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Nari

घर बैठकर फोन चलाने वाले बच्चे भी नहीं सेफ,  हर साल  2 करोड़ मासूमों का हो रहा ऑनलाइन यौन शोषण

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 04 Sep, 2026 11:48 AM
घर बैठकर फोन चलाने वाले बच्चे भी नहीं सेफ,  हर साल  2 करोड़ मासूमों का हो रहा ऑनलाइन यौन शोषण

नारी डेस्क: संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की एजेंसी, यूनिसेफ (UNICEF) की नई रिपोर्ट के अनुसार, हर साल 21 देशों में 2 करोड़ (20 मिलियन) तक बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण या दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। गुरुवार को जारी यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, कैरिबियन और पूर्वी यूरोप के देशों में 12 से 17 साल की उम्र के हर पांच में से एक से ज़्यादा बच्चे डिजिटल प्लैटफ़ॉर्म पर शोषण का शिकार हुए हैं।

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21,000 बच्चों पर किया गया सर्वे 

रिसर्चर्स ने 21 देशों में 12 से 17 साल के उन 21,000 बच्चों का सर्वे किया जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। यह सर्वे 2020-2021 और फिर 2024-2025 के बीच किया गया। उन्होंने उन 100 युवाओं के साथ भी गहराई से बातचीत की जिन्होंने बचपन में दुर्व्यवहार का सामना किया था। UNICEF के अनुसार, दुर्व्यवहार के आधे से ज़्यादा मामलों में सोशल मीडिया की भूमिका थी। UNICEF ने यह भी चेतावनी दी कि बच्चों द्वारा कम रिपोर्टिंग के कारण ये आंकड़े गलत हो सकते हैं। रिसर्चर्स ने पाया कि दुर्व्यवहार की सभी घटनाओं में से 1 प्रतिशत से भी कम मामलों की रिपोर्ट अधिकारियों को की गई।


अच्छे- बुरे को समझ नहीं पाते बच्चे

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जिन अवधियों का अध्ययन किया गया, उनमें 1.5 करोड़ से ज़्यादा बच्चे अवांछित यौन सामग्री के संपर्क में आए, 90 लाख बच्चों से उनकी मर्ज़ी के बिना यौन बातचीत करने या यौन तस्वीरें साझा करने के लिए कहा गया, और 40 लाख बच्चों की यौन तस्वीरें उनकी सहमति के बिना साझा की गईं। यूनिसेफ ने कहा कि समस्या इसलिए और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि बच्चे अक्सर यह नहीं समझ पाते कि उनके साथ गलत व्यवहार (abuse) हो रहा है या उन्हें यह नहीं पता होता कि इसकी शिकायत किससे करें, और शिकायत करने पर उन्हें बुरे नतीजों का डर होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि औपचारिक सिस्टम दूर के, जटिल या डरावने लग सकते हैं।

 

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बच्चों को लेकर बड़ी चिंता

यूनिसेफ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कैथरीन रसेल ने कहा- "यह रिपोर्ट एक दुखद सच्चाई सामने लाती है। जिन देशों का अध्ययन किया गया, उनमें 2 करोड़ से ज़्यादा बच्चे ऑनलाइन अवांछित स्पष्ट यौन सामग्री (explicit sexual content) या शोषण का शिकार हुए। ऐसा अक्सर उन डिजिटल जगहों पर हुआ जहां वे सीखते हैं, खेलते हैं और दोस्तों से जुड़ते हैं।" "इन अनुभवों से गहरा भावनात्मक और मानसिक तनाव होता है। कई बच्चे चुपचाप तकलीफ सहते हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि मदद के लिए किसके पास जाएं। हम इससे मुंह नहीं मोड़ सकते।"

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