न हो जो सर्जरी के जोखिम को बढ़ा सकती हो।
वजन और बॉडी मास इंडेक्स: व्यक्ति का वजन और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) सर्जरी के लिहाज से उपयुक्त होना चाहिए।
त्वचा की लचक: त्वचा की इलास्टिसिटी भी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
उम्मीदें वास्तविक हों: व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि सर्जरी से कमर की बनावट में कितना बदलाव संभव है और परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती। सिर्फ पतली कमर पाने की इच्छा इस सर्जरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं है। इसके फायदे, जोखिम और दूसरे विकल्पों पर योग्य प्लास्टिक सर्जन से चर्चा करना जरूरी है।
क्या है रिब रिमूवल सर्जरी
रिब रिमूवल सर्जरी को रिब रिसेक्शन भी कहा जाता है। इसमें कमर की बनावट बदलने के लिए एक या एक से अधिक पसलियों के कुछ हिस्सों को सर्जरी के जरिए हटाया जा सकता है। इसका उद्देश्य शरीर के निचले हिस्से को अधिक पतला दिखाना हो सकता है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी फ्लोटिंग रिब्स यानी तैरती पसलियों को लेकर भी चर्चा होती है। ये पसलियां छाती की हड्डी (स्टर्नम) से सीधे नहीं जुड़ी होतीं। हालांकि, सभी लोगों की फ्लोटिंग रिब्स बाहर की ओर उभरी हुई नहीं दिखतीं और केवल इनकी मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि सर्जरी की जरूरत है। इस सर्जरी में चीरा कहां लगाया जाएगा और कितना हिस्सा हटाया जाएगा, यह मरीज की शारीरिक बनावट और सर्जिकल योजना पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में रिकवरी में छह से आठ सप्ताह या इससे अधिक समय लग सकता है। पूरी तरह ठीक होने में व्यक्ति को कितना समय लगेगा, यह अलग-अलग हो सकता है।
किन लोगों के लिए रिब रिमूवल सर्जरी पर विचार किया जा सकता है?
रिब रिमूवल सर्जरी का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया जाना चाहिए। डॉक्टर मरीज की जरूरत, स्वास्थ्य और संभावित जोखिमों का आकलन करने के बाद ही इसकी उपयुक्तता तय करते हैं। पसलियों की बनावट के कारण कमर का आकार प्रभावित होने की शिकायत हो। व्यक्ति का सामान्य स्वास्थ्य सर्जरी के लिए उपयुक्त हो। मरीज को प्रक्रिया के संभावित परिणामों और सीमाओं की जानकारी हो। व्यक्ति सर्जरी के जोखिम, रिकवरी और बाद की देखभाल के लिए तैयार हो। यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल कमर पतली दिखाने के लिए स्वस्थ पसलियों को हटवाना एक बड़ा फैसला है। सर्जरी के बाद होने वाले बदलाव हमेशा व्यक्ति की उम्मीद के अनुसार हों, यह जरूरी नहीं है।
रिब रिमॉडलिंग और रिब रिमूवल सर्जरी में क्या अंतर है?
दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य कमर की बनावट में बदलाव करना हो सकता है, लेकिन इनके तरीके अलग हैं। रिब रिमॉडलिंग में पसलियों का आकार बदलने की कोशिश की जाती है, जबकि रिब रिमूवल में पसलियों के कुछ हिस्से हटाए जा सकते हैं। दोनों ही प्रक्रियाओं में हड्डियों और आसपास के ऊतकों पर असर पड़ सकता है, इसलिए इन्हें जोखिम से मुक्त नहीं माना जा सकता। इन प्रक्रियाओं को लेकर उपलब्ध जानकारी और इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक अलग-अलग हो सकती हैं। सर्जरी कराने से पहले डॉक्टर से यह स्पष्ट रूप से पूछना चाहिए कि कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होगी, उसके वैज्ञानिक प्रमाण क्या हैं और संभावित जटिलताएं कौन-सी हो सकती हैं।

रिब रिमॉडलिंग और रिब रिमूवल सर्जरी के संभावित खतरे
कमर की बनावट बदलने वाली इन प्रक्रियाओं के साथ कई तरह के जोखिम जुड़े हो सकते हैं। इनमें से कुछ जटिलताएं गंभीर भी हो सकती हैं।
फेफड़ों को नुकसान और न्यूमोथोरैक्स
पसलियों के आसपास फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंग मौजूद होते हैं। सर्जरी के दौरान चोट लगने पर न्यूमोथोरैक्स हो सकता है। इस स्थिति में फेफड़े और छाती की दीवार के बीच हवा जमा हो जाती है, जिससे फेफड़ा आंशिक या पूरी तरह सिकुड़ सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
नसों को नुकसान और लंबे समय तक दर्द
पसलियों के आसपास कई नसें होती हैं। सर्जरी के दौरान इन नसों को नुकसान पहुंचने पर दर्द, सुन्नपन, झनझनाहट या जलन महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में यह परेशानी लंबे समय तक बनी रह सकती है और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर सकती है।
हड्डियों के जुड़ने में परेशानी
हड्डियों में बदलाव करने वाली प्रक्रिया के बाद उनके ठीक होने में दिक्कत आ सकती है। कुछ मामलों में हड्डी का जुड़ाव ठीक से नहीं हो पाता या उसकी स्थिति में बदलाव हो सकता है। इससे दर्द और दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जोखिम प्रक्रिया की तकनीक और सर्जरी की सीमा पर निर्भर करता है।
सूजन, निशान और त्वचा में जलन
सर्जरी के बाद सूजन, चोट के निशान और दर्द होना संभव है। चीरे वाली जगह पर स्थायी निशान भी रह सकता है। यदि रिकवरी के दौरान विशेष कॉर्सेट या कम्प्रेशन गारमेंट पहनने की सलाह दी जाती है, तो कुछ लोगों को उससे त्वचा में जलन या दबाव के कारण परेशानी हो सकती है।

संक्रमण और एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिम
किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी संक्रमण, खून बहने और घाव भरने में देरी का जोखिम हो सकता है। एनेस्थीसिया यानी बेहोशी की दवा से जुड़ी जटिलताएं भी संभव हैं। जोखिम व्यक्ति की सेहत, इस्तेमाल की गई तकनीक और सर्जरी की जटिलता के अनुसार बदल सकता है।
सर्जरी कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
अगर आप कमर की बनावट बदलने के लिए रिब रिमॉडलिंग या रिब रिमूवल सर्जरी के बारे में सोच रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर दिखने वाली तस्वीरों और वीडियो के आधार पर फैसला न लें। हर व्यक्ति की हड्डियों की बनावट और शरीर की संरचना अलग होती है, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के परिणाम आपके लिए समान हों, यह जरूरी नहीं है।
सर्जरी से पहले योग्य और अनुभवी प्लास्टिक सर्जन से परामर्श लें। प्रक्रिया के संभावित फायदे, जोखिम, रिकवरी का समय, लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव और दूसरे विकल्पों के बारे में स्पष्ट जानकारी हासिल करें। यदि उद्देश्य केवल कमर की बनावट में बदलाव करना है, तो यह भी समझें कि व्यायाम और वजन प्रबंधन शरीर की बनावट को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन वे हड्डियों की संरचना को उसी तरह नहीं बदलते जैसे सर्जरी करती है।
ध्यान रखें: पतली कमर पाने के लिए पसलियों में बदलाव करवाना कोई मामूली कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट नहीं है।