नारी डेस्क : कैंसर का पता चलने के बाद मरीज और उसके परिवार के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इलाज से कब तक राहत मिलेगी और रिकवरी को बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। हालांकि, हर मरीज के लिए छह महीने में कैंसर से पूरी तरह ठीक होने की गारंटी नहीं दी जा सकती, क्योंकि रिकवरी कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, उपचार और मरीज की सामान्य सेहत पर निर्भर करती है। ऐसे में समय पर सही इलाज, संतुलित पोषण, पर्याप्त आराम और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। कुछ जरूरी आदतें इलाज के दौरान शरीर को मजबूत बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकती हैं। आइए जानते हैं कैंसर के इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना जरूरी है।
सबसे पहले कैंसर विशेषज्ञ से लें सलाह
कैंसर के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण कदम सही समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करना है। कैंसर के प्रकार और स्टेज के अनुसार डॉक्टर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। हर मरीज के लिए एक ही तरह का इलाज प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए किसी दूसरे मरीज का अनुभव सुनकर अपना इलाज बदलने या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने से बचें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और उपचार समय पर लेना जरूरी है। अगर इलाज के दौरान कोई परेशानी हो रही है, तो उसे डॉक्टर को बताएं।

पौष्टिक आहार से शरीर को दें ताकत
कैंसर के इलाज के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए आहार में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन और मिनरल्स की जरूरत का ध्यान रखना चाहिए।
दालें, दूध, दही, अंडे और अन्य प्रोटीन स्रोत जरूरत के अनुसार शामिल करें।
फल, सब्जियां और साबुत अनाज को अपनी सहनशीलता और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आहार में जगह दें।
अगर भूख कम लगती है, तो डाइटिशियन की सलाह से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करें।
पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें, बशर्ते डॉक्टर ने किसी तरह की पाबंदी न लगाई हो।
कुछ मरीजों को इलाज के दौरान उल्टी, मुंह में छाले, स्वाद में बदलाव या निगलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में उनकी डाइट में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। बिना विशेषज्ञ की सलाह के सप्लीमेंट, हर्बल उत्पाद या बहुत सख्त डाइट शुरू न करें।
क्षमता के अनुसार करें हल्की एक्सरसाइज
कैंसर के इलाज के दौरान हर समय बिस्तर पर पड़े रहना जरूरी नहीं है। अगर डॉक्टर अनुमति दें और शरीर साथ दे, तो हल्की सैर या आसान एक्सरसाइज की जा सकती है। इससे मांसपेशियों की ताकत, ऊर्जा और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, एक्सरसाइज की मात्रा मरीज की सेहत, इलाज और कमजोरी पर निर्भर करती है। अगर चक्कर आएं, सांस लेने में परेशानी हो, बहुत ज्यादा थकान हो या दर्द बढ़े, तो गतिविधि रोककर डॉक्टर से सलाह लें।
नींद और मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान
कैंसर के इलाज के दौरान चिंता, डर और तनाव महसूस होना सामान्य है। पर्याप्त आराम, नियमित दिनचर्या और परिवार का सहयोग मरीज को भावनात्मक रूप से सहारा दे सकता है। जरूरत पड़ने पर काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। ध्यान, धीमी सांस लेने के अभ्यास या अपनी पसंद की शांत गतिविधियों से भी तनाव संभालने में मदद मिल सकती है। यदि नींद की समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से बात करें।

संक्रमण से बचाव और साफ-सफाई पर दें ध्यान
कैंसर के कुछ उपचारों के दौरान शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। इसलिए हाथों की सफाई, सुरक्षित भोजन और डॉक्टर द्वारा बताई गई सावधानियों का पालन करना जरूरी है। अगर इलाज के दौरान बुखार आए, खासकर कीमोथेरेपी के समय, तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत अपनी उपचार टीम से संपर्क करें और उनके निर्देशों का पालन करें। बुखार को केवल घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश न करें।
फॉलो-अप जांच को न करें नजरअंदाज
इलाज पूरा होने के बाद भी डॉक्टर द्वारा बताई गई जांच और फॉलो-अप जरूरी हैं। इनसे इलाज के असर का आकलन करने, संभावित दुष्प्रभावों पर नजर रखने और बीमारी से जुड़ी किसी नई समस्या का समय पर पता लगाने में मदद मिल सकती है। फॉलो-अप का समय और जांचें कैंसर के प्रकार, स्टेज और किए गए उपचार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए अपनी मर्जी से जांचें टालने या इलाज बंद करने से बचें।
किन 3 गलतियों से बचना जरूरी है?
इलाज में देरी करना: लक्षणों को नजरअंदाज करना या विशेषज्ञ से मिलने में देर करना नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज बदलना: किसी दूसरे मरीज की दवा अपनाना, निर्धारित उपचार छोड़ना या केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना जोखिम बढ़ा सकता है।
खानपान और आराम को नजरअंदाज करना: पर्याप्त पोषण न लेना, शरीर की क्षमता से ज्यादा मेहनत करना या लगातार थकान के बावजूद आराम न करना सेहत पर असर डाल सकता है।

क्या छह महीने में कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
कुछ कैंसर में इलाज के बाद अपेक्षाकृत जल्दी सुधार दिखाई दे सकता है, जबकि दूसरे मामलों में लंबे समय तक उपचार और निगरानी की जरूरत होती है। इसलिए केवल छह महीने की समयसीमा के आधार पर कैंसर के ठीक होने का अनुमान लगाना सही नहीं है।