
नारी डेस्क: एक अध्ययन में पाया गया है कि 11-12 साल की उम्र में रोजाना ज्यादा कदम चलने वाले बच्चों में एक साल बाद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम कम पाया गया। 'द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) नेटवर्क ओपन' में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्षों में यह भी सामने आया कि रोजाना 12,000 या उससे अधिक कदम चलने का अधिक कदमों और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध बना रहा। आंकड़ों में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि एक निश्चित संख्या के बाद अधिक कदम चलने का लाभ बढ़ना बंद हो गया।
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शारीरिक गतिविधि के हैं कई फायदे
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सबसे अधिक कदम चलने वाले किशोरों के मस्तिष्क के उन हिस्सों में भी अंतर देखा गया, जो शरीर की गतिविधियों और मनोदशा से जुड़े हैं। इन अंतर ने कदमों की संख्या और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझाने में मदद की। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था मस्तिष्क के विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण दौर है इसलिए यह देखना उत्साहजनक है कि शारीरिक गतिविधि के फायदे दोनों पर पड़ते हैं। यह ऐसी स्थिति नहीं है कि या तो पूरा लाभ मिले या बिल्कुल भी लाभ न मिले। इसका फायदा उठाने के लिए किशोरों का उत्कृष्ट स्तर का खिलाड़ी होना जरूरी नहीं है।
बच्चों को सक्रिय रहने की सलाह
विशेषज्ञ कहते हैं कि - '' रोजाना जितने कदम आप पहले से चल रहे हैं, उसमें 1,000 से 2,000 कदम की बढ़ोतरी भी मस्तिष्क की बेहतर संरचना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बेहतर परिणामों से संबंधित पाई गई। इसके बाद कदमों की संख्या बढ़ाने के साथ यह लाभ और बढ़ता जाता है।'' उन्होंने रोजाना अधिक सक्रिय रहने के लिए 'व्यावहारिक और लंबे समय तक जारी रखे जा सकने वाले' तरीके अपनाने की सलाह दी। जैसा कि स्कूल पैदल जाना, भाग-दौड़ वाले खेलों में हिस्सा लेना और ऐसी गतिविधियां करना, जिनमें किशोरों की वास्तव में रुचि हो, रोजाना अधिक चलने के आसान अवसर हो सकते हैं। इससे किशोर जिस स्तर से शुरुआत कर रहे हैं, वहीं से शारीरिक गतिविधि के लाभ हासिल कर सकते हैं।
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इस उम्र के बच्चों पर किया गया अध्ययन
अध्ययन में शामिल 5,515 किशोरों पर नजर रखी गई। प्रतिभागियों ने 11 से 12 वर्ष की उम्र के आसपास तीन सप्ताह तक 'फिटबिट' उपकरण पहने। एक साल बाद शोधकर्ताओं ने किशोरों और उनके माता-पिता से प्रश्नावली भरवाकर उनके मानसिक स्वास्थ्य का आकलन किया। इसमें चिंता, उदासी और व्यवहार संबंधी समस्याओं जैसे लक्षणों को मापा गया। इन जवाबों की तुलना प्रत्येक किशोर द्वारा रोजाना चले गए कदमों की संख्या से की गई। एक दिन में 5,000 से कम कदम चलने वाले किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण सबसे अधिक पाए गए। करीब 8,000 कदम रोजाना चलने वाले किशोरों में ये लक्षण कम थे, जबकि 12,000 या उससे अधिक कदम चलने वालों में सबसे कम लक्षण पाए गए।''यह अध्ययन अब तक के सबसे स्पष्ट प्रमाणों में से एक है कि रोजाना कदमों की संख्या जैसी सामान्य, कम खर्चीली और आसानी से अपनाई जा सकने वाली शारीरिक गतिविधि किशोरों के मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य के विकास से जुड़ी है।''