10 OCTSATURDAY2026 6:08:28 PM
Life Style

श्राद्ध पक्ष में भूलकर भी न खरीदें ये 3 चीजें, घर की सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

  • Edited By Monika,
  • Updated: 27 Sep, 2026 12:51 PM
श्राद्ध पक्ष में भूलकर भी न खरीदें ये 3 चीजें, घर की सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

नारी डेस्क : पितृपक्ष का समय हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में कुछ कामों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह कुछ चीजों की खरीदारी को लेकर भी विशेष मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं पितृपक्ष में किन 3 चीजों को खरीदने से परहेज करने की बात कही जाती है।

झाड़ू

धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान झाड़ू खरीदने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में झाड़ू खरीदने से आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

PunjabKesari

नमक

पितृपक्ष के दौरान नमक खरीदने को लेकर भी कुछ धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इस अवधि में नमक की खरीदारी करने से घर के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और परिवार में तनाव या विवाद की स्थिति बन सकती है। इसलिए कुछ लोग श्राद्ध पक्ष में नमक खरीदने से परहेज करते हैं।

यें भी पढ़ें : सबसे पहले किसने किया था अपने पितरों का श्राद्ध, जानें कैसे शुरू हुई श्राद्ध की परंपरा

सरसों का तेल

सरसों के तेल को धार्मिक परंपराओं में शनिदेव और कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान सरसों के तेल की खरीदारी और इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इसे लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं।

PunjabKesari

पितृपक्ष में रखें इन बातों का ध्यान

पितृपक्ष के दौरान पूजा-पाठ, तर्पण और दान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं। झाड़ू, नमक और सरसों के तेल को लेकर ऊपर बताई गई बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पितृपक्ष से जुड़ी परंपराएं अलग हो सकती हैं।

Related News