नारी डेस्क : बच्चे का जन्म एक महिला की जिंदगी का बेहद खूबसूरत पल होता है, लेकिन इसके साथ उसकी पूरी दिनचर्या भी बदल जाती है। रातों की नींद टूटना, दिनभर बच्चे की देखभाल, घर की जिम्मेदारियां और अपनी जरूरतों को पीछे रखना कई बार उसे अंदर से थका देता है। ऐसे में पति की छोटी-सी बात भी चुभ सकती है और धीरे-धीरे मन में गुस्सा, दूरी या नाराजगी बढ़ने लगती है। कई महिलाएं इस भावना को ‘पति से नफरत’ जैसा महसूस करने लगती हैं, लेकिन हर बार इसकी वजह रिश्ते में प्यार खत्म होना नहीं होती।
रात के दो बजे जब मन में आता है- ‘हर बार मुझे ही क्यों उठना पड़ता है?’
सोचिए, रात के करीब दो बजे बच्चा लगातार रो रहा है। मां कई बार उठकर उसे चुप करा चुकी है। आंखों में नींद है, शरीर थका हुआ है और सुबह फिर बच्चे के साथ घर की जिम्मेदारियां निभानी हैं। दूसरी तरफ पति सो रहे हैं। ऐसे में जब महिला को बार-बार अकेले ही बच्चे को संभालना पड़ता है, तो उसके मन में नाराजगी पैदा होना स्वाभाविक हो सकता है। सुबह होते-होते यही थकान किसी छोटी-सी बात पर बहस में बदल सकती है। कई बार महिला के गुस्से के पीछे सिर्फ उस पल की परेशानी नहीं होती, बल्कि कई दिनों से जमा थकान और अनदेखी महसूस करने की भावना भी होती है।

आखिर मां बनने के बाद पति से दूरी क्यों महसूस होने लगती है?
बच्चे के आने के बाद पति-पत्नी के रिश्ते में बदलाव आना आम है। दोनों की प्राथमिकताएं बदलती हैं और समय का बड़ा हिस्सा बच्चे की जरूरतों में चला जाता है। अगर इस दौरान महिला को पर्याप्त आराम, मदद और भावनात्मक सहयोग नहीं मिलता, तो रिश्ते में शिकायत और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। आइए जानते हैं वे 6 बड़ी वजहें, जिनकी वजह से मां बनने के बाद महिला को पति से नाराजगी या दूरी महसूस हो सकती है।
हर जिम्मेदारी अकेले उठाने का एहसास
बच्चे को खिलाना, नहलाना, सुलाना, रात में उठना, डॉक्टर के पास ले जाना और उसकी छोटी-बड़ी जरूरतों का ध्यान रखना अगर ज्यादातर मां ही कर रही है, तो उसके मन में यह भावना आ सकती है कि सारी जिम्मेदारी उसी की है। कई बार महिला को काम ज्यादा होने से उतनी परेशानी नहीं होती, जितनी इस बात से होती है कि उसकी मेहनत को कोई देख या समझ नहीं रहा। वहीं अगर पति पहले की तरह अपने काम, दोस्तों या आराम के लिए समय निकाल पा रहा हो, तो असमानता का एहसास और बढ़ सकता है।
नींद पूरी न होना और लगातार थकान
नई मां के लिए पर्याप्त नींद लेना कई बार आसान नहीं होता। बच्चा रात में बार-बार उठ सकता है और दिन में भी आराम का मौका कम मिल पाता है। लगातार थकान का असर मूड और धैर्य पर पड़ सकता है। ऐसे समय में पति की कोई छोटी लापरवाही भी महिला को बहुत बड़ी लग सकती है। वह ज्यादा चिड़चिड़ी महसूस कर सकती है और उसे लग सकता है कि उसकी थकान को कोई समझ नहीं रहा।

