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फोन से चिपके रहते हैं बच्चे तो बिना डांटे ऐसे कम करें Screen Time

  • Edited By Monika,
  • Updated: 05 Sep, 2026 04:44 PM
फोन से चिपके रहते हैं बच्चे तो बिना डांटे ऐसे कम करें Screen Time

नारी डेस्क : कई माता-पिता बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं, लेकिन अचानक मोबाइल छीनना या बार-बार डांटना अक्सर स्थिति को और मुश्किल बना सकता है। बेहतर तरीका यह है कि स्क्रीन के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं और बच्चे को धीरे-धीरे दूसरी गतिविधियों की ओर बढ़ाया जाए। अगर आप भी अपने बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं, तो इन 5 आसान पैरेंटिंग टिप्स को आजमा सकते हैं।

स्क्रीन टाइम का समय पहले से तय करें

बच्चे जब भी मन करे मोबाइल या टीवी देखने लगें, तो स्क्रीन टाइम कम करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए दिन में स्क्रीन देखने के लिए कुछ निश्चित समय तय करें। उदाहरण के लिए, लंच के बाद 30 मिनट या होमवर्क पूरा करने के बाद कुछ समय स्क्रीन देखने की अनुमति दी जा सकती है। बच्चे को पहले से बता दें कि उसे स्क्रीन कब और कितनी देर के लिए मिलेगी। आप खाने, पढ़ाई, खेलने और स्क्रीन टाइम का एक आसान टाइमटेबल भी बना सकते हैं। इससे बच्चे को ऐसा महसूस नहीं होगा कि अचानक उससे फोन छीन लिया गया है।

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अचानक फोन न छीनें, पहले दें चेतावनी

अगर बच्चा किसी वीडियो या गेम में व्यस्त है और अचानक फोन बंद कर दिया जाए, तो उसके नाराज होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए स्क्रीन टाइम खत्म होने से पहले बच्चे को धीरे-धीरे तैयार करें। उसे पहले बता दें कि 10 मिनट बाद स्क्रीन बंद करनी है, फिर 5 मिनट और अंत में 2 मिनट बाकी होने की जानकारी दें। आप बच्चे के साथ मिलकर फोन में टाइमर भी लगा सकते हैं। इसके बाद उसे बताएं कि स्क्रीन बंद करने के बाद क्या करना है। जैसे- "टाइमर बजने के बाद हम बाहर गेंद खेलेंगे" या इसके बाद तुम अपनी ड्राइंग पूरी कर सकते हो। इससे बच्चे का ध्यान स्क्रीन से हटाकर दूसरी गतिविधि की ओर ले जाना आसान हो सकता है।

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घर में कुछ जगहों और समय को बनाएं Screen-Free

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए पूरे दिन मोबाइल या टीवी पर रोक लगाने की जरूरत नहीं है। शुरुआत घर के कुछ खास समय और जगहों से की जा सकती है।
जैसे:डाइनिंग टेबल पर मोबाइल नहीं चलेगा।
बेडरूम में स्क्रीन का इस्तेमाल नहीं होगा।
सुबह उठने के तुरंत बाद कुछ समय स्क्रीन से दूरी रहेगी।
सोने से पहले भी स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित रखा जाएगा।
इन नियमों को बच्चे के लिए सजा न बनाएं। कोशिश करें कि पूरे परिवार के लिए एक जैसे नियम हों। अगर माता-पिता भी खाने के समय फोन दूर रखते हैं, तो बच्चे के लिए इस आदत को अपनाना आसान हो सकता है।

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स्क्रीन के बदले मजेदार एक्टिविटी तैयार रखें

अगर आप बच्चे से सिर्फ यह कहेंगे कि "अब मोबाइल बंद करो", लेकिन उसके बाद करने के लिए कुछ नहीं होगा, तो वह दोबारा स्क्रीन मांग सकता है। इसलिए स्क्रीन बंद करने के बाद बच्चे के लिए कुछ दिलचस्प गतिविधियां पहले से तैयार रखें। उसकी उम्र और पसंद के अनुसार आप उसे ड्राइंग, कलरिंग, पजल, ब्लॉक्स, बोर्ड गेम, क्राफ्ट, गेंद खेलने या किताब पढ़ने जैसी गतिविधियों में लगा सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए शेप मैचिंग, रंगों को पहचानना, खिलौनों को व्यवस्थित करना या आसान क्राफ्ट जैसी गतिविधियां भी विकल्प हो सकती हैं। ध्यान रखें कि स्क्रीन के बदले दी जाने वाली गतिविधि बच्चे के लिए दिलचस्प हो, ताकि उसे मोबाइल बंद करना किसी सजा जैसा न लगे।

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बच्चे की नाराजगी को समझें, लेकिन नियम न बदलें

स्क्रीन टाइम कम करने की शुरुआत में बच्चे का नाराज होना, रोना या जिद करना सामान्य हो सकता है। ऐसे समय में उसे डांटने के बजाय शांत तरीके से उसकी बात सुनें और समझाएं कि स्क्रीन टाइम खत्म हो चुका है। लेकिन अगर हर बार बच्चे के रोने या जिद करने पर स्क्रीन टाइम बढ़ा दिया जाएगा, तो उसे यह समझ आ सकता है कि जिद करने से नियम बदल सकते हैं।इसलिए प्यार और समझदारी के साथ एक ही नियम पर लगातार कायम रहना जरूरी है।

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माता-पिता की Consistency है सबसे जरूरी

बच्चे की स्क्रीन की आदत एक दिन में नहीं बदलेगी। शुरुआत में वह विरोध कर सकता है या बार-बार मोबाइल मांग सकता है। ऐसे में माता-पिता को धैर्य रखना होगा। स्क्रीन टाइम का समय पहले से तय करना, स्क्रीन बंद करने से पहले चेतावनी देना, घर में कुछ Screen-Free नियम बनाना और उसके बदले मजेदार गतिविधियां उपलब्ध कराना धीरे-धीरे नई दिनचर्या बनाने में मदद कर सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे को स्क्रीन से दूर करने के लिए सिर्फ डांट या सजा पर निर्भर न रहें। प्यार, स्पष्ट नियम और माता-पिता की निरंतरता से स्क्रीन की आदत को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

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