नारी डेस्क : पेशाब करने के बाद टॉयलेट से निकलने के बावजूद अगर कुछ देर तक बूंद-बूंद यूरिन टपकता रहता है, तो इसे हमेशा सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेडिकल भाषा में इसे पोस्ट-मिक्चुरिशन ड्रिब्लिंग (Post-Micturition Dribbling) कहा जाता है। यह समस्या पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक देखने को मिलती है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। पेशाब करने के बाद कपड़ों में बूंदें आना या बार-बार टॉयलेट लौटने की जरूरत पड़ना असहज करने वाला हो सकता है। अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है या इसके साथ पेशाब से जुड़े दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या है पोस्ट-मिक्चुरिशन ड्रिब्लिंग?
पेशाब करने के बाद मूत्रमार्ग में थोड़ी मात्रा में यूरिन रह जाने और कुछ समय बाद उसके बूंदों के रूप में बाहर निकलने को पोस्ट-मिक्चुरिशन ड्रिब्लिंग कहा जाता है। यह खास तौर पर पुरुषों में देखने को मिलता है। इसके पीछे पेशाब की नली में बचा हुआ यूरिन, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी, प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या या कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं।

बढ़ा हुआ प्रोस्टेट
उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) यानी प्रोस्टेट का गैर-कैंसरकारी रूप से बढ़ना आम हो सकता है। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट मूत्रमार्ग पर दबाव डाल सकता है, जिससे यूरिन का फ्लो प्रभावित हो सकता है और ब्लैडर पूरी तरह खाली करने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में पेशाब करने के बाद भी कुछ यूरिन बचा रह सकता है, जिससे बाद में बूंद-बूंद यूरिन आने की समस्या हो सकती है।
पेल्विक फ्लोर मसल्स की कमजोरी
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां ब्लैडर और मूत्रमार्ग को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके कमजोर होने पर पेशाब के बाद बचा हुआ यूरिन पूरी तरह बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है और बाद में ड्रिब्लिंग हो सकती है। पेल्विक फ्लोर की कमजोरी के पीछे उम्र बढ़ना, मोटापा, लंबे समय तक भारी वजन उठाना, लगातार खांसी या कुछ सर्जरी जैसी स्थितियां भूमिका निभा सकती हैं।

नसों या ब्लैडर से जुड़ी समस्या
कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां या नसों से जुड़ी समस्याएं ब्लैडर और मूत्रमार्ग के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं। इससे यूरिन को स्टोर करने या पूरी तरह बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है और पेशाब के बाद लीकेज या ड्रिब्लिंग जैसी समस्या दिखाई दे सकती है। हालांकि, सिर्फ पेशाब के बाद बूंदें आने के आधार पर किसी एक बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच कर सकते हैं।
इन लक्षणों के साथ हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं
अगर पेशाब के बाद बूंद-बूंद यूरिन आने के साथ इनमें से कोई लक्षण भी दिखाई दे
तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी न करें
बार-बार पेशाब आना
पेशाब करते समय जलन या दर्द
पेशाब शुरू करने में परेशानी
यूरिन का फ्लो कमजोर या रुक-रुककर आना
ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास
पेशाब में खून आना
अचानक यूरिन कंट्रोल करने में परेशानी होना।

इलाज कैसे होता है?
इस समस्या का इलाज उसके मूल कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर पहले लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर कारण जानने की कोशिश करते हैं। जरूरत पड़ने पर यूरिन टेस्ट, प्रोस्टेट की जांच या ब्लैडर से जुड़ी अन्य जांच की सलाह दी जा सकती है। अगर समस्या पेल्विक फ्लोर की कमजोरी से जुड़ी हो, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज मददगार हो सकती हैं। वहीं, अगर बढ़ा हुआ प्रोस्टेट या कोई अन्य बीमारी कारण है, तो उसका इलाज किया जाता है।
नोट : पेशाब करने के बाद कभी-कभार एक-दो बूंद यूरिन आ जाना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, लंबे समय से बनी हुई है या इसके साथ दर्द, जलन, कमजोर यूरिन फ्लो या पेशाब में खून जैसे लक्षण हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर से जांच कराना सबसे बेहतर तरीका है।