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100 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 59 लड़कियां ही 12वीं कर पाती हैं पास, UNESCO की रिपोर्ट

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 10 Oct, 2026 12:27 PM
100 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 59 लड़कियां ही 12वीं कर पाती हैं पास, UNESCO की रिपोर्ट

नारी डेस्क:  "पढ़ेंगी बेटियां, तभी तो बढ़ेंगी बेटियां" यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश और प्रेरणादायक नारा है, क्योंकि जब लड़की शिक्षित होती है, तो वह आत्मनिर्भर बनती है। सरकार द्वारा इतना बढ़ावा देने के बावजूद भी बहुत सी लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी करने में नाकाम रह जाती हैं। शुक्रवार को जारी UNESCO की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में अपर सेकेंडरी शिक्षा (कक्षा 11 और 12) पूरी करने वाले हर 100 लड़कों के मुकाबले सिर्फ़ 50 लड़कियां ही ऐसा कर पाती हैं। यह रिपोर्ट शहरी इलाकों में बराबरी की दिशा में हुई प्रगति के बावजूद स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के मामले में भारी अंतर को उजागर करती है।

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ग्रामीण इलाकों की लड़कियां रह गई हैं पीछे 

'शिक्षा तक पहुंच में लैंगिक समानता' (Gender Equity in Access to Education) नाम की यह रिपोर्ट, कम और मध्यम आय वाले 31 देशों में शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक अंतर की जांच करती है। भारत में अपर-सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने के मामले में 'एडजस्टेड जेंडर पैरिटी इंडेक्स' (समायोजित लैंगिक समानता सूचकांक) कुल मिलाकर 0.89 है; ग्रामीण इलाकों में यह 0.59 और शहरी इलाकों में 1.0 है। अपर-सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने का कुल अनुपात 0.89 है, जिसका मतलब है कि इस स्तर की शिक्षा पूरी करने वाले हर 100 लड़कों के मुकाबले लगभग 89 लड़कियां इसे पूरा करती हैं। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा हर 100 लड़कों पर 59 लड़कियों का है, जबकि शहरी इलाकों में बराबरी हासिल कर ली गई है।


लड़कियों को उठाना पड़ रहा है नुकसान

जेंडर पैरिटी इंडेक्स (लैंगिक समानता सूचकांक) में 1 का मान लड़कियों और लड़कों के लिए समान नतीजों को दर्शाता है। भारत के मामले में, ग्रामीण इलाकों का आंकड़ा अपर-सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने वाली लड़कियों और लड़कों के अनुपात में काफी अंतर की ओर इशारा करता है। यह रिपोर्ट 2020-24 के डेटा के आधार पर, कम और मध्यम आय वाले 31 देशों में जगह और परिवार की आर्थिक स्थिति के हिसाब से हायर सेकेंडरी (12वीं तक की) पढ़ाई पूरी करने में अंतर का विश्लेषण करती है। भारत में शहरी इलाकों में तो समानता आ गई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की लड़कियों को अब भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
 

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लड़कियां लगातार चुनौतियां का कर रही हैं सामना

भारत में ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच का यह अंतर स्कूल में दाखिले के डेटा में भी दिखता है। ASER 2024 रिपोर्ट में पाया गया कि 15-16 साल की 8.1 प्रतिशत ग्रामीण लड़कियां स्कूल में दाखिला नहीं ले पाई थीं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 7.9 प्रतिशत था। हालांकि ये आंकड़े पढ़ाई पूरी करने के बजाय मौजूदा दाखिले को दिखाते हैं, लेकिन ये बड़ी उम्र की लड़कियों को शिक्षा से जोड़े रखने में आ रही लगातार चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ऐसी असमानताओं को "लिंग और गरीबी, भौगोलिक स्थिति तथा किसी सामाजिक या जनसांख्यिकीय समूह से जुड़े रीति-रिवाजों जैसे कारकों के आपसी तालमेल" के ज़रिए बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
 

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