नारी डेस्क : हिंदू धर्म में जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। यह व्रत खासतौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जितिया व्रत से जुड़े कई नियम और परंपराएं भी हैं, जिनका व्रती महिलाएं पालन करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।
जितिया व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
व्रत के दौरान भोजन-पानी का सेवन
धार्मिक परंपरा के अनुसार जितिया व्रत निर्जला रखा जाता है। यानी व्रत के दौरान अन्न और पानी का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि, निर्जला व्रत रखना हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं हो सकता। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

टूटे या गंदे जितिया धागे का इस्तेमाल
जितिया व्रत से जुड़ी परंपराओं में जितिया धागे का भी महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इसे विधि-विधान से धारण किया जाता है। टूटे या गंदे धागे का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।
क्रोध और विवाद से बचें
व्रत के दौरान मन को शांत रखने और सकारात्मक विचार रखने की परंपरा है। इसलिए इस दिन बेवजह क्रोध करने, किसी से झगड़ा करने या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि व्रती को इस दिन मन, वचन और कर्म से संयम रखना चाहिए।
तामसिक भोजन से दूरी रखें
जितिया व्रत से जुड़ी परंपराओं में सात्विक भोजन को महत्व दिया जाता है। इसलिए इस दौरान मांस-मदिरा जैसे पदार्थों से परहेज किया जाता है। कई परिवारों में प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं किया जाता। हालांकि, खान-पान की परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

पूजा-पाठ से मन न भटकाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जितिया व्रत के दिन पूजा-पाठ, भगवान का स्मरण और धार्मिक कार्यों में मन लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन किसी का अहित सोचने या अनावश्यक विवाद में पड़ने से बचना चाहिए।
जितिया व्रत में क्या करना चाहिए?
व्रत से एक दिन पहले स्नान करके घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
परंपरा के अनुसार नहाय-खाय की प्रक्रिया पूरी करें।
नहाय-खाय के दिन क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार भोजन ग्रहण किया जाता है।
व्रत के दौरान पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करें।
जितिया व्रत की पूजा विधि के अनुसार भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है।
व्रत का पारण निर्धारित तिथि और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार करें।
पारण के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
एक जरूरी बात
जितिया व्रत को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा विधि, भोजन और पारण से जुड़ी परंपराओं में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र की मान्यता और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत की विधि का पालन करना बेहतर माना जाता है। निर्जला व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से कठिन हो सकता है, इसलिए किसी बीमारी, कमजोरी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।