अपने लिए समय बिल्कुल खत्म हो जाना
मां बनने के बाद कई महिलाओं को लगता है कि उनकी अपनी जिंदगी कहीं पीछे छूट गई है। दोस्तों से मिलना, शॉपिंग करना, घूमना, पढ़ना या कुछ देर अकेले बैठना तक मुश्किल हो जाता है। अगर पति पहले की तरह काम के अलावा अपने दोस्तों या निजी समय के लिए वक्त निकाल पाता है, जबकि महिला को लगातार बच्चे के साथ रहना पड़ता है, तो उसके मन में असमानता और नाराजगी पैदा हो सकती है।
पति से भावनात्मक साथ न मिलना
महिला को सिर्फ घर के काम या बच्चे की जिम्मेदारी में मदद ही नहीं चाहिए होती, बल्कि भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है। कई बार पति यह मान लेता है कि घर का खर्च उठाना या बच्चे की कुछ जरूरतें पूरी करना ही पर्याप्त सहयोग है। जबकि महिला चाहती है कि कोई उससे बस इतना पूछे- ‘तुम कैसी हो?’, ‘आज बहुत थक गई हो क्या?’ या ‘मैं बच्चे को संभालता हूं, तुम थोड़ा आराम कर लो।’ जब ऐसी छोटी लेकिन जरूरी बातें लंबे समय तक नहीं मिलतीं, तो शिकायत धीरे-धीरे मन में जमा होने लगती है।
शरीर और आत्मविश्वास में बदलाव
गर्भावस्था और प्रसव के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। वजन में बदलाव, स्ट्रेच मार्क्स, बालों का झड़ना या कमजोरी जैसी चीजें महिला के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में पार्टनर की संवेदनशीलता और स्वीकार करने वाला रवैया बेहद मायने रख सकता है। अगर महिला को लगे कि उसके बदले हुए शरीर को लेकर पति की सोच बदल गई है या वह पहले जैसा प्यार और अपनापन महसूस नहीं कर रही, तो भावनात्मक दूरी और बढ़ सकती है।
पति-पत्नी की बातचीत सिर्फ बच्चे तक सीमित हो जाना
बच्चे के आने के बाद कपल की ज्यादातर बातचीत उसकी जरूरतों के इर्द-गिर्द घूमने लगती है। ‘डायपर खत्म हो गए’, ‘बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना है’, ‘दूध कब देना है’ जैसी बातें तो होती रहती हैं, लेकिन दोनों के बीच पहले जैसी व्यक्तिगत बातचीत कम हो जाती है। धीरे-धीरे पति-पत्नी को लग सकता है कि वे एक-दूसरे के पार्टनर कम और सिर्फ बच्चे के माता-पिता ज्यादा बन गए हैं। यही भावनात्मक दूरी आगे चलकर नाराजगी और अकेलेपन की वजह बन सकती है।

तो क्या इसका मतलब सच में पति से नफरत है?
हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार ‘मुझे अपने पति से नफरत हो रही है’ के पीछे असल भावना कुछ और होती है।
हो सकता है महिला के मन में चल रहा हो:
‘मैं बहुत थक गई हूं।’
‘मुझे मदद की जरूरत है।’
‘मैं खुद को अकेला महसूस कर रही हूं।’
‘कोई मेरी भावनाओं को समझे।’
इसलिए ऐसी भावनाओं को तुरंत रिश्ते में प्यार खत्म होने का संकेत मानने के बजाय उनके पीछे की जरूरत को समझना ज्यादा जरूरी है।
रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए क्या करें?
पति-पत्नी को बच्चे की जिम्मेदारियों को मिलकर संभालने की कोशिश करनी चाहिए। घर और बच्चे से जुड़े कामों को लेकर खुलकर बात करना, एक-दूसरे की थकान को समझना और दिन में कुछ समय सिर्फ एक-दूसरे के लिए निकालना रिश्ते में नजदीकी बनाए रखने में मदद कर सकता है। साथ ही, मां को अपनी भावनाओं के लिए खुद को दोषी नहीं ठहराना चाहिए। अगर उदासी, चिड़चिड़ापन, बहुत ज्यादा चिंता, निराशा या अकेलापन लगातार बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना जरूरी है। ऐसी भावनाएं कभी-कभी प्रसव के बाद होने वाली मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती हैं। मां बनना सिर्फ बच्चे की देखभाल करना नहीं है। इस सफर में मां का खुद का आराम, भावनाएं और मानसिक सुकून भी उतने ही जरूरी हैं।