नारी डेस्क : शरीर के किसी हिस्से में गांठ दिखाई देने पर अक्सर लोग इसे सामान्य सूजन या चर्बी की गांठ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार ऐसी गांठ किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इन्हीं में से एक है सॉफ्ट टिशू सारकोमा (Soft Tissue Sarcoma), जो एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। यह शरीर की मांसपेशियों, चर्बी, रक्त वाहिकाओं, नसों और दूसरे सहायक ऊतकों में शुरू हो सकता है। इसके लक्षण अक्सर हाथ-पैरों में त्वचा के नीचे गांठ या सूजन के रूप में दिखाई देते हैं। अमेरिका के दाना-फार्बर कैंसर संस्थान के अनुसार, कई बार ट्यूमर बड़ा होने तक इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। ऐसे में जानना जरूरी है कि सॉफ्ट टिशू सारकोमा क्या है, इसकी गांठ कैसी होती है और इसकी पहचान कैसे की जा सकती है।
क्या है सॉफ्ट टिशू सारकोमा (Soft Tissue Sarcoma)?
सॉफ्ट टिशू सारकोमा (Soft Tissue Sarcoma) कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार है, जो शरीर के सॉफ्ट टिशू यानी कोमल ऊतकों में विकसित होता है। इन ऊतकों में मांसपेशियां, फैट, टेंडन, रेशेदार ऊतक, रक्त वाहिकाएं और नसें शामिल हैं। यह शरीर के लगभग किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन इसके ट्यूमर अक्सर हाथ, पैर, छाती और पेट के आसपास पाए जाते हैं। पेट के अंदर विकसित होने वाले ट्यूमर कई बार तब तक पता नहीं चलते, जब तक उनका आकार काफी बड़ा न हो जाए।
हाथ-पैरों पर कैंसर की गांठ कैसी होती है?
सॉफ्ट टिशू सारकोमा में गांठ अक्सर त्वचा के नीचे दिखाई देती है। शुरुआत में इसमें दर्द नहीं भी हो सकता है। जैसे-जैसे ट्यूमर का आकार बढ़ता है, यह आसपास की मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है। इससे दर्द और सूजन जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
इन संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
गांठ का लगातार बढ़ना: अगर हाथ या पैर में बनी गांठ का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
5 सेंटीमीटर से बड़ी गांठ: अगर गांठ का आकार 5 सेंटीमीटर से ज्यादा है, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है।
गहराई में महसूस होना: त्वचा के नीचे गहराई में बनी गांठ भी जांच की मांग करती है।
दर्द या सूजन: गांठ बढ़ने के साथ आसपास की मांसपेशियों और नसों पर दबाव पड़ने से दर्द हो सकता है।
पेट में परेशानी: पेट में ट्यूमर होने पर पेट दर्द, सूजन और आसपास के अंगों पर दबाव के कारण दूसरी समस्याएं हो सकती हैं।
ध्यान रखें कि ये लक्षण दूसरी सामान्य बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन लगातार बढ़ती गांठ की डॉक्टर से जांच जरूर करवानी चाहिए।
सॉफ्ट टिशू सारकोमा की स्टेज क्या होती हैं?
सॉफ्ट टिशू सारकोमा की स्टेज तय करने के लिए ट्यूमर का आकार, उसकी ग्रेड और यह देखा जाता है कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैला है या नहीं। हाथ-पैर और धड़ में होने वाले सॉफ्ट टिशू सारकोमा को मुख्य रूप से चार स्टेज में बांटा जाता है।
स्टेज 1: इस स्टेज को दो हिस्सों में बांटा जाता है। स्टेज 1A में ट्यूमर का आकार 5 सेंटीमीटर या उससे छोटा होता है और कैंसर लो ग्रेड का होता है। स्टेज 1B में ट्यूमर का आकार 5 सेंटीमीटर से बड़ा होता है, लेकिन कैंसर लो ग्रेड का होता है।
स्टेज 2: इस स्टेज में ट्यूमर का आकार 5 सेंटीमीटर या उससे कम होता है, लेकिन कैंसर मिड ग्रेड या हाई ग्रेड का होता है।
स्टेज 3: इसे भी दो हिस्सों में बांटा जाता है। स्टेज 3A में ट्यूमर का आकार 5 सेंटीमीटर से बड़ा और 10 सेंटीमीटर तक होता है। वहीं, स्टेज 3B में ट्यूमर का आकार 10 सेंटीमीटर से बड़ा होता है। दोनों स्थितियों में कैंसर मिड ग्रेड या हाई ग्रेड का होता है।
स्टेज 4: इस स्टेज में कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स या शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। उदाहरण के लिए, यह फेफड़ों तक भी पहुंच सकता है।
ध्यान दें कि ये स्टेज हाथ-पैर और धड़ के सॉफ्ट टिशू सारकोमा के लिए हैं। शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाले सारकोमा की स्टेजिंग अलग हो सकती है।
कैसे पता चलता है कि गांठ कैंसर की है या सामान्य?
सिर्फ गांठ का आकार, रंग या छूने पर होने वाले एहसास से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह कैंसर की है या नहीं। इसके लिए डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
अल्ट्रासाउंड: गांठ का आकार, बनावट और उसकी स्थिति समझने में मदद करता है।
MRI स्कैन: इससे गांठ की गहराई और आसपास के ऊतकों पर उसके प्रभाव की जानकारी मिल सकती है।
CT स्कैन: शरीर के अंदर ट्यूमर की स्थिति और फैलाव की जांच में मदद करता है।
बायोप्सी: इसमें गांठ से ऊतक का छोटा नमूना लेकर लैब में जांच की जाती है। कैंसर की पुष्टि के लिए यह महत्वपूर्ण जांच है।
अगर गांठ तेजी से बढ़ रही है या 5 सेंटीमीटर से बड़ी है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर की सलाह के बिना गांठ को कटवाने या निकलवाने का फैसला न लें। संदिग्ध सारकोमा की बायोप्सी की योजना विशेषज्ञों की देखरेख में बननी चाहिए।
नोट : हाथ-पैर में गांठ होने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। फिर भी गांठ के आकार में बदलाव, लगातार बढ़ने या दर्द होने पर विशेषज्ञ से जांच करवाना बेहतर है। समय पर बीमारी की पहचान होने से इलाज की योजना बनाने में मदद मिलती है।