
नारी डेस्क: आश्विन के कृष्ण पक्ष में पूर्वजों के पूजन का पर्व पितृ पक्ष 27 सितंबर रविवार से शुरू होगा। पितृ पक्ष में लोग तर्पण कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ ही पितृ ऋण से मुक्ति की प्रार्थना करेंगे। पूर्वजों का पूजन भी तिथि के अनुसार किया जाता है, इसी दिन तर्पण और श्राद्ध करना चाहिये। कुछ लोग सभी दिवसों में पितृ को जल देने की मान्यता का निर्वहन करते हैं। बहुत से लोग अपने घरों में मृत पूर्वजों की याद में उनकी तस्वीर लगाते हैं और पूजा करते हैं, परंतु दिशा का सही ज्ञान नहीं होने के कारण घर में पितृ दोष लग सकता है। चलिए जानते हैं पितरों की तस्वीर लगाने को लेकर सही नियमो के बारे में

इस दिशा में ना लगाए पितरों की तस्वीर
पितरों की तस्वीर को उत्तर या पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ये दिशाएं देवताओं की मानी जाती हैं। इन दिशाओं में केवल पूजा और ईश्वर की तस्वीरें ही लगाई जाती हैं। तस्वीर को हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर रखें। इस स्थान की नियमित सफाई और पूजा करना आवश्यक है ताकि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
ये दिशा है शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्वजों की तस्वीर या फोटो को घर की दक्षिण दिशा में रखना शुभ माना जाता है। यह दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है, और पितरों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए इस दिशा में तस्वीर लगाना श्रेष्ठ होता है। इस दिशा में उनकी तस्वीर रखने से परिवार में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

तस्वीर को लेकर ना करें ये गलतियां
तस्वीर को हमेशा दीवार पर या किसी ऊंची जगह पर रखें। इसे फर्श या किसी ऐसी जगह पर नहीं रखना चाहिए जहां पैर लगें। इस बात का भी ध्यान रखें कि पूर्वजों की तस्वीर पर चढ़ी माला टूटी या खराब ना हो, समय-समय पर माला बदलते रहें।वास्तु शास्त्र में पूर्वजों की तस्वीरों को किचन, बेडरूम और सीढ़ियों वाले स्थान पर लगाने की भी मनाही की गई है. इससे पारिवारिक कलह बढ़ती है, घर में अशांति रहती है ।