नारी डेस्क: पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, थकान, कमजोरी और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियां कई महिलाओं को होती हैं। कुछ महिलाओं के लिए यह दर्द इतना ज्यादा हो जाता है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल लगने लगता है। हालांकि, हर बार इसके पीछे सिर्फ खानपान ही जिम्मेदार हो, ऐसा नहीं है। लेकिन डाइट और शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी पीरियड्स के दौरान होने वाली कुछ परेशानियों को बढ़ा सकती है। सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक, आयरन और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी पीरियड्स के दिनों में कमजोरी और दर्द जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है। ऐसे में संतुलित डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।
आयरन की कमी से बढ़ सकती है कमजोरी
पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग के कारण शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। अगर पहले से ही आयरन का स्तर कम है या हर महीने ज्यादा ब्लीडिंग होती है, तो समय के साथ इसकी कमी और बढ़ सकती है। आयरन की कमी होने पर सिर्फ कमजोरी और थकान ही नहीं, बल्कि चक्कर आना, ध्यान लगाने में परेशानी और शरीर में ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए जिन महिलाओं को पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उनके लिए आयरन वाली डाइट पर ध्यान देना खास तौर पर जरूरी हो जाता है।

पालक, दाल और राजमा को बनाएं डाइट का हिस्सा
आयरन की जरूरत पूरी करने के लिए डाइट में पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और राजमा शामिल किए जा सकते हैं। जो महिलाएं नॉन-वेज खाती हैं, वे अपनी डाइट में डॉक्टर की सलाह के मुताबिक मांस भी शामिल कर सकती हैं। आयरन शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित हो, इसके लिए विटामिन C भी जरूरी है। इसलिए आयरन वाले भोजन के साथ नींबू, टमाटर, संतरा और दूसरे विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ लेना फायदेमंद हो सकता है।
मैग्नीशियम की कमी को भी न करें नजरअंदाज
पीरियड्स के दौरान मैग्नीशियम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज में मदद करता है। डॉ. वैशाली शर्मा के मुताबिक, कुछ महिलाओं में मैग्नीशियम की कमी पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से जुड़ी हो सकती है। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को मेडिकल भाषा में डिसमेनोरिया कहा जाता है। मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थों को संतुलित डाइट में शामिल करना कुछ महिलाओं के लिए मददगार हो सकता है। हालांकि, किसी भी सप्लीमेंट को खुद से शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
कद्दू के बीज और बादाम से मिलेगा मैग्नीशियम
मैग्नीशियम पाने के लिए कद्दू के बीज, बादाम और केला जैसे खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट भी मैग्नीशियम का एक स्रोत है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन चीजों को खाने से पीरियड्स का दर्द तुरंत खत्म हो जाएगा। इनका फायदा एक संतुलित डाइट और पूरी लाइफस्टाइल के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए।

ओमेगा-3 भी हो सकता है मददगार
पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द में शरीर में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायनों की भूमिका होती है। ये गर्भाशय की मांसपेशियों के संकुचन को प्रभावित करते हैं, जिससे ऐंठन और दर्द महसूस हो सकता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर डाइट को कुछ अध्ययनों में पीरियड्स के दर्द में संभावित राहत से जोड़ा गया है। इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अखरोट, अलसी और सैल्मन से लें ओमेगा-3
ओमेगा-3 के लिए अखरोट और अलसी के बीज अच्छे विकल्प हो सकते हैं। नॉन-वेज खाने वाली महिलाएं सैल्मन जैसी फैटी फिश को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं। इन खाद्य पदार्थों को नियमित और संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से शरीर को जरूरी फैटी एसिड मिल सकते हैं। हालांकि, पीरियड्स के दर्द की वजह हर महिला में अलग हो सकती है, इसलिए सिर्फ डाइट के भरोसे गंभीर दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सिर्फ डाइट ही नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
पीरियड्स के दौरान पर्याप्त पानी पीना, नींद पूरी करना और हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखना भी मददगार हो सकता है। बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और अत्यधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी बेहतर रहता है। अगर हर महीने दर्द इतना ज्यादा होता है कि काम, पढ़ाई या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो या दर्द सामान्य से लगातार बढ़ रहा हो, तो इसे सिर्फ पीरियड्स का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में गायनेकोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि कभी-कभी एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं।

सही डाइट से मिल सकती है मदद, लेकिन कारण जानना भी जरूरी
पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और कमजोरी को कम करने में संतुलित डाइट अहम भूमिका निभा सकती है। आयरन, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा है या हर महीने आपकी सामान्य जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो सिर्फ खानपान में बदलाव करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही वजह का पता लगाकर ही समस्या का बेहतर इलाज किया जा सकता है।