03 SEPTHURSDAY2026 11:50:05 AM
Nari

Maternity Leave  पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां बनने के बाद नौकरी से नहीं घटेगा पद

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 03 Sep, 2026 11:02 AM
Maternity Leave  पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां बनने के बाद नौकरी से नहीं घटेगा पद

नारी डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) की वजह से किसी महिला की नौकरी या प्रमोशन पर असर नहीं पड़ना चाहिए। कोर्ट ने माना कि कानूनी सुरक्षा का दायरा महिला की ड्यूटी, काम के स्तर, रिपोर्टिंग हायरार्की, सुपरवाइजरी जिम्मेदारियों और अप्रेजल की संभावनाओं तक फैला हुआ है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को 10 लाख रुपये से ज़्यादा का मुआवज़ा देते हुए कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे मामलों में महिलाओं को मिलने वाली सुरक्षा को सिर्फ़ उनकी सैलरी और पद बनाए रखने तक सीमित नहीं किया जा सकता। उस अकाउंटेंट को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताने और मैटरनिटी लीव से लौटने के बाद पेशेवर नुकसान का सामना करना पड़ा था।
 

यह भी पढ़ें:  जन्माष्टमी पर कृष्ण की कृपा पाने का सुनहरा मौका, खुशहाल शादीशुदा जीवन के लिए तुलसी का ये उपाय
 

 मैटरनिटी लीव की वजह से महिलाओं को नहीं होना चाहिए नुकसान

जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) से लौटने वाली महिला को आम तौर पर उसी पद पर वापस आने का अधिकार है जिस पर वह छुट्टी पर जाने से ठीक पहले काम कर रही थी। उन्होंने कहा- "काम की जगह पर मातृत्व को असमान व्यवहार या पेशेवर नुकसान का आधार नहीं बनने दिया जा सकता।" "अगर किसी महिला कर्मचारी को सिर्फ़ गर्भावस्था या मैटरनिटी लीव की वजह से नुकसान उठाना पड़ता है, पेशेवर तरक्की से रोका जाता है, प्रमोशन नहीं मिलता, ज़िम्मेदारियां छीन ली जाती हैं या नौकरी से जुड़े किसी और तरह के बुरे नतीजों का सामना करना पड़ता है, तो ऐसा कदम न सिर्फ़ मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट की भावना के खिलाफ़ है, बल्कि यह साफ तौर पर मनमाना और आर्टिकल 14 के तहत मिली समानता की गारंटी का उल्लंघन भी है।"


ये है मामला 

अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "सेवा की शर्तों" (conditions of service) में नौकरी से जुड़ी मुख्य बातें शामिल होती हैं। अगर किसी कर्मचारी का पद और सैलरी तो वही रखी जाए, लेकिन उससे ज़रूरी ज़िम्मेदारियां, अधिकार या करियर में आगे बढ़ने के मौके छीन लिए जां तो इससे नियोक्ता (employer) अप्रत्यक्ष रूप से वह काम कर पाएगा जिसे कानून सीधे तौर पर करने से रोकता है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्हें लगभग 14 साल का प्रोफेशनल अनुभव है और दिसंबर 2023 में छुट्टी पर जाने से पहले वह मैनेजर, अकाउंटिंग के पद पर थीं। जुलाई 2024 में लौटने पर उन्हें बताया गया कि उनका पुराना पद अब उपलब्ध नहीं है और उन्हें काफ़ी कम महत्व वाला काम सौंप दिया गया।
 

यह भी पढ़ें:  हर तरह के बुखार में एंटीबायोटिक्स नहीं करती काम, मरीज अक्सर कर लेते हैं गलतियां
 

केंद्र सरकार को जारी किए निर्देश

नियोक्ता का दावा था कि उनका पद, लेवल, सैलरी और सीनियरिटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ऑर्गनाइज़ेशनल रीस्ट्रक्चरिंग (संगठनात्मक पुनर्गठन) के बाद उन्हें उसी मैनेजर लेवल पर इन्वेस्टमेंट अकाउंटिंग और करेंसी रीवैल्यूएशन का काम सौंपा गया है। हाई कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट और कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत मिलने वाली सुरक्षा, निजी नियोक्ता के मामले में भी संवैधानिक गारंटी से मिलती है। अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह मैटरनिटी से जुड़ी सुरक्षाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नियम या योजनाएं बनाए या निर्देश जारी करे। इन सुरक्षाओं में मैटरनिटी लीव के बाद भूमिका और स्टेटस, स्तनपान (lactation) में मदद, क्रेच (बच्चों की देखभाल केंद्र) की जानकारी और कामकाज, मैटरनिटी से जुड़ी शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा और सुरक्षा जैसे पहलू शामिल हैं।
 

Related News