
नारी डेस्क: बहुत सी महिलाओं ने क्रीम या तेल से ब्रेस्ट को भरा-पूरा और बड़ा बनाने के दावे सुने होंगे। ऐसे प्रोडक्ट्स जो कुछ ही हफ़्तों में ब्रेस्ट का साइज़ प्राकृतिक रूप से बढ़ाने, हार्मोनल स्टिमुलेशन या ब्रेस्ट को भरा-पूरा बनाने का वादा करते हैं, उन्हें देखकर कई महिलाओं का उत्सुक होना स्वाभाविक है। चलिए इन प्रोडक्ट्स के वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में समझते हैं विस्तार से।
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दावों में कितनी सच्चाई?
HT लाइफ़स्टाइल के साथ एक इंटरव्यू में प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जन ने समझाया कि तेल और क्रीम से ब्रेस्ट साइज़ में कोई खास या स्थायी बढ़ोतरी नहीं हो सकती। उनका कहना है कि ब्रेस्ट का साइज़ मुख्य रूप से ब्रेस्ट ग्लैंडुलर टिश्यू और फैट की मात्रा से तय होता है, साथ ही जेनेटिक्स, वज़न और उम्र, प्रेग्नेंसी व ब्रेस्टफीडिंग के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी इसमें भूमिका निभाते हैं। स्किन पर लगाया जाने वाला कोई प्रोडक्ट अभी तक ब्रेस्ट टिश्यू की ग्रोथ को खास तौर पर नहीं बढ़ा सकता है। ऐसा कोई क्लिनिकल सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि ये क्रीम ब्रेस्ट टिश्यू को बढ़ाकर ब्रेस्ट के साइज़ में एक निश्चित और लंबे समय तक रहने वाली बढ़ोतरी करती हैं।
ब्रेस्ट का साइज़ बढ़ाने वाली क्रीम के साइड इफ़ेक्ट
कुछ प्रोडक्ट से त्वचा कुछ समय के लिए थोड़ी भरी हुई या फुलर लग सकती है। तेल से हाइड्रेशन बेहतर हो सकता है और मसाज से उस हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। कुछ जलन पैदा करने वाले तत्व त्वचा के रूप-रंग को बदल सकते हैं और सूजन या पानी भरने जैसा असर पैदा कर सकते हैं, जिससे कुछ समय के लिए साइज़ बढ़ने का भ्रम हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नया ब्रेस्ट टिश्यू बन गया है। डॉक्टर का कहना है कि हार्मोनल या नैचुरल तरीके से साइज़ बढ़ाने का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ बिना रेगुलेट किए गए प्रोडक्ट्स में स्टेरॉयड जैसे फ़ार्माकोलॉजिकली एक्टिव पदार्थ पाए गए हैं।
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ब्रेस्ट का साइज बढ़ाने के विकल्प
तेज़ असर वाले टॉपिकल स्टेरॉयड के लंबे समय तक या गलत तरीके से इस्तेमाल से त्वचा पतली हो सकती है, स्ट्रेच मार्क्स पड़ सकते हैं और नसें दिखाई देने लग सकती हैं। साथ ही, इनके ज़्यादा अवशोषण (absorption) से शरीर में हार्मोनल असर भी हो सकता है। डॉक्टर ने समझाया- जो महिलाएं सच में अपने ब्रेस्ट का साइज़ बढ़ाना चाहती हैं, उनके लिए वैज्ञानिक रूप से साबित तरीके मौजूद हैं। शरीर की बनावट, अनुपात, लक्ष्यों और मेडिकल स्थिति के आधार पर, इम्प्लांट या फैट ग्राफ्टिंग के ज़रिए ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन (ब्रेस्ट का साइज़ बढ़ाना) से ब्रेस्ट के वॉल्यूम और साइज़ में असल में बढ़ोतरी हो सकती है। ये सर्टिफाइड और सुरक्षित सर्जिकल प्रक्रियाएं हैं, और इनके लिए किसी क्वालिफाइड प्लास्टिक सर्जन से सलाह लेना ज़रूरी है ताकि उम्मीदों, फायदों और जोखिमों पर बात की जा सके।