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एकता कपूर बोलीं- 'बॉलीवुड में है हिंदूफोबिया', टीका लगाने और धार्मिक पहचान दिखाने पर सुनाया अपना अनुभव

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 Oct, 2026 05:23 PM
एकता कपूर बोलीं- 'बॉलीवुड में है हिंदूफोबिया', टीका लगाने और धार्मिक पहचान दिखाने पर सुनाया अपना अनुभव

नारी डेस्क:  टीवी और फिल्म प्रोड्यूसर एकता कपूर इन दिनों अपनी फिल्म ‘द वन’ को लेकर चर्चा में हैं। इस बीच उनका एक इंटरव्यू भी सुर्खियों में आ गया है, जिसमें उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था और फिल्म इंडस्ट्री के माहौल पर खुलकर बात की। रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में एकता ने कहा कि बॉलीवुड में हिंदू धर्म और उससे जुड़ी परंपराओं को लेकर असहजता देखने को मिलती है। उन्होंने इसे ‘हिंदूफोबिया’ से जोड़ते हुए अपने निजी अनुभव भी साझा किए। एकता का कहना है कि फिल्मों की कमाई और बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन जब भारतीय लोककथाओं, पौराणिक कहानियों और धार्मिक पहचान की बात आती है, तो कुछ लोग अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन से ही उन्हें अपनी आस्था को खुलकर जाहिर करने को लेकर कई बार असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

फिल्मों की कमाई पसंद, लेकिन हिंदू परंपराओं पर झिझक क्यों

एकता कपूर ने बातचीत के दौरान भारतीय संस्कृति, लोककथाओं और धार्मिक परंपराओं को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के नजरिए पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि फिल्मों के बॉक्स ऑफिस नंबर देखकर लोग खुश होते हैं, लेकिन जब उन्हीं फिल्मों में भारतीय लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं की बात आती है, तो कुछ लोगों के रवैये में बदलाव नजर आता है। एकता के मुताबिक, भारतीय कहानियों और परंपराओं को बड़े पर्दे पर दिखाने को लेकर अब भी कुछ लोगों में झिझक है। उन्होंने इस रवैये को हिंदूफोबिया से जोड़कर अपनी बात रखी। हालांकि, यह उनकी निजी राय और अनुभव हैं, जिन्हें उन्होंने इंटरव्यू में साझा किया।

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टीका लगाने और धार्मिक पहचान दिखाने में भी हुई परेशानी

एकता कपूर ने बताया कि धार्मिक आस्था को खुले तौर पर जाहिर करना उनके लिए हमेशा आसान नहीं रहा। उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि टीका लगाने और हाथ में धागा पहनने की वजह से लोग उन्हें अलग नजर से देखते थे। कई बार उनके टीके का मजाक भी उड़ाया जाता था। एकता ने कहा कि आज भी धार्मिक पहचान को खुलकर दिखाने और टीका लगाने को लेकर मुश्किल महसूस हो सकती है। उन्होंने एक घटना साझा करते हुए बताया कि एक बार वह मंदिर से सीधे क्लब गई थीं, जहां उन्हें जज किया गया। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था और उसकी आधुनिक जीवनशैली को एक-दूसरे के खिलाफ नहीं देखना चाहिए। कोई व्यक्ति अपनी परंपराओं को मानते हुए भी अपनी पसंद के मुताबिक जीवन जी सकता है।

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भारतीय लोककथाओं को आगे बढ़ाने में नहीं होती झिझक

एकता कपूर ने यह भी बताया कि उन्हें भारतीय पौराणिक कहानियों और लोककथाओं को पर्दे पर लाने में कोई हिचक नहीं है। उनके लिए इन कहानियों को लोगों तक पहुंचाना अहम है। उनका मानना है कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी कहानियों को भी उसी सहजता से स्वीकार किया जाना चाहिए, जिस तरह दूसरी तरह की कहानियों को किया जाता है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि अब ऐसे विषयों पर पहले के मुकाबले ज्यादा चर्चा हो रही है और दर्शकों के बीच इन कहानियों को लेकर दिलचस्पी भी दिखाई देती है। एकता की बातों से यह साफ है कि वह मनोरंजन के साथ भारतीय संस्कृति और लोककथाओं को भी जगह देना चाहती हैं। उनके मुताबिक, धार्मिक पहचान को लेकर किसी को असहज महसूस नहीं कराया जाना चाहिए।

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क्या है फिल्म ‘द वन’ की कहानी?

एकता कपूर की फिल्म ‘द वन’ भी भारतीय लोककथाओं से जुड़ी बताई जा रही है। फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा ने किया है, जबकि सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया इसमें मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म की कहानी बिहार के पटना जिले में बिहटा के पास स्थित मां वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथाओं पर आधारित बताई गई है। इसके जरिए भारतीय परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ी कहानी को दर्शकों के सामने लाने की कोशिश की गई है।

फिल्म को लेकर चर्चा के बीच एकता कपूर का यह इंटरव्यू भी ध्यान खींच रहा है। इसमें उन्होंने अपनी आस्था, धार्मिक पहचान और भारतीय लोककथाओं को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उनका कहना है कि किसी की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान होना चाहिए और अपनी आस्था जाहिर करने के लिए किसी को भी झिझक महसूस नहीं करनी चाहिए।  

 

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