नारी डेस्क: कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। लेकिन अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो समय पर इलाज शुरू करने और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसी सोच के साथ हिमांशु रॉय फाउंडेशन ने कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए एक अहम पहल की है। फाउंडेशन की ओर से नासिक के उन जरूरतमंद लोगों को हिमांशु रॉय कैंसर टेस्ट (HrC Test) मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है, जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण इस जांच का खर्च नहीं उठा सकते। इस पहल के पीछे एक परिवार का निजी अनुभव और दूसरों की जिंदगी बचाने की कोशिश जुड़ी है।
निजी दुख से शुरू हुई कैंसर की शुरुआती जांच की पहल
हिमांशु रॉय कैंसर टेस्ट की शुरुआत एक व्यक्तिगत त्रासदी से जुड़ी है। दिवंगत आईपीएस अधिकारी हिमांशु रॉय को कैंसर का पता देर से चला था। उनके परिवार ने इस अनुभव से सीख लेते हुए कैंसर की जल्द पहचान के लिए समाधान तलाशने का संकल्प लिया। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए हिमांशु रॉय फाउंडेशन ने शुरुआती जांच से जुड़ी इस पहल को विकसित किया। फाउंडेशन का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जांच की सुविधा से वंचित न रहना पड़े। फाउंडेशन के अनुसार, हिमांशु रॉय कैंसर टेस्ट अब तैयार है और इसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। नासिक में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को यह जांच पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, किसी भी कैंसर जांच की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस प्रकार के कैंसर की पहचान करती है, कितनी सटीक है और किन लोगों के लिए उपयुक्त है। इसलिए जांच कराने से पहले इसकी प्रक्रिया, उपलब्धता और चिकित्सकीय सलाह से जुड़ी जानकारी लेना जरूरी है।

कौन हैं हिमांशु रॉय
हिमांशु रॉय महाराष्ट्र कैडर के 1988 बैच के चर्चित भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे। उन्होंने मुंबई पुलिस में संयुक्त पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई चर्चित मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाई। इनमें आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग और पत्रकार जे. डे की हत्या से जुड़े मामले भी शामिल थे। पुलिस सेवा में उनके योगदान और काम करने के तरीके के कारण उन्हें व्यापक पहचान मिली। कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद मई 2018 में उनका निधन हो गया था। उनके परिवार ने उनकी याद को समाजसेवा से जोड़ते हुए उनके नाम पर फाउंडेशन की स्थापना की।
पत्नी भावना रॉय और परिवार ने आगे बढ़ाई विरासत
हिमांशु रॉय फाउंडेशन की स्थापना उनकी पत्नी भावना रॉय और परिवार ने उनकी स्मृति में की। लेखक अमीश त्रिपाठी भी इस परिवार का हिस्सा हैं। फाउंडेशन का उद्देश्य केवल हिमांशु रॉय की याद को जीवित रखना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को आगे बढ़ाना है, जिनके लिए उन्हें जाना जाता था। फाउंडेशन राष्ट्रीय सुरक्षा, भारतीय शास्त्रीय संगीत और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में काम करता है। इसके माध्यम से समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करने और जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने जैसी पहल की जाती हैं।
तीन क्षेत्रों में दिया जाता है हिमांशु रॉय लेगेसी अवार्ड
हिमांशु रॉय लेगेसी अवार्ड्स के माध्यम से उन लोगों को सम्मानित करने का उद्देश्य है, जिन्होंने राष्ट्रसेवा, साहस, करुणा और सत्यनिष्ठा के साथ समाज के लिए उल्लेखनीय काम किया है।
ये पुरस्कार मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर केंद्रित हैं
राष्ट्रीय सुरक्षा: देश की सुरक्षा और उससे जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करना।
भारतीय शास्त्रीय संगीत: संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने और उसके संरक्षण में योगदान देने वालों को पहचान देना।
चिकित्सा: स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा अनुसंधान और गंभीर बीमारियों से निपटने के प्रयासों में योगदान देने वालों को प्रोत्साहित करना।
इन क्षेत्रों के जरिए फाउंडेशन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों के काम को सामने लाने की कोशिश करता है।

जरूरतमंदों के लिए मुफ्त कैंसर जांच क्यों है अहम?
कैंसर की जांच का खर्च कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए समय पर जांच कराना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मुफ्त जांच की सुविधा उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में मदद कर सकती है। फाउंडेशन की ओर से नासिक के उन लोगों को हिमांशु रॉय कैंसर टेस्ट मुफ्त देने की बात कही गई है, जो आर्थिक रूप से इसका खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। यह सुविधा सभी के लिए मुफ्त नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए आरक्षित है, जो जांच का खर्च खुद नहीं उठा सकते। फाउंडेशन ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें और जरूरत के अनुसार समय पर जांच कराएं। हालांकि, इस टेस्ट की उपलब्धता, पात्रता, जांच की प्रक्रिया और इससे पहचाने जा सकने वाले कैंसर के प्रकारों की जानकारी संबंधित केंद्र से प्राप्त करना उचित होगा।
लक्षण आने का इंतजार करना सही नहीं
कैंसर के सभी प्रकारों के लक्षण शुरुआती चरण में दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। इसी कारण कुछ लोगों में बीमारी का पता चलने में देर हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति को एक ही तरह की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। उम्र, पारिवारिक इतिहास, व्यक्तिगत जोखिम और संबंधित कैंसर के प्रकार के आधार पर डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं।
इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह को गंभीरता से लेना जरूरी है। यदि शरीर में कोई असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो उसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हिमांशु रॉय फाउंडेशन की यह पहल एक परिवार के निजी अनुभव को समाज की भलाई से जोड़ने की कोशिश है। जरूरतमंद लोगों को मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध कराना उन लोगों के लिए मददगार हो सकता है, जिनके लिए स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाना मुश्किल है। लेकिन किसी भी नए कैंसर टेस्ट को अपनाने से पहले उसकी वैज्ञानिक मान्यता, सटीकता और चिकित्सकीय उपयोगिता के बारे में जानकारी होना भी उतना ही जरूरी है